⏳ कालखंड 1 (प्रथम अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
इस कालखंड के अंत तक छात्र—
- पाठ के संदर्भ (प्राकृतिक सौंदर्य एवं उद्यान) को समझ सकेंगे।
- प्राकृतिक तत्वों के संस्कृत नाम — उद्यानम्, पुष्पाणि, पर्णानि, खगाः, जन्तवः, निसर्गः — का अर्थ एवं प्रयोग जान सकेंगे।
- ‘अमृत-उद्यानम्’ (राष्ट्रपति भवन) और उसकी विशेषता से परिचित होंगे।
- पाठ के आरंभिक चित्र-वर्णन को समझ सकेंगे और उसका सस्वर पाठ कर सकेंगे।
2. शिक्षण-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 95 — उद्यान का चित्र एवं परिचय)
- राष्ट्रपति भवन एवं अमृत-उद्यान के चित्र
- प्राकृतिक दृश्यों के चित्र-कार्ड्स (पुष्प, पर्ण, पक्षी, पशु)
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पिछली कक्षाओं में प्रकृति (पेड़-पौधे, फूल, पशु-पक्षी) के बारे में पढ़ा है।
- उन्हें ‘उद्यान’ (बगीचा), ‘पुष्प’ (फूल) का सामान्य ज्ञान है।
- उन्होंने पाठ 4 और 5 में वर्णनात्मक पाठ पढ़े हैं।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure) – चरणबद्ध
चरण 1: प्रस्तावना (प्रेरक प्रश्न) – (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
कक्षा में प्रवेश करते ही विद्यार्थियों से पूछें—
- “आपको बगीचा (उद्यान) पसंद है? बगीचे में आपको क्या-क्या देखने को मिलता है?”
- “क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के पास एक बहुत सुंदर बगीचा है — ‘अमृत-उद्यान’?”
- “आज हम एक ऐसे पाठ को पढ़ेंगे, जिसमें प्रकृति की सुंदरता और रंगों का वर्णन है।”
छात्र प्रतिक्रिया: छात्र अपने अनुभव (बगीचे, फूल, पेड़) साझा करेंगे।
उद्देश्य: प्रकृति-वर्णन के विषय में रुचि उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – उद्यान-परिचय एवं नई शब्दावली (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) पाठ्यपुस्तक — पृष्ठ 95 का पाठांश (उद्यान का परिचय):
“उद्यानस्य चित्रम् उपरि प्रदर्शितम्। एतत् राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे विद्यमानम् अमृत-उद्यानम् अस्ति। अत्र शताधिक-प्रकारकाणि पाटलपुष्पाणि सन्ति। सामान्यतः पञ्चसहस्राधिकानि ऋतुपुष्पाणि च सन्ति। रमणीयः निसर्गः विविधैः वर्णैः सर्वेषां चित्तम् आकर्षित।”
हिंदी अनुवाद: “उद्यान का चित्र ऊपर दिखाया गया है। यह राष्ट्रपति भवन के परिसर में स्थित अमृत-उद्यान है। यहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब (पाटलपुष्प) हैं। सामान्यतः पाँच हजार से अधिक मौसमी फूल हैं। सुंदर प्रकृति विभिन्न रंगों से सबका मन आकर्षित करती है।”
(ख) शब्दार्थ एवं नई शब्दावली (बोर्ड पर):
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
| उद्यानम् | बगीचा (Garden) |
| अमृत-उद्यानम् | अमृत उद्यान (Mughal Garden / Amrit Udyan) |
| परिसरः | परिसर (Premises) |
| पाटलपुष्पाणि | गुलाब (Roses) |
| ऋतुपुष्पाणि | मौसमी फूल (Seasonal flowers) |
| रमणीयः | सुंदर (Beautiful) |
| निसर्गः | प्रकृति (Nature) |
| विविधैः | विभिन्न (Various) |
| वर्णैः | रंगों से (By colors) |
| चित्तम् | मन (Mind) |
| आकर्षित | आकर्षित करता है (Attracts) |
चरण 3: श्रवण एवं अनुकरण (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पृष्ठ 95 के पाठांश को सही उच्चारण के साथ 2-3 बार पढ़ें।
- छात्र प्रत्येक वाक्य को दोहराएँ।
- विशेष ध्यान दें: ‘अमृत-उद्यानम्’, ‘रमणीयः निसर्गः’ — इनके उच्चारण पर।
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (10 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
निम्नलिखित प्रश्न पूछें—
- “अमृत-उद्यानम् कुत्र अस्ति?” (राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे)
- “तत्र कानि पुष्पाणि सन्ति?” (पाटलपुष्पाणि — गुलाब)
- “कति प्रकारकाणि पाटलपुष्पाणि सन्ति?” (शताधिकानि — 100 से अधिक)
- “निसर्गः कः?” (प्रकृति)
- “कः सर्वेषां चित्तम् आकर्षित?” (रमणीयः निसर्गः)
गतिविधि: छात्रों को कक्षा में किसी एक चित्र/पौधे का वर्णन (3-4 वाक्यों में) हिंदी/संस्कृत मिश्रित में करने को कहें।
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| उद्यानम् | बगीचा | अमृत-उद्यानं रमणीयम् अस्ति। |
| निसर्गः | प्रकृति | निसर्गः रमणीयः अस्ति। |
| पुष्पाणि | फूल | उद्याने पुष्पाणि सन्ति। |
| पर्णानि | पत्ते | वृक्षस्य पर्णानि हरितानि। |
| खगाः | पक्षी | खगाः आकाशे उड्डयन्ते। |
| जन्तवः | जीव-जंतु | उद्याने जन्तवः सन्ति। |
| रमणीयः | सुंदर | निसर्गः रमणीयः अस्ति। |
| विविधाः | विभिन्न | उद्याने विविधानि पुष्पाणि। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र ‘अमृत-उद्यान’ और उसकी विशेषताओं से परिचित होंगे।
- छात्र ‘उद्यानम्’, ‘निसर्गः’, ‘पुष्पाणि’, ‘पर्णानि’, ‘खगाः’, ‘जन्तवः’ का अर्थ बता सकेंगे।
- छात्र पाठ के आरंभिक भाग को सही उच्चारण के साथ पढ़ सकेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘उद्यानम्’ का अर्थ क्या है?” (बगीचा)
- “‘निसर्गः’ का अर्थ क्या है?” (प्रकृति)
- “अमृत-उद्यानम् कुत्र अस्ति?” (राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे)
बोर्ड पर लिखवाएँ:
- “उद्यानम्” — लिखवाएँ।
- “निसर्गः रमणीयः अस्ति।” — लिखवाएँ।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- अमृत-उद्यानम् ______ (राष्ट्रपतिभवनस्य / राजभवनस्य) परिसरे अस्ति। — उत्तर: राष्ट्रपतिभवनस्य
- पाटलपुष्पाणि ______ (गुलाब / कमल) सन्ति। — उत्तर: गुलाब
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने उद्यान और प्रकृति के शब्दों को समझा?
- क्या ‘निसर्गः’ जैसे नए शब्द का अर्थ स्पष्ट हो पाया?
- क्या वे ‘अमृत-उद्यान’ की विशेषताओं को बता पा रहे हैं?
- अगली अवधि के लिए योजना: रंगों (वर्णों) के नाम — हरितः, रक्तः, नीलः, पीतः, श्वेतः, पाटलः, नीललोहितः, केसरः — सिखाना है।
⏳ कालखंड 2 (द्वितीय अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- 8 प्रमुख रंगों के संस्कृत नाम — हरितः, रक्तः, नीलः, पीतः, श्वेतः, पाटलः, नीललोहितः, केसरः — को पढ़, लिख और बोल सकेंगे।
- रंगों को लिंग (पुल्लिङ्ग/स्त्रीलिङ्ग/नपुंसकलिङ्ग) के साथ प्रयोग कर सकेंगे — हरितः, हरिता, हरितम्।
- विभिन्न वस्तुओं (पुष्प, पर्ण, पक्षी आदि) के रंगों को संस्कृत में पहचान सकेंगे।
- पाठ के संवाद में प्रयुक्त रंग-नामों को पहचानेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 96-98)
- रंग-चार्ट (8 रंगों के साथ — सचित्र)
- रंगीन कागज़/कार्ड्स (विभिन्न रंगों के)
- फ्लैश कार्ड्स (रंगों के संस्कृत नाम)
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पिछली अवधि में उद्यान और प्राकृतिक तत्वों (पुष्प, पर्ण, खग) के बारे में पढ़ा है।
- उन्हें हिंदी/अंग्रेज़ी में रंगों (लाल, नीला, पीला, हरा, सफेद) का ज्ञान है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का पुनःस्मरण:
“‘उद्यानम्’ का अर्थ क्या है?” (बगीचा)
“‘निसर्गः’ का अर्थ क्या है?” (प्रकृति)
“प्रकृति में कौन-कौन से रंग होते हैं?” (हरा, लाल, पीला, नीला, सफेद…) - अब प्रश्न करें:
“क्या आप जानते हैं कि ‘हरा’ को संस्कृत में क्या कहते हैं? — हरितः।”
“‘लाल’ को? — रक्तः।”
“आज हम 8 रंगों के संस्कृत नाम सीखेंगे।” - उद्देश्य: रंगों के संस्कृत नामों के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – 8 रंगों के नाम (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) रंग-तालिका (बोर्ड पर — सचित्र):
| क्र.सं. | संस्कृत (पुल्लिङ्ग) | हिंदी (रंग) | संस्कृत वाक्य (उदाहरण) |
| 1 | हरितः | हरा (Green) | पर्णानि हरितानि सन्ति। |
| 2 | रक्तः | लाल (Red) | जपापुष्पं रक्तम् अस्ति। |
| 3 | नीलः | नीला (Blue) | आकाशः नीलः अस्ति। |
| 4 | पीतः | पीला (Yellow) | केसरः पीतः अस्ति। |
| 5 | श्वेतः | सफेद (White) | हंसः श्वेतः अस्ति। |
| 6 | पाटलः | गुलाबी (Pink) | पाटलपुष्पं पाटलम् अस्ति। |
| 7 | नीललोहितः | जामुनी (Purple) | पुष्पं नीललोहितम् अस्ति। |
| 8 | केसरः | केसरिया (Saffron) | ध्वजे केसरवर्णः अस्ति। |
लिंग-भेद के साथ रूप:
| पुल्लिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग | अर्थ |
| हरितः | हरिता | हरितम् | हरा |
| रक्तः | रक्ता | रक्तम् | लाल |
| नीलः | नीला | नीलम् | नीला |
| पीतः | पीता | पीतम् | पीला |
| श्वेतः | श्वेता | श्वेतम् | सफेद |
| पाटलः | पाटला | पाटलम् | गुलाबी |
| नीललोहितः | नीललोहिता | नीललोहितम् | जामुनी |
| केसरः | केसरा | केसरम् | केसरिया |
(ख) पाठ्यपुस्तक से उदाहरण (पृष्ठ 96):
- हरितानि पर्णानि (हरी पत्तियाँ)
- शुकः हरितवर्णेन शोभते (तोता हरे रंग से शोभा पाता है)
- काकः कृष्णः (कौआ काला है — यहाँ कृष्णः का अर्थ ‘काला’ भी है)
- पिकः कृष्णः (कोयल काली है)
- जपापुष्पं रक्तवर्णम् (जपा/गुड़हल का फूल लाल है)
- शुकस्य चञ्चुः रक्तवर्णा (तोते की चोंच लाल है)
- हंसः श्वेतः (हंस सफेद है)
- बकः श्वेतः (बगुला सफेद है)
चरण 3: श्रवण एवं अनुकरण (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- सभी 8 रंगों के नामों को सही उच्चारण के साथ 2-3 बार पढ़ें:
- हरितः, रक्तः, नीलः, पीतः, श्वेतः, पाटलः, नीललोहितः, केसरः।
- छात्र प्रत्येक रंग को 2 बार दोहराएँ।
- विशेष ध्यान दें: ‘नीललोहितः’ (जामुनी) — इसके उच्चारण पर।
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (10 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “‘हरितः’ किस रंग को कहते हैं?” (हरा)
- “‘रक्तः’ किस रंग को कहते हैं?” (लाल)
- “‘श्वेतः’ किस रंग को कहते हैं?” (सफेद)
- “‘पाटलः’ किस रंग को कहते हैं?” (गुलाबी)
- “‘नीललोहितः’ किस रंग को कहते हैं?” (जामुनी)
- “हंसः कः?” (श्वेतः — हंस सफेद है)
गतिविधि: कक्षा में किसी वस्तु (जैसे — किसी छात्र की ड्रेस) का रंग संस्कृत में बताने को कहें:
- “अस्य पुस्तकस्य वर्णः ______ अस्ति।” (नीलः/हरितः/रक्तः)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| हरितः | हरा | पर्णानि हरितानि सन्ति। |
| रक्तः | लाल | जपापुष्पं रक्तम् अस्ति। |
| नीलः | नीला | आकाशः नीलः अस्ति। |
| पीतः | पीला | केसरः पीतः अस्ति। |
| श्वेतः | सफेद | हंसः श्वेतः अस्ति। |
| पाटलः | गुलाबी | पुष्पं पाटलम् अस्ति। |
| नीललोहितः | जामुनी | पुष्पं नीललोहितम् अस्ति। |
| केसरः | केसरिया | ध्वजे केसरवर्णः अस्ति। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र 8 रंगों के नाम संस्कृत में बोल सकेंगे।
- छात्र रंगों को लिंगानुसार (हरितः, हरिता, हरितम्) प्रयोग कर सकेंगे।
- छात्र विभिन्न वस्तुओं (पुष्प, पर्ण, पक्षी) के रंगों को संस्कृत में बता सकेंगे।
- छात्र पाठ्यपुस्तक के रंग-उदाहरणों को समझेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘रक्तः’ किस रंग को कहते हैं?” (लाल)
- “‘हरितम्’ किस रंग को कहते हैं?” (हरा — नपुंसकलिङ्ग)
- “‘पाटलम्’ किस रंग को कहते हैं?” (गुलाबी)
लिखित कार्य:
- 8 रंगों के नाम संस्कृत में लिखें।
- “हंसः ______ अस्ति।” (श्वेतः / रक्तः) — रिक्त स्थान भरें।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- जपापुष्पं ______ (रक्तम् / नीलम्) अस्ति। — उत्तर: रक्तम्
- पर्णानि ______ (हरितानि / पीतानि) सन्ति। — उत्तर: हरितानि
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने 8 रंगों के नाम स्मरण कर लिए?
- क्या वे ‘नीललोहितः’ (जामुनी) का उच्चारण सही कर पा रहे हैं?
- क्या लिंगानुसार रंगों का प्रयोग समझ आया?
- अगली अवधि के लिए योजना: पूर्ण संवाद (शिक्षक-छात्रों के बीच) का पठन, ‘किम्’ प्रश्नों का अभ्यास सिखाना है।
⏳ कालखंड 3 (तृतीय अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- पृष्ठ 96-97 के संवाद को सही उच्चारण के साथ पढ़ेंगे और उसका अर्थ समझेंगे।
- ‘किम्’ (क्या?) प्रश्नों का प्रयोग सीखेंगे — विशेष रूप से नपुंसकलिङ्ग वस्तुओं के लिए।
- संवाद में आए प्रश्न-उत्तर (जैसे — “अत्र किं किं पश्यामः?”, “कस्य वर्णः कः?” आदि) का अभ्यास करेंगे।
- पाठ के माध्यम से प्राकृतिक वस्तुओं (पुष्प, पर्ण, पक्षी) के रंगों को पहचानेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 96-97)
- संवाद-चार्ट (बड़े अक्षरों में)
- प्रश्न-उत्तर के फ्लैश कार्ड्स (‘किम्’, ‘कः’, ‘का’)
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पिछली अवधि में 8 रंगों के नाम सीख लिए हैं।
- उन्होंने पाठ 2 में ‘कः?’, ‘का?’, ‘किम्?’ का परिचय प्राप्त किया है।
- उन्हें ‘पुष्पम्’, ‘पर्णम्’, ‘पक्षी’ आदि शब्दों का ज्ञान है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का पुनःस्मरण:
“‘हरितः’ किस रंग को कहते हैं? ‘रक्तः’? ‘श्वेतः’?” - अब प्रश्न करें:
“संस्कृत में ‘क्या?’ पूछने के लिए कौन-सा शब्द आता है? — ‘किम्’।”
“आज हम शिक्षक और छात्रों के बीच हुए संवाद को पढ़ेंगे, जिसमें रंगों के बारे में बहुत सारे प्रश्न-उत्तर हैं।” - उद्देश्य: संवाद पठन और ‘किम्’ प्रश्नों के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
चरण 2: संवाद-पठन एवं व्याख्या (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) संवाद का सस्वर पाठ (पृष्ठ 96-97) — शिक्षक स्वयं पढ़ें, फिर छात्रों से दोहरवाएँ:
शिक्षकः — “वयम् अत्र किं किं पश्यामः?”
श्रद्धा — “सर्वत्र विविधानि पुष्पाणि, हरितानि पर्णानि, खगाः जन्तवः च सन्ति इति पश्यामः।”
शिक्षकः — “सत्यम्। एवमेव तेषां वर्णाः अपि विविधाः। यथा श्रद्धा वदति ‘हरितानि पर्णानि’ इति, अत्र पर्णस्य कः वर्णः?”
छात्राः — “हरितः।”
श्रद्धा — “अत्र वृक्षस्य उपरि शुकः अस्ति। सः अपि हरितवर्णेन शोभते।”
शिक्षकः — “श्रद्धे! तव इष्टवर्णः हरितः इति चिन्तयामि। अत एव हरितवर्णम् एव पश्यसि खलु।”
मेधा — “आचार्य! अत्र काकः अपि अस्ति, यस्य वर्णः कृष्णः। एवं पिकस्य अपि वर्णः कृष्णः।”
शिक्षकः — “आम्। उत्तमं निरीक्षणम्। छात्राः! पश्यन्तु, अत्र पुष्पाणि अपि सन्ति। मनीष! पश्यतु जपापुष्पम्। वदतु, अस्य वर्णः कः?”
मनीषः — “रक्तवर्णः आचार्य! शुकस्य चञ्चुः अपि रक्तवर्णा। पाटलपुष्पम् अपि रक्तवर्णेन युक्तम्।”
शिक्षकः — “शोभनम्। चित्रवर्णाः शुकाः अपि अत्र सन्ति इति जानन्ति किम्?”
आदित्यः — “आचार्य! ते कीदृशाः भवन्ति? वयं द्रष्टुम् इच्छामः।”
(ख) प्रमुख प्रश्न-प्रकार (बोर्ड पर):
| प्रश्न (संस्कृत) | हिंदी अर्थ | उत्तर-प्रकार |
| किं किं पश्यामः? | क्या-क्या देखते हैं? | (वस्तुओं के नाम) |
| पर्णस्य कः वर्णः? | पत्ते का रंग क्या है? | हरितः (पुल्लिङ्ग) |
| अस्य वर्णः कः? | इसका रंग क्या है? | रक्तवर्णः (पुल्लिङ्ग) |
| जानन्ति किम्? | क्या जानते हैं? | (हाँ/नहीं में उत्तर) |
| ते कीदृशाः भवन्ति? | वे कैसे होते हैं? | (गुण-वर्णन) |
| चित्रवर्णाः शुकाः…? | क्या रंग-बिरंगे तोते…? | (हाँ/नहीं) |
चरण 3: ‘किम्’ प्रश्नों का अभ्यास (8 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- छात्रों को ‘किम्’ (क्या?) का अभ्यास करने को कहें:
| प्रश्न (संस्कृत) | उत्तर (संस्कृत) |
| एतत् किम्? | एतत् पुष्पम्। |
| एतत् किम्? | एतत् पर्णम्। |
| तत् किम्? | तत् फलम्। |
| भवान् किं पश्यति? | अहं शुकं पश्यामि। |
विशेष ध्यान दें: ‘किम्’ नपुंसकलिङ्ग (नपुंसक) वस्तुओं के लिए आता है — पुष्पम्, पर्णम्, फलम्, पुस्तकम् आदि।
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (7 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “श्रद्धा सर्वत्र किं पश्यति?” (पुष्पाणि, पर्णानि, खगाः, जन्तवः)
- “शुकस्य वर्णः कः?” (हरितः)
- “काकस्य वर्णः कः?” (कृष्णः)
- “जपापुष्पस्य वर्णः कः?” (रक्तः)
- “‘किम्’ का प्रयोग कब करते हैं?” (नपुंसकलिङ्ग वस्तुओं के लिए)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| किम् | क्या? (What — Neuter) | एतत् किम्? — एतत् पुष्पम्। |
| कीदृशाः | कैसे (What kind of) | ते कीदृशाः भवन्ति? |
| इष्टवर्णः | पसंदीदा रंग | हरितः मम इष्टवर्णः। |
| निरीक्षणम् | अवलोकन (Observation) | तव निरीक्षणम् उत्तमम्। |
| चञ्चुः | चोंच (Beak) | शुकस्य चञ्चुः रक्तवर्णा। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र संवाद को सही उच्चारण के साथ पढ़ सकेंगे।
- छात्र ‘किम्’ प्रश्नों (क्या?) को समझेंगे और उनका उत्तर दे सकेंगे।
- छात्र संवाद में आए प्रश्नों के उत्तर बता सकेंगे।
- छात्र प्राकृतिक वस्तुओं के रंगों को संस्कृत में पहचानेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘पर्णस्य कः वर्णः?’ — इसका उत्तर क्या है?” (हरितः)
- “‘चित्रवर्णाः शुकाः सन्ति किम्?’ — इसका उत्तर क्या है?” (आम् — हाँ)
लिखित कार्य:
- संवाद से 3 प्रश्न चुनकर उनके उत्तर लिखें।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- शुकः ______ (हरितवर्णेन / रक्तवर्णेन) शोभते। — उत्तर: हरितवर्णेन
- जपापुष्पम् ______ (रक्तम् / नीलम्) अस्ति। — उत्तर: रक्तम्
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने संवाद को सही उच्चारण के साथ पढ़ा?
- क्या ‘किम्’ (क्या?) का प्रयोग समझ आया?
- क्या वे संवाद से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दे पा रहे हैं?
- अगली अवधि के लिए योजना: अतिरिक्त रंग-शब्दावली (पर्यायवाची), राष्ट्रध्वज के रंग, ‘किम्’ का विस्तृत अभ्यास सिखाना है।
⏳ कालखंड 4 (चौथी अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- रंगों के पर्यायवाची शब्दों (शुक्लः, शुभ्रः, सितः, कृष्णः, नीलः, असितः, पीतः, गौरः, हरिद्राभः, अरुणः, पाटलः, कपिलः, पिङ्गः, चित्रम् आदि) — पृष्ठ 102 — से परिचित होंगे।
- राष्ट्रध्वज (तिरंगा) के तीन रंगों — केसरः, श्वेतः, हरितः — को पहचानेंगे और उनके अर्थ समझेंगे।
- ‘किम्’ प्रश्नों का विस्तृत अभ्यास (विभिन्न वस्तुओं के लिए) करेंगे।
- पृष्ठ 99-100 के अभ्यास (चित्र-रंग-मिलान, राष्ट्रध्वज-रंग-भरण) करेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 99-102)
- रंग-पर्यायवाची चार्ट
- राष्ट्रध्वज का रंगीन चित्र
- विभिन्न वस्तुओं के चित्र (आकाश, घास, केसर, फूल)
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने 8 रंगों के नाम (पिछली अवधि) सीख लिए हैं।
- उन्होंने राष्ट्रध्वज (तिरंगा) को देखा है।
- उन्हें ‘किम्’ प्रश्नों का आरंभिक ज्ञान है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का पुनःस्मरण:
“हरितः, रक्तः, नीलः, पीतः, श्वेतः, पाटलः, नीललोहितः, केसरः — ये किसके नाम हैं?” (रंगों के) - अब प्रश्न करें:
“क्या आप जानते हैं कि ‘श्वेत’ के लिए संस्कृत में और भी कई शब्द हैं — जैसे ‘सितः’, ‘गौरः’, ‘धवलः’?”
“आज हम रंगों के पर्यायवाची शब्द सीखेंगे और राष्ट्रध्वज के रंगों के बारे में भी जानेंगे।” - उद्देश्य: रंग-पर्यायवाची और राष्ट्रध्वज के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
चरण 2: रंग-पर्यायवाची (पृष्ठ 102) – 10 मिनट
शिक्षक क्रिया:
(क) रंग-पर्यायवाची तालिका (बोर्ड पर):
| रंग (हिंदी) | संस्कृत पर्यायवाची |
| सफेद | शुक्लः, शुभ्रः, शुचिः, श्वेतः, विशदः, सितः, गौरः, धवलः, अर्जुनः |
| काला | कृष्णः, नीलः, असितः, श्यामः, कालः, श्यामलः, मेचकः |
| पीला | पीतः, गौरः, हरिद्राभः, पलाशः, हरितः (पीत-अर्थ में), हरित् |
| लाल | लोहितः, रोहितः, रक्तः, शोणः, कोकनदच्छविः |
| गुलाबी | अव्यक्तरागः, अरुणः (लालिमायुक्त), श्वेतरक्तः, पाटलः |
| बैंगनी/जामुनी | श्यावः, कपिशः, धूम्रः, कृष्णलोहितः |
| भूरा/सांवला | कडारः, कपिलः, पिङ्गः, पिशङ्गः |
| चित्र-विचित्र | चित्रम्, किर्मीरः, कल्माषः, शबलः |
(ख) श्लोक का पठन (पृष्ठ 102):
“शुक्लशुभ्रशुचिश्वेतविशदश्येतपाण्डराः।
अवदातःसितोगौरोवलक्षोधवलोऽर्जुनः॥”
अर्थ: सफेद रंग के 13 पर्यायवाची हैं — शुक्लः, शुभ्रः, शुचिः, श्वेतः, विशदः, श्येतः, पाण्डरः, अवदातः, सितः, गौरः, वलक्षः, धवलः, अर्जुनः।
चरण 3: राष्ट्रध्वज के रंग (पृष्ठ 100 – अभ्यास 4) – 8 मिनट
शिक्षक क्रिया:
(क) राष्ट्रध्वज के तीन रंग (बोर्ड पर — सचित्र):
| स्थान | रंग (संस्कृत) | हिंदी |
| ऊपर (उपरि) | केसरः | केसरिया |
| मध्य (मध्ये) | श्वेतः | सफेद |
| नीचे (अधः) | हरितः | हरा |
| केंद्र (केन्द्रे) | नीलचक्रम् | नीला चक्र |
(ख) अभ्यास 4 (पृष्ठ 100):
- (क) उपरि केसरः वर्णः अस्ति।
- (ख) मध्ये श्वेतः वर्णः अस्ति।
- (ग) अधः हरितः वर्णः अस्ति।
- (घ) ध्वजस्य केन्द्रे नीलचक्रम् अस्ति।
(ग) अभ्यास 5 (पृष्ठ 100):
- केशानां वर्णः कः? → कृष्णः / श्यामः
- आकाशस्य वर्णः कः? → नीलः
- कदलीफलस्य वर्णः कः? → पीतः
- तृणस्य वर्णः कः? → हरितः
- महिषस्य वर्णः कः? → कृष्णः
- मयूरस्य वर्णः कः? → बहुवर्णः / चित्रवर्णः
चरण 4: ‘किम्’ का विस्तृत अभ्यास (7 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- बोर्ड पर कुछ वस्तुएँ (चित्र/शब्द) लिखें और छात्रों से ‘किम्’ प्रश्न पूछने/उत्तर देने को कहें:
| वस्तु | प्रश्न | उत्तर |
| पुस्तकम् | एतत् किम्? | एतत् पुस्तकम्। |
| फलम् | तत् किम्? | तत् फलम्। |
| जलम् | किम् एतत्? | एतत् जलम्। |
| पुष्पम् | किम् इदम्? | इदम् पुष्पम्। |
नियम: ‘किम्’ का प्रयोग नपुंसकलिङ्ग (Neuter) वस्तुओं के लिए होता है — पुस्तकम्, फलम्, जलम्, पुष्पम्, पर्णम्, आकाशम्, उद्यानम्, चक्रम् आदि।
चरण 5: निष्कर्ष एवं चर्चा (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “श्वेतस्य पर्यायवाची शब्द कौन-से हैं?” (शुक्लः, सितः, गौरः, धवलः…)
- “राष्ट्रध्वजे उपरि कः वर्णः अस्ति?” (केसरः)
- “राष्ट्रध्वजे अधः कः वर्णः अस्ति?” (हरितः)
- “आकाशस्य वर्णः कः?” (नीलः)
- “‘किम्’ का प्रयोग कब करते हैं?” (नपुंसकलिङ्ग वस्तुओं के लिए)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| पर्यायवाची | पर्यायवाची (Synonyms) | श्वेतस्य पर्यायवाची शुक्लः। |
| केसरः | केसरिया | ध्वजे केसरवर्णः अस्ति। |
| धवलः | सफेद | हंसः धवलः अस्ति। |
| असितः | काला | काकः असितः अस्ति। |
| श्यामः | काला/सांवला | केशाः श्यामाः सन्ति। |
| तृणम् | घास (Grass) | तृणं हरितम् अस्ति। |
| नीलचक्रम् | नीला चक्र (Ashoka Chakra) | ध्वजे नीलचक्रम् अस्ति। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र रंगों के 5-6 पर्यायवाची शब्दों को जानेंगे।
- छात्र राष्ट्रध्वज के तीन रंगों (केसरः, श्वेतः, हरितः) को पहचानेंगे।
- छात्र ‘किम्’ प्रश्नों का सही प्रयोग कर सकेंगे।
- छात्र विभिन्न वस्तुओं (आकाश, घास, केश, फल) के रंग बता सकेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “राष्ट्रध्वजे मध्ये कः वर्णः अस्ति?” (श्वेतः)
- “‘धवलः’ किस रंग का पर्याय है?” (सफेद)
- “‘तृणस्य वर्णः कः?’ — उत्तर दें।” (हरितः)
लिखित कार्य:
- राष्ट्रध्वज के तीन रंगों के नाम संस्कृत में लिखें।
- ‘श्वेतस्य’ 3 पर्यायवाची शब्द लिखें।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- ध्वजस्य उपरि ______ (केसरः / हरितः) वर्णः अस्ति। — उत्तर: केसरः
- आकाशस्य वर्णः ______ (नीलः / पीतः) अस्ति। — उत्तर: नीलः
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने रंग-पर्यायवाची शब्दों में रुचि दिखाई?
- क्या राष्ट्रध्वज के रंगों को समझ पाए?
- क्या ‘किम्’ का प्रयोग स्पष्ट हो पाया?
- अगली अवधि के लिए योजना: शेष अभ्यास, ‘सायङ्काले…’ कविता, चित्र-पहचान, परियोजना-कार्य कराना है।
⏳ कालखंड 5 (पाँचवीं अवधि – 35-40 मिनट
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 99-103) के सभी अभ्यास (एकपद/पूर्णवाक्य में उत्तर, रंग-शब्द-मिलान, चित्र-रंग-पहचान) को पूरा करेंगे।
- ‘सायङ्काले त्वम्बरकोणे’ (पृष्ठ 101) कविता का पाठ करेंगे और उसका भावार्थ समझेंगे।
- पृष्ठ 103 के चित्र-रंग-पहचान अभ्यास को करेंगे।
- परियोजना-कार्य — प्रकृति/रंग-चार्ट बनाना, कक्षा की वस्तुओं के रंग लिखना — करेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 99-103)
- अभ्यास-पत्रिका (Worksheets)
- ‘सायङ्काले…’ कविता का चार्ट
- A3 शीट/चार्ट पेपर (परियोजना-कार्य हेतु)
- रंगीन पेन/मार्कर/क्रेयॉन
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पिछली चार अवधियों में उद्यान-परिचय, रंगों के नाम, संवाद, पर्यायवाची, राष्ट्रध्वज पढ़-लिख लिए हैं।
- उन्होंने अधिकांश शब्दावली और रंग-नाम स्मरण कर लिए हैं।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधियों का संक्षिप्त पुनःस्मरण:
“8 रंगों के नाम बताएँ।”
“राष्ट्रध्वज के तीन रंग कौन-से हैं?”
“‘किम्’ का प्रयोग कब करते हैं?” - अब घोषित करें:
“आज हम पाठ के सभी अभ्यास पूरे करेंगे, एक सुंदर कविता पढ़ेंगे, और परियोजना-कार्य करेंगे।”
चरण 2: अभ्यास (पाठ्यपुस्तक – पृष्ठ 99-100) – 12 मिनट
शिक्षक क्रिया:
छात्रों को निम्नलिखित अभ्यास करने को कहें:
- पृष्ठ 99 — अभ्यास 1: पाठ के आधार पर एकपद में उत्तर लिखें:
- (क) श्रद्धा सर्वत्र किं पश्यति? → पुष्पाणि, पर्णानि, खगाः, जन्तवः (एकपद में — प्राकृतिक वस्तुएँ)
- (ख) शुकः केन वर्णेन शोभते? → हरितवर्णेन
- (ग) श्रद्धायाः इष्टवर्णः कः? → हरितः
- (घ) कः महान् चित्रकारः? → परमेश्वरः
- (ङ) आदित्यः कान् द्रष्टुम् इच्छति? → चित्रवर्णान् शुकान्
- पृष्ठ 99 — अभ्यास 2: पूर्णवाक्य में उत्तर लिखें:
- (क) आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः कः? → श्वेतः। (पूर्ण वाक्य: आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः श्वेतः।)
- (ख) कुत्र विविधवर्णेषु पाटलपुष्पाणि सन्ति? → श्रद्धायाः उद्याने।
- (ग) किं बहुवर्णमयं इति मञ्जुलायाः अभिप्रायः? → इन्द्रधनुः।
- (घ) चित्रवर्णाः शुकाः कीदृशाः भवन्ति? → तेषां पक्षाः नीलाः, पीताः, रक्ताः च भवन्ति।
- (ङ) कस्य कस्य वर्णः कृष्णः? → काकस्य, पिकस्य च।
- पृष्ठ 99 — अभ्यास 3: उचित वर्ण के साथ शब्द का मिलान करें (चित्र देखकर)।
- पृष्ठ 100 — अभ्यास 4: राष्ट्रध्वज के रंग भरें (केसरः, श्वेतः, हरितः, नीलचक्रम्)।
- पृष्ठ 100 — अभ्यास 5: एकपद में उत्तर (केश, आकाश, कदलीफल, तृण, महिष, मयूर)।
- शिक्षक घूम-घूमकर सहायता करेंगे और वर्तनी (Spelling) सुधारेंगे।
चरण 3: ‘सायङ्काले त्वम्बरकोणे’ कविता (पृष्ठ 101) – 5 मिनट
शिक्षक क्रिया:
(क) कविता का सस्वर पाठ:
सायङ्काले त्वम्बरकोणे
नित्यं वयं प्रकृत्यां वर्णान् पश्यामः।
एतत् पद्यं ‘सर्वेषां वर्णानां रचयिता भगवान् परमेश्वरः एव’ इति भावं प्रकटयति।
(ख) भावार्थ:
- “संध्या के समय आकाश के कोने में (सूर्यास्त के समय) हम प्रकृति में हर दिन रंग देखते हैं। यह कविता इस भाव को प्रकट करती है कि सभी रंगों का रचयिता भगवान परमेश्वर ही है।”
(ग) स्मरण: छात्रों को कविता को 3 बार दोहराने को कहें।
चरण 4: पृष्ठ 103 – चित्र-पहचान गतिविधि (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पृष्ठ 103 के चित्रों को दिखाएँ और छात्रों से चित्रों के नाम और रंग पूछें:
- (ये चित्र संभवतः — हंस, मोर, तोता, गुलाब, आकाश, पेड़, सूरज आदि हैं — पाठ्यपुस्तक के अनुसार)
- “अस्य चित्रस्य नाम किम्?” (इस चित्र का नाम क्या है?)
- “अस्य वर्णः कः?” (इसका रंग क्या है?)
- छात्रों को उत्तर लिखने को कहें:
- “हंसः श्वेतः अस्ति।”
- “मयूरः बहुवर्णः अस्ति।”
- “शुकः हरितः अस्ति।”
चरण 5: परियोजना-कार्य एवं सारांश (8 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) परियोजना-कार्य (पृष्ठ 103 के आधार पर):
- कार्य 1: पृष्ठ 103 के चित्रों के नाम और उनके रंग संस्कृत में लिखें (कॉपी में)।
- कार्य 2: कक्षा में विद्यमान 10 वस्तुओं (जैसे — पुस्तकम्, फलम्, कुर्सी, घड़ी आदि) के नाम और उनके रंग संस्कृत में लिखें:
- “मम पुस्तकस्य वर्णः नीलः अस्ति।”
- “अस्य फलस्य वर्णः पीतः अस्ति।”
- कार्य 3: (वैकल्पिक) विभिन्न रंगों के पर्यायवाची शब्दों की सूची (पृष्ठ 102 से) स्मरण करें और चार्ट पर लिखें।
निर्देश: यह कार्य घर पर पूरा करना है और अगली कक्षा में प्रस्तुत करना है।
(ख) पूरे पाठ का सारांश:
“इस पाठ में हमने अमृत-उद्यान और प्रकृति के सौंदर्य के बारे में पढ़ा। हमने 8 रंगों के नाम — हरितः, रक्तः, नीलः, पीतः, श्वेतः, पाटलः, नीललोहितः, केसरः — सीखे। हमने रंगों के पर्यायवाची शब्द, राष्ट्रध्वज के रंग, ‘किम्’ (क्या?) प्रश्नों का अभ्यास किया और ‘सायङ्काले…’ कविता पढ़ी।”
मूल्यांकन प्रश्न:
- “‘हरितः’ किस रंग को कहते हैं?” (हरा)
- “राष्ट्रध्वजे मध्ये कः वर्णः अस्ति?” (श्वेतः)
- “‘किम्’ का प्रयोग किस लिंग के लिए होता है?” (नपुंसकलिङ्ग)
- “सर्वेषां वर्णानां रचयिता कः?” (परमेश्वरः)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| सायङ्काले | संध्या के समय | सायङ्काले आकाशे रङ्गाः दृश्यन्ते। |
| अम्बरकोणे | आकाश के कोने में | सूर्यः अम्बरकोणे अस्ति। |
| प्रकृतिः | प्रकृति | प्रकृतिः रमणीया अस्ति। |
| रचयिता | रचयिता (Creator) | परमेश्वरः रचयिता। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र पाठ के सभी अभ्यासों को पूरा कर चुके होंगे।
- छात्र ‘सायङ्काले…’ कविता को पढ़ सकेंगे और उसका भावार्थ समझेंगे।
- छात्र चित्र-रंग-पहचान कर सकेंगे।
- छात्र कक्षा की वस्तुओं के रंग संस्कृत में बता सकेंगे।
- छात्र परियोजना-कार्य (रंग-चार्ट/वस्तु-सूची) पूरा करेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘सायङ्काले’ का अर्थ क्या है?” (संध्या के समय)
- “परमेश्वरः कस्य रचयिता?” (सर्वेषां वर्णानाम्)
लिखित कार्य:
- कक्षा की 5 वस्तुओं के नाम और उनके रंग संस्कृत में लिखें।
- “हरितः” के 2 पर्यायवाची लिखें (यदि याद हों — हरित्, पालाशः)।
- रिक्त स्थान पूर्ति:
सायङ्काले वयं प्रकृत्यां ______ पश्यामः। (वर्णान् / पुष्पाणि) — उत्तर: वर्णान्
परमेश्वरः सर्वेषां ______ रचयिता। (वर्णानाम् / उद्यानानाम्) — उत्तर: वर्णानाम्
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
क्या छात्रों ने सभी अभ्यासों को स्वतंत्र रूप से हल कर लिया?
क्या कविता और चित्र-गतिविधि में रुचि दिखाई?
क्या वे कक्षा की वस्तुओं के रंग संस्कृत में बता पा रहे हैं?
परियोजना-कार्य (रंग-चार्ट/वस्तु-सूची) के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
अगले पाठ हेतु तैयारी: पाठ 7 — “गोमाता” (गाय का महत्व, पंचगव्य, गोगीत, पर्यावरण-संरक्षण) का आरंभ करना है।


