⏳ कालखंड 1 (प्रथम अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
इस कालखंड के अंत तक छात्र—
- उत्तम पुरुष-एकवचन (अहम्) में क्रियापदों — उत्तिष्ठामि, करोमि, पिबामि, गच्छामि — का अर्थ और प्रयोग समझ सकेंगे।
- अपनी दिनचर्या (Daily Routine) के कुछ कार्यों को संस्कृत में बोल सकेंगे।
- ‘अहम्’ के साथ ‘आम्’ प्रत्यय वाले क्रियापद (लट् लकार — उत्तम पुरुष एकवचन) का निर्माण समझेंगे।
- सन्दीप और खुशी के संवाद के माध्यम से दिनचर्या का आरंभिक परिचय प्राप्त करेंगे।
2. शिक्षण-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 59-60)
- दिनचर्या-चित्र-कार्ड्स (उठना, पानी पीना, योग, पढ़ना, विद्यालय जाना)
- क्रियापद-चार्ट (उत्तम पुरुष एकवचन)
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
- दिनचर्या की चार्ट (सचित्र)
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पाठ 3 में ‘अहम्’ के साथ ‘अस्मि’ (हूँ) का प्रयोग सीखा है।
- उन्हें ‘अहम्’ = ‘मैं’ का ज्ञान है।
- उन्होंने पिछली कक्षाओं में दिनचर्या (जैसे — सुबह उठना, दाँत साफ करना) के बारे में पढ़ा है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure) – चरणबद्ध
चरण 1: प्रस्तावना (प्रेरक प्रश्न) – (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
कक्षा में प्रवेश करते ही विद्यार्थियों से पूछें—
- “आप सुबह सबसे पहले क्या करते हैं?”
- “क्या आप संस्कृत में बता सकते हैं — ‘मैं उठता हूँ’?”
- “आज हम अपनी दिनचर्या (Daily Routine) संस्कृत में कहना सीखेंगे।”
छात्र प्रतिक्रिया: छात्र अपनी दिनचर्या के कार्यों को हिंदी में बताएँगे।
उद्देश्य: दिनचर्या के विषय में रुचि उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – दिनचर्या एवं उत्तम पुरुष एकवचन (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) पाठ्यपुस्तक का आरंभिक संवाद (पृष्ठ 59) पढ़ें:
- “नमो नमः। मम नाम सन्दीपः। अहं मम दिनचर्यां वदामि।”
- “नमो नमः। मम नाम खुशी। अहम् अपि मम दिनचर्यां वदामि।”
अर्थ: “नमस्कार। मेरा नाम संदीप है। मैं अपनी दिनचर्या बताता हूँ। … मेरा नाम खुशी है। मैं भी अपनी दिनचर्या बताती/ता हूँ।”
(ख) प्रमुख क्रियापद (उत्तम पुरुष एकवचन) — बोर्ड पर:
| क्रियापद (संस्कृत) | हिंदी अर्थ | धातु (मूल) |
| उत्तिष्ठामि | मैं उठता/ती हूँ | उत् + स्था (स्था धातु) |
| करोमि | मैं करता/ती हूँ | कृ (करोति) |
| पिबामि | मैं पीता/ती हूँ | पा (पिबति) |
| गच्छामि | मैं जाता/ती हूँ | गम् (गच्छति) |
| वदामि | मैं बोलता/ती/कहता हूँ | वद् (वदति) |
| नमामि | मैं नमस्कार करता/ती हूँ | नम् (नमति) |
(ग) दिनचर्या के प्रथम कार्य (पृष्ठ 59 — चित्रों के साथ):
- अहं प्रतिदिनं प्रातः पञ्चवादने (५:००) उत्तिष्ठामि।
(मैं प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे उठता/ती हूँ।) - प्रथमं भूमेः वन्दनं करोमि, मातापितरौ च नमामि।
(पहले भूमि का वन्दन करता/ती हूँ, और माता-पिता को नमस्कार करता/ती हूँ।) - ततः उषःपानं करोमि, कोष्णं जलं पिबामि।
(तब उषःपान (सुबह का पानी) करता/ती हूँ, गुनगुना पानी पीता/ती हूँ।) - अहं सपाद-पञ्चवादने (५:१५) शौचं करोमि, तदनन्तरं मुखप्रक्षालनं दन्तधावनं च करोमि।
(मैं 5:15 पर शौच करता/ती हूँ, उसके बाद मुँह धोना और दाँत साफ करता/ती हूँ।)
चरण 3: श्रवण एवं अनुकरण – (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- सभी वाक्यों को सही उच्चारण के साथ 2-3 बार पढ़ें:
- “अहं प्रातः पञ्चवादने उत्तिष्ठामि।”
- “अहं भूमेः वन्दनं करोमि।”
- “अहं कोष्णं जलं पिबामि।”
- छात्र प्रत्येक वाक्य को 2-3 बार दोहराएँ।
- विशेष ध्यान दें: उत्तिष्ठामि (उत् + तिष्ठ + आमि), करोमि (कृ + ओ + मि) के उच्चारण पर।
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (10 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
निम्नलिखित प्रश्न पूछें—
- “अहं प्रातः किम् करोमि?” (उत्तिष्ठामि।)
- “‘उषःपानम्’ किम् अस्ति?” (गुनगुने पानी पीना।)
- “‘शौचम्’ किम् अस्ति?” (मल-मूत्र त्याग करना।)
- “‘मातापितरौ’ का अर्थ क्या है?” (माता और पिता — दोनों)
- “अहं कस्मिन् समये उत्तिष्ठामि?” (पञ्चवादने — 5:00 बजे)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| उत्तिष्ठामि | उठता/ती हूँ | अहं प्रातः उत्तिष्ठामि। |
| करोमि | करता/ती हूँ | अहं योगं करोमि। |
| पिबामि | पीता/ती हूँ | अहं जलं पिबामि। |
| नमामि | नमस्कार करता/ती हूँ | अहं मातरं नमामि। |
| गच्छामि | जाता/ती हूँ | अहं विद्यालयं गच्छामि। |
| वदामि | बोलता/ती/कहता हूँ | अहं दिनचर्यां वदामि। |
| प्रतिदिनम् | प्रतिदिन (Every day) | अहं प्रतिदिनं पठामि। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र ‘उत्तिष्ठामि’, ‘करोमि’, ‘पिबामि’, ‘गच्छामि’ का अर्थ बता सकेंगे।
- छात्र अपनी सुबह की दिनचर्या के 3-4 कार्य संस्कृत में बोल सकेंगे।
- छात्र ‘अहम्’ के साथ ‘आम्’ प्रत्यय (लट् लकार — उत्तम एकवचन) को पहचानेंगे।
- छात्र सन्दीप और खुशी के संवाद को समझेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘उत्तिष्ठामि’ का अर्थ क्या है?” (मैं उठता/ती हूँ।)
- “‘करोमि’ का अर्थ क्या है?” (मैं करता/ती हूँ।)
बोर्ड पर लिखवाएँ:
- “अहं प्रातः उत्तिष्ठामि।” — लिखवाएँ।
- “अहं जलं पिबामि।” — लिखवाएँ।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- अहं मातापितरौ ______ (नमामि / नमति) — उत्तर: नमामि
- अहं विद्यालयं ______ (गच्छति / गच्छामि) — उत्तर: गच्छामि
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने ‘उत्तम पुरुष एकवचन’ (‘आम्’ प्रत्यय) को समझा?
- क्या वे ‘गच्छामि’, ‘पिबामि’, ‘करोमि’ का सही उच्चारण कर पा रहे हैं?
- क्या उन्हें ‘मातापितरौ’ (द्विवचन) समझ आया?
- अगली अवधि के लिए योजना: समय-निर्देश (वादनम्, सपाद, सार्ध, पादोन) और संख्या 1-12 सिखाना है।
⏳ कालखंड 2 (द्वितीय अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- समय बताने के संस्कृत शब्दों को समझेंगे — वादनम्, सपाद, सार्ध, पादोन।
- घड़ी/डायल देखकर संस्कृत में समय बोल सकेंगे।
- संख्या 1-12 (एकम्, द्वे, त्रीणि, चत्वारि, पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट, नव, दश, एकादश, द्वादश) को पढ़ और लिख सकेंगे।
- समय और क्रियापद को जोड़कर वाक्य बना सकेंगे (जैसे — अहं षड्वादने उत्तिष्ठामि)।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 61 — समय-तालिका)
- एक बड़ी घड़ी (डायल) / मॉडल घड़ी
- फ्लैश कार्ड्स (संख्या 1-12)
- समय-चार्ट (सपाद, सार्ध, पादोन)
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों को हिंदी/अंग्रेज़ी में समय बताने (जैसे — 5:00, 5:15, 5:30, 6:45) का सामान्य ज्ञान है।
- उन्होंने पिछली अवधि में ‘वादने’ शब्द को ‘बजे’ के अर्थ में देखा है (पञ्चवादने — 5 बजे)।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का पुनःस्मरण:
“‘अहम्’ के साथ ‘उठना’ कैसे कहेंगे?” (उत्तिष्ठामि)
“‘विद्यालय जाना’ कैसे कहेंगे?” (गच्छामि) - अब प्रश्न करें:
“आप घड़ी में समय कैसे देखते हैं?”
“क्या आप जानते हैं कि ‘5:15’ को संस्कृत में क्या कहते हैं? — ‘सपाद-पञ्चवादनम्’।”
“‘5:30’ को — ‘सार्ध-पञ्चवादनम्’।”
“‘6:45’ को — ‘पादोन-सप्तवादनम्’।” - उद्देश्य: समय-निर्देश में रुचि उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – समय-निर्देश एवं संख्या 1-12 (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) संख्या 1-12 (बोर्ड पर — उच्चारण सहित):
| संख्या (अंक) | संस्कृत (पुल्लिङ्ग) | संस्कृत (नपुंसकलिङ्ग) | हिंदी |
| 1 | एकः | एकम् | एक |
| 2 | द्वौ | द्वे | दो |
| 3 | त्रयः | त्रीणि | तीन |
| 4 | चत्वारः | चत्वारि | चार |
| 5 | पञ्च | पञ्च | पाँच |
| 6 | षट् | षट् | छः |
| 7 | सप्त | सप्त | सात |
| 8 | अष्ट | अष्ट | आठ |
| 9 | नव | नव | नौ |
| 10 | दश | दश | दस |
| 11 | एकादश | एकादश | ग्यारह |
| 12 | द्वादश | द्वादश | बारह |
(ख) समय-निर्देश के सूत्र (बोर्ड पर):
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | उदाहरण |
| वादनम् | बजे (O’clock) | पञ्चवादनम् = 5:00 बजे |
| सपाद | सवा (Quarter past) | सपाद-पञ्चवादनम् = 5:15 |
| सार्ध | साढ़े (Half past) | सार्ध-पञ्चवादनम् = 5:30 |
| पादोन | पौने (Quarter to) | पादोन-षड्वादनम् = 5:45 |
(ग) समय-तालिका (पाठ्यपुस्तक — पृष्ठ 61):
| समय (अंक) | संस्कृत (शब्दों में) |
| 5:00 | पञ्चवादनम् |
| 5:15 | सपाद-पञ्चवादनम् |
| 5:30 | सार्ध-पञ्चवादनम् |
| 5:45 | पादोन-षड्वादनम् |
| 6:00 | षड्वादनम् |
| 6:30 | सार्ध-षड्वादनम् |
| 6:45 | पादोन-सप्तवादनम् |
| 7:00 | सप्तवादनम् |
| 7:30 | सार्ध-सप्तवादनम् |
| 8:00 | अष्टवादनम् |
(घ) महत्वपूर्ण नियम:
- सपाद = सवा (15 मिनट) → अगले घंटे के साथ (जैसे — 5:15 = सपाद-पञ्च)
- सार्ध = साढ़े (30 मिनट) → अगले घंटे के साथ (जैसे — 5:30 = सार्ध-पञ्च)
- पादोन = पौने (45 मिनट) → अगले घंटे के साथ (जैसे — 5:45 = पादोन-षट्) — विशेष ध्यान दें!
- पादोन-षड्वादनम् = 5:45 (6 बजने में पौने = 15 मिनट कम)
चरण 3: घड़ी-अभ्यास (गतिविधि) – (8 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- बड़ी घड़ी (डायल) पर समय दिखाएँ:
- घड़ी पर 5:00 दिखाएँ → छात्र कहें: “पञ्चवादनम्”
- 5:15 दिखाएँ → “सपाद-पञ्चवादनम्”
- 5:30 दिखाएँ → “सार्ध-पञ्चवादनम्”
- 5:45 दिखाएँ → “पादोन-षड्वादनम्”
- छात्रों को बारी-बारी से बुलाएँ और घड़ी पर कोई समय दिखाने/बताने को कहें।
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (7 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “‘पञ्चवादनम्’ कितने बजे को कहते हैं?” (5:00)
- “‘सपाद-पञ्चवादनम्’ कितने बजे को कहते हैं?” (5:15)
- “‘सार्ध-पञ्चवादनम्’ कितने बजे को कहते हैं?” (5:30)
- “‘पादोन-षड्वादनम्’ कितने बजे को कहते हैं?” (5:45 — ध्यान दें, 6 बजने में पौने = 5:45)
- “7:15 को संस्कृत में क्या कहेंगे?” (सपाद-सप्तवादनम्)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| वादनम् | बजे (O’clock) | अहं षड्वादने उत्तिष्ठामि। |
| सपाद | सवा (Quarter past) | अहं सपाद-षड्वादने पठामि। |
| सार्ध | साढ़े (Half past) | अहं सार्ध-सप्तवादने भोजनं करोमि। |
| पादोन | पौने (Quarter to) | अहं पादोन-सप्तवादने स्नानं करोमि। |
| अंकः | अंक (Number) | एकादश अंकः अस्ति। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र ‘वादनम्’, ‘सपाद’, ‘सार्ध’, ‘पादोन’ शब्दों का अर्थ बता सकेंगे।
- छात्र संख्या 1-12 को संस्कृत में पढ़ सकेंगे।
- छात्र घड़ी देखकर संस्कृत में समय बोल सकेंगे।
- छात्र ‘पादोन’ (पौने) में अगले घंटे का प्रयोग होता है — यह नियम समझेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘सार्ध’ का अर्थ क्या है?” (साढ़े)
- “‘पादोन-अष्टवादनम्’ कितने बजे को कहते हैं?” (7:45 — 8 बजने में पौने)
- “‘एकादश’ किस संख्या को कहते हैं?” (ग्यारह)
लिखित कार्य:
- 6:30 को संस्कृत में लिखें — उत्तर: सार्ध-षड्वादनम्
- 9:45 को संस्कृत में लिखें — उत्तर: पादोन-दशवादनम्
रिक्त स्थान पूर्ति:
- 7:15 = ______ (सपाद-सप्तवादनम् / पादोन-सप्तवादनम्) — उत्तर: सपाद-सप्तवादनम्
- 8:45 = ______ (सार्ध-अष्टवादनम् / पादोन-नववादनम्) — उत्तर: पादोन-नववादनम्
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने ‘पादोन’ (पौने — अगले घंटे में) का नियम समझ लिया?
- क्या वे संख्या 1-12 को संस्कृत में सही से बोल पा रहे हैं?
- क्या घड़ी अभ्यास में सभी छात्रों ने भाग लिया?
- अगली अवधि के लिए योजना: पूरी दिनचर्या (सन्दीप/खुशी के अनुसार) का क्रमबद्ध वाचन एवं लेखन कराना है।
⏳ कालखंड 3 (तृतीय अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- सन्दीप/खुशी की पूरी दिनचर्या (प्रातः 5:00 से 8:00 तक) को क्रमबद्ध रूप से पढ़ेंगे और समझेंगे।
- दिनचर्या के कार्यों को समय के साथ जोड़कर वाक्य बनाएँगे।
- नए क्रियापद — स्नानं करोमि, स्वाध्यायं करोमि, प्रार्थनां करोमि, परिसरं स्वच्छं करोमि — सीखेंगे।
- अपनी दिनचर्या के 5-7 वाक्य लिख सकेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 59-60 — दिनचर्या के चित्र)
- दिनचर्या का फ्लो-चार्ट (क्रमबद्ध)
- क्रियापद-चार्ट (नए क्रियापद)
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने समय-निर्देश (वादनम्, सपाद, सार्ध, पादोन) सीख लिए हैं (पिछली अवधि)।
- उन्होंने 5:00, 5:15, 5:30, 6:00 आदि पर होने वाले कार्यों को आंशिक रूप से देखा है (कालखंड 1)।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का पुनःस्मरण:
“‘सपाद’ का अर्थ क्या है? (सवा) ‘पादोन’ का? (पौने)”
“5:30 को संस्कृत में क्या कहेंगे?” (सार्ध-पञ्चवादनम्) - अब प्रश्न करें:
“संदीप प्रातः 5:00 बजे क्या करता है?” (उत्तिष्ठति — उठता है — लेकिन ‘अहम्’ रूप में — उत्तिष्ठामि)
“संदीप 6:00 बजे क्या करता है?” (स्वाध्यायम् — पढ़ाई) - उद्देश्य: दिनचर्या को क्रमबद्ध रूप से देखने की रुचि उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – पूर्ण दिनचर्या (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) संदीप/खुशी की दिनचर्या — क्रमबद्ध (बोर्ड पर तालिका — चित्रों के साथ):
| क्र.सं. | समय | कार्य (संस्कृत) | हिंदी अर्थ |
| 1 | 5:00 | उत्तिष्ठामि | उठता/ती हूँ |
| 2 | 5:00 | भूमेः वन्दनं करोमि, मातापितरौ नमामि | भूमि वन्दन, माता-पिता को नमस्कार |
| 3 | 5:00 | उषःपानं करोमि, कोष्णं जलं पिबामि | गुनगुना पानी पीता/ती हूँ |
| 4 | 5:15 | शौचं करोमि, मुखप्रक्षालनम्, दन्तधावनम् | शौच, मुँह-दाँत साफ |
| 5 | 5:30 | सूर्य-नमस्कारं योगासनं च करोमि | सूर्यनमस्कार व योग |
| 6 | 6:00 | स्वाध्यायं करोमि | स्वाध्याय (पढ़ाई) |
| 7 | 6:30 | परिसरं स्वच्छं करोमि | अपने आस-पास सफाई |
| 8 | 6:45 | स्नानं करोमि | स्नान |
| 9 | 6:45 | मातुः पितुः च चरणवन्दनं करोमि | माता-पिता के चरण छूता/ती हूँ |
| 10 | 7:00 | प्रार्थनां करोमि, गीतापाठं करोमि | प्रार्थना व गीता पाठ |
| 11 | 7:30 | प्रातराशं करोमि | नाश्ता |
| 12 | 8:00 | विद्यालयं गच्छामि | विद्यालय जाता/ती हूँ |
(ख) नए क्रियापद (बोर्ड पर):
| क्रियापद | हिंदी अर्थ | धातु |
| स्नानं करोमि | स्नान करता/ती हूँ | स्नान् + कृ |
| स्वाध्यायं करोमि | स्वाध्याय/पढ़ाई करता/ती हूँ | स्व + अध्याय + कृ |
| प्रार्थनां करोमि | प्रार्थना करता/ती हूँ | प्रार्थना + कृ |
| परिसरं स्वच्छं करोमि | सफाई करता/ती हूँ | परिसर + स्वच्छ + कृ |
| चरणवन्दनं करोमि | चरण छूता/ती हूँ | चरण + वन्दन + कृ |
चरण 3: सस्वर वाचन (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 59-60) के पाठ को पहले स्वयं पढ़ें, फिर छात्रों से दोहराएँ।
- प्रत्येक वाक्य को समय सहित पढ़ें:
- “अहं प्रतिदिनं प्रातः पञ्चवादने उत्तिष्ठामि।”
- “प्रथमं भूमेः वन्दनं करोमि, मातापितरौ च नमामि।”
- “ततः उषःपानं करोमि, कोष्णं जलं पिबामि।”
- … इसी प्रकार सभी वाक्यों का अभ्यास।
- छात्र प्रत्येक वाक्य को 2 बार दोहराएँ।
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (10 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “सन्दीपः कस्मिन् समये उत्तिष्ठति?” (प्रातः पञ्चवादने)
- “सन्दीपः कीदृशं जलं पिबति?” (कोष्णम् — गुनगुना)
- “सन्दीपः कस्मिन् समये योगं करोति?” (सार्ध-पञ्चवादने)
- “सन्दीपः कुत्र गच्छति?” (विद्यालयम्)
- “सन्दीपः कदा प्रार्थनां करोति?” (सप्तवादने — 7:00)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| स्वाध्यायः | स्वाध्याय (Self-study) | अहं स्वाध्यायं करोमि। |
| प्रार्थना | प्रार्थना (Prayer) | अहं प्रार्थनां करोमि। |
| स्नानम् | स्नान (Bath) | अहं स्नानं करोमि। |
| प्रातराशः | नाश्ता (Breakfast) | अहं प्रातराशं करोमि। |
| परिसरः | परिसर (Premises) | अहं परिसरं स्वच्छं करोमि। |
| चरणवन्दनम् | चरण स्पर्श (Touching feet) | अहं मातुः चरणवन्दनं करोमि। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र संदीप/खुशी की पूरी दिनचर्या (5:00-8:00) को क्रम से बता सकेंगे।
- छात्र नए क्रियापदों (स्नानं करोमि, स्वाध्यायं करोमि, प्रार्थनां करोमि) का प्रयोग कर सकेंगे।
- छात्र समय और कार्य को जोड़कर वाक्य बना सकेंगे।
- छात्र अपनी दिनचर्या के 5-7 वाक्य लिख सकेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “सन्दीपः कस्मिन् समये स्वाध्यायं करोति?” (षड्वादने — 6:00)
- “सन्दीपः कस्मिन् समये स्नानं करोति?” (पादोन-सप्तवादने — 6:45)
लिखित कार्य:
- सन्दीप की दिनचर्या में से 5 वाक्य लिखने को कहें।
- “अहं 6:30 ______ करोमि।” — रिक्त स्थान भरें (स्वच्छं / स्वाध्यायं — उत्तर: परिसरं स्वच्छं)
रिक्त स्थान पूर्ति:
- अहं प्रातः 7:00 ______ करोमि। (प्रार्थनाम् / स्नानम्) — उत्तर: प्रार्थनाम्
- अहं 8:00 विद्यालयं ______ (गच्छामि / गच्छति) — उत्तर: गच्छामि
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने दिनचर्या को क्रमबद्ध रूप से समझ लिया?
- क्या वे समय और कार्य का सही मेल कर पा रहे हैं?
- क्या ‘स्वाध्यायं करोमि’, ‘प्रार्थनां करोमि’ का प्रयोग स्पष्ट हो पाया?
- अगली अवधि के लिए योजना: शिष्टाचार (सद्गुण), भारतीय-ज्ञान-परम्परा (घटीयन्त्र), प्रातः स्मरण श्लोक सिखाना है।
⏳ कालखंड 4 (चौथी अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- शिष्टाचार (सद्गुण) — गुरुवन्दनम्, वृद्धसेवा, अतिथिसत्कार, प्राणिषु दया, सत्यकथनम् आदि — को पहचानेंगे और उनका महत्व समझेंगे।
- भारतीय-ज्ञान-परम्परा — प्राचीन भारतीय समय-मापन यंत्र (घटीयन्त्र, जन्तर-मन्तर, कोणार्क सूर्यमन्दिर) — से परिचित होंगे।
- ‘प्रातः स्मरणम्’ और ‘भूमिवन्दना’ श्लोकों को पढ़ेंगे और उनका अर्थ समझेंगे।
- सद्गुणों और संस्कारों को अपने जीवन से जोड़ेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 63 — शिष्टाचार पद, योग्यताविस्तर)
- भारत का मानचित्र (कोणार्क, जयपुर, दिल्ली दिखाने हेतु)
- जन्तर-मन्तर, सूर्यमन्दिर के चित्र
- श्लोक-चार्ट — ‘काराघे वसते लक्ष्मीः’, ‘समुद्रवसने देवि’
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने दिनचर्या और शिष्टाचार (जैसे — माता-पिता को नमस्कार) का आंशिक ज्ञान पिछली अवधियों में प्राप्त किया है।
- उन्हें समय (घड़ी) का सामान्य ज्ञान है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का पुनःस्मरण:
“सन्दीपः सुबह किन-किन कार्यों को करता है?” (उठना, योग, पढ़ाई, स्नान, प्रार्थना, विद्यालय) - अब प्रश्न करें:
“क्या आप जानते हैं कि संस्कृत में अच्छी आदतों (गुणों) को क्या कहते हैं? — शिष्टाचारः।”
“प्राचीन भारत में लोग बिना घड़ी के समय कैसे देखते थे?” — (सूर्य, पानी की घड़ी, जन्तर-मन्तर) - उद्देश्य: शिष्टाचार और प्राचीन भारतीय विज्ञान में रुचि उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – शिष्टाचार एवं सद्गुण (10 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) शिष्टाचार के सद्गुण (पाठ्यपुस्तक — पृष्ठ 63 — पट्टिका से):
| सद्गुण (संस्कृत) | हिंदी अर्थ |
| गुरुवन्दनम् | गुरुजनों को नमस्कार |
| वृद्धसेवा | बुजुर्गों की सेवा |
| अतिथिसत्कारः | अतिथि का सम्मान |
| मातृप्रेम | माता के प्रति प्रेम |
| पितृभक्तिः | पिता के प्रति भक्ति |
| ज्येष्ठेषु आदरः | बड़ों का आदर |
| कनिष्ठेषु प्रीतिः | छोटों के प्रति प्रेम |
| प्राणिषु दया | सभी प्राणियों पर दया |
| सत्यकथनम् | सच बोलना |
| परोपकारः | दूसरों की सहायता |
| प्रकृतिरक्षणम् | प्रकृति की रक्षा |
(ख) चर्चा:
- “आप इनमें से कौन-से गुण अपने जीवन में अपनाते हैं?”
- “किसी एक गुण का उदाहरण दें।” (जैसे — प्रातः माता-पिता को प्रणाम करना = गुरुवन्दनम्/मातृप्रेम)
चरण 3: भारतीय-ज्ञान-परम्परा – समय मापन (10 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) प्राचीन भारतीय समय-यंत्र (चित्रों के साथ):
- सूर्यमन्दिर – कोणार्क (ओडिशा):
- विशाल रथ के आकार का मन्दिर।
- इसके पहिये (चक्र) सूर्य की गति के अनुसार समय बताते थे।
- संस्कृत शब्द: ‘कोणार्कः’ (कोण + अर्क = सूर्य)
- जन्तर-मन्तर – जयपुर (राजस्थान):
- महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित।
- विशाल पत्थर की घड़ियाँ (Yantras) — घटिकायन्त्रम् (Water clock) और सूर्यघटी (Sundial)।
- जन्तर-मन्तर – दिल्ली:
- मिश्रयन्त्रम् — विभिन्न प्रकार के समय-मापन यंत्रों का समूह।
(ख) ‘घटी’ की अवधारणा:
- 1 घटी = 24 मिनट (प्राचीन भारतीय समय-मापन)
(ग) सारांश: प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों ने बिना बिजली/बैटरी के अत्यंत सटीक समय-मापन यंत्र बनाए — यह भारतीय विज्ञान की महानता है।
चरण 4: प्रातः स्मरणम् एवं भूमिवन्दना (8 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) प्रातः स्मरणम् श्लोक (पृष्ठ 63):
काराघे वसते लक्ष्मीः कर्मध्ये सरस्वती।
कर्मल्ले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।
भावार्थ: “हाथ की हथेली में लक्ष्मी (धन) निवास करती है, कर्म (कार्य) में सरस्वती (विद्या) निवास करती है, कर्मल्ले? (या कर्मले?) में गोविन्द (भगवान) निवास करते हैं — प्रातः अपने हाथों को देखो (करदर्शनम्)।”
(नोट: श्लोक का अर्थ विद्वानों/पुस्तक के अनुसार लें — मुख्य बात यह है कि प्रातः शुभ कार्यों की प्रेरणा मिलती है।)
(ख) भूमिवन्दना श्लोक:
समुद्रवसने देवि, पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं, पादस्पर्शं क्षमस्व मे।।
भावार्थ: “हे देवी (भूमि)! जो समुद्र को वस्त्र के रूप में धारण करती हो, जिसके स्तन पर्वत हैं, हे विष्णु-पत्नी (पृथ्वी)! आपको नमस्कार है। मेरे पैरों के स्पर्श को क्षमा करें।” (प्रातः भूमि पर पैर रखने से पहले यह श्लोक कहा जाता है।)
(ग) स्मरण: छात्रों को इन श्लोकों को 3-4 बार दोहराने को कहें और घर पर स्मरण करने के लिए कहें।
चरण 5: निष्कर्ष एवं चर्चा (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “गुरुवन्दनम् का अर्थ क्या है?” (गुरुजनों को नमस्कार)
- “प्राणिषु दया का क्या अर्थ है?” (सभी प्राणियों पर दया)
- “कोणार्क किस राज्य में है?” (ओडिशा)
- “प्रातः करदर्शनम् क्यों करते हैं?” (शुभ कार्यों के लिए प्रेरणा)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| शिष्टाचारः | शिष्टाचार (Good manners) | शिष्टाचारः मनुष्यस्य भूषणम्। |
| सद्गुणः | सद्गुण (Virtue) | सद्गुणाः जीवनं सुन्दरं कुर्वन्ति। |
| घटिकायन्त्रम् | घड़ी/समय-यंत्र | घटिकायन्त्रं जयपुरे अस्ति। |
| सूर्यघटी | धूप-घड़ी (Sundial) | सूर्यघट्या समयं पश्यामः। |
| प्रातःस्मरणम् | प्रातः का स्मरण | प्रातःस्मरणं शुभम्। |
| भूमिवन्दना | भूमि को नमस्कार | भूमिवन्दनां करोमि। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र शिष्टाचार के 5-7 सद्गुणों के नाम बता सकेंगे।
- छात्र कोणार्क सूर्यमन्दिर और जन्तर-मन्तर के बारे में जानेंगे।
- छात्र ‘प्रातः स्मरणम्’ और ‘भूमिवन्दना’ श्लोकों को पढ़ सकेंगे और उनका अर्थ समझेंगे।
- छात्र प्राचीन भारतीय विज्ञान के प्रति गर्व अनुभव करेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “अतिथिसत्कारः का अर्थ क्या है?” (अतिथि का सम्मान)
- “सत्यकथनम् का अर्थ क्या है?” (सच बोलना)
- “कोणार्क-क्षेत्रे किं प्रसिद्धम्?” (सूर्यमन्दिरम्)
लिखित कार्य:
- शिष्टाचार-सूची में से 5 सद्गुण लिखने को कहें (गुरुवन्दनम्, वृद्धसेवा, सत्यकथनम्, प्राणिषु दया, परोपकारः)।
- “जन्तर-मन्तर” किस राज्य में है? लिखें (जयपुरम् — राजस्थान)
रिक्त स्थान पूर्ति:
- ______ इत्यस्य अर्थः ‘सभी प्राणियों पर दया’। (प्राणिषु दया / अतिथिसत्कारः) — उत्तर: प्राणिषु दया
- ‘समुद्रवसने देवि’ — इत्यस्मिन् श्लोके ‘देवि’ कम् आह्वयति? (भूमिम् / गङ्गाम्) — उत्तर: भूमिम्
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने शिष्टाचार के गुणों को अपने जीवन से जोड़ा?
- क्या उन्होंने प्राचीन भारतीय समय-यंत्रों के बारे में जानकर रुचि दिखाई?
- क्या श्लोकों का अर्थ समझ आया?
- अगली अवधि के लिए योजना: पाठ्यपुस्तक के अभ्यास, परियोजना-कार्य (घड़ी, दिनचर्या, श्लोक-संग्रह) और सारांश कराना है।
⏳ कालखंड 5 (पाँचवीं अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 63-65) के सभी अभ्यासों को पूरा करेंगे।
- ‘शिष्टाचार’ शब्दों का सही चयन करके वाक्य/सूची बनाएँगे।
- समय को अंकों में और अक्षरों में (संस्कृत) लिख सकेंगे।
- प्रश्न-निर्माण (कदा? — कब?) का अभ्यास करेंगे।
- परियोजना-कार्य — घड़ी बनाना, दिनचर्या लिखना, श्लोक-संग्रह — करेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 63-65)
- अभ्यास-पत्रिका (Worksheets)
- A3 शीट/चार्ट पेपर (परियोजना-कार्य हेतु)
- रंगीन पेन/मार्कर
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पिछली चार अवधियों में दिनचर्या, समय-निर्देश, क्रियापद, शिष्टाचार, भारतीय-ज्ञान-परम्परा पढ़-लिख ली है।
- उन्होंने अधिकांश शब्दावली और वाक्य-रचना सीख ली है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधियों का संक्षिप्त पुनःस्मरण:
“दिनचर्या के 5 कार्य संस्कृत में बताएँ।”
“‘सार्ध’ और ‘पादोन’ में क्या अंतर है?”
“शिष्टाचार के 3 गुण बताएँ।” - अब घोषित करें:
“आज हम पाठ के सभी अभ्यास पूरे करेंगे और परियोजना-कार्य भी करेंगे।”
चरण 2: अभ्यास (पाठ्यपुस्तक – पृष्ठ 63-65) – 15 मिनट
शिक्षक क्रिया:
छात्रों को निम्नलिखित अभ्यास करने को कहें:
- पृष्ठ 63 — अभ्यास 1: शिष्टाचार-सूची से सद्गुण चुनकर लिखें (जैसे — गुरुवन्दनम्, मातृप्रेम, सत्यकथनम् आदि)।
- पृष्ठ 63 — अभ्यास 2: उदाहरणानुगुणं समय को संख्या में लिखें:
- पादोन-सप्तवादनम् → 6:45
- सार्ध-दशवादनम् → 10:30
- दशवादनम् → 10:00
- सपाद-षड्वादनम् → 6:15
- पृष्ठ 63 — अभ्यास 3: उदाहरणानुगुणं समय को अक्षरों (संस्कृत) में लिखें:
- 06:00 → षड्वादनम्
- 12:00 → द्वादशवादनम्
- 05:30 → सार्ध-पञ्चवादनम्
- 06:45 → पादोन-सप्तवादनम्
- 09:45 → पादोन-दशवादनम्
- 11:30 → सार्ध-एकादशवादनम्
- पृष्ठ 64 — अभ्यास 4: उदाहरणानुगुणं प्रश्न-निर्माण (कदा? — कब?):
- “सः सार्ध-सप्तवादने अध्ययनं करोति।” → “सः कदा अध्ययनं करोति?”
- पृष्ठ 64 — अभ्यास 5: अपनी दिनचर्या को 8-10 वाक्यों में लिखें।
- उदाहरण: “अहं प्रातः षड्वादने उत्तिष्ठामि। …”
- पृष्ठ 64 — अभ्यास 6: वाक्यों में शिष्टाचार-शब्द योजित करें (जैसे — “सा दुर्बलानां सहाय्यं करोति।” — ‘सहाय्यम्’ शिष्टाचार शब्द है)।
- शिक्षक घूम-घूमकर सहायता करेंगे और वर्तनी (Spelling) सुधारेंगे।
चरण 3: योग्यताविस्तर – प्राचीन समय-यंत्र एवं श्लोक (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- योग्यताविस्तर (पृष्ठ 65) की पुनरावृत्ति:
- कोणार्क सूर्यमन्दिर के चक्र (समय बताने वाले)
- जयपुर का जन्तर-मन्तर (घटिकायन्त्रम्)
- दिल्ली का मिश्रयन्त्रम्
- प्रातः स्मरणम् और भूमिवन्दना श्लोकों की पुनरावृत्ति (उच्चारण + अर्थ)।
चरण 4: परियोजना-कार्य (पृष्ठ 65) – 8 मिनट
शिक्षक क्रिया:
छात्रों को परियोजना-कार्य समझाएँ:
- कार्य 1: स्फोरकपत्र (Chart) पर घड़ी का चित्र बनाएँ और उसमें विभिन्न समय (जैसे — 6:00, 7:15, 8:30, 9:45) को संस्कृत में लिखें।
- कार्य 2: माता/पिता के साथ चर्चा करके अपनी दिनचर्या संस्कृत में लिखें (10-12 वाक्य)।
- कार्य 3: शिष्टाचार पर 5 श्लोकों (सुभाषितों) का संग्रह करें और उन्हें स्मरण करें।
निर्देश: यह कार्य घर पर पूरा करना है और अगली कक्षा में प्रस्तुत करना है।
चरण 5: सारांश एवं आकलन (7 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पूरे पाठ का संक्षिप्त सारांश:
“इस पाठ में हमने अपनी दिनचर्या (सुबह के कार्य) संस्कृत में कहना सीखा। हमने समय बताना सीखा — वादनम्, सपाद, सार्ध, पादोन। हमने शिष्टाचार और प्राचीन भारतीय समय-यंत्रों के बारे में जाना। हमने ‘प्रातः स्मरणम्’ और ‘भूमिवन्दना’ श्लोक सीखे।”
मूल्यांकन प्रश्न:
- “अहं प्रातः 6:00 ______” — रिक्त स्थान भरें (उत्तिष्ठामि / गच्छामि)
- “7:30” को संस्कृत में क्या कहते हैं? (सार्ध-सप्तवादनम्)
- “8:45” को संस्कृत में क्या कहते हैं? (पादोन-नववादनम्)
- “शिष्टाचारस्य एकं सद्गुणम्” लिखें। (जैसे — गुरुवन्दनम्)
- “कोणार्क-क्षेत्रे किं प्रसिद्धम्?” (सूर्यमन्दिरम्)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| कदा | कब? (When?) | भवान् कदा उत्तिष्ठति? |
| प्रतिदिनम् | प्रतिदिन (Every day) | अहं प्रतिदिनं पठामि। |
| तदनन्तरम् | उसके बाद (After that) | तदनन्तरं स्नानं करोमि। |
| ततः | तब (Then) | ततः विद्यालयं गच्छामि। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र पाठ के सभी अभ्यासों को पूरा कर चुके होंगे।
- छात्र समय को अंकों और अक्षरों (संस्कृत) में परिवर्तित कर सकेंगे।
- छात्र अपनी दिनचर्या को 8-10 वाक्यों में संस्कृत में लिख सकेंगे।
- छात्र शिष्टाचार-सद्गुणों को पहचानेंगे और उनका महत्व समझेंगे।
- छात्र परियोजना-कार्य (घड़ी, दिनचर्या, श्लोक-संग्रह) पूरा करेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “6:15 को संस्कृत में क्या कहते हैं?” (सपाद-षड्वादनम्)
- “‘कदा’ का अर्थ क्या है?” (कब?)
लिखित कार्य:
- अपनी दिनचर्या के 5 वाक्य लिखने को कहें (प्रातः से विद्यालय जाने तक)।
- “पादोन-नववादनम्” को अंकों में लिखें (8:45)
रिक्त स्थान पूर्ति:
- अहं प्रातः 5:30 ______ करोमि। (सूर्य-नमस्कारम् / प्रातराशम्) — उत्तर: सूर्य-नमस्कारम्
- अहं 8:00 विद्यालयं ______ (गच्छामि / गच्छतः) — उत्तर: गच्छामि
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने सभी अभ्यासों को स्वतंत्र रूप से हल कर लिया?
- क्या ‘कदा’ (कब?) का प्रयोग प्रश्न-निर्माण में समझ आया?
- क्या वे अपनी दिनचर्या को संस्कृत में लिख पा रहे हैं?
- परियोजना-कार्य (घड़ी, दिनचर्या, श्लोक) के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
- अगले पाठ हेतु तैयारी: पाठ 5 — “शूराः वयं धीराः वयम्” (देशभक्ति गीत, भारतीय वीर, सर्वनाम बहुवचन) का आरंभ करना है।


