⏳ कालखंड 1 (प्रथम अवधि – 35-40 मिनट)
क्लिक करें
दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
इस कालखंड के अंत तक छात्र—
- उत्तम पुरुष (First Person) — अहम्, आवाम्, वयम् — को पहचान सकेंगे।
- ‘अस्’ धातु (होना) के उत्तम पुरुष के रूप — अस्मि, स्वः, स्मः — का अर्थ और प्रयोग समझ सकेंगे।
- अपना परिचय (नाम, व्यवसाय) संस्कृत में दे सकेंगे — “अहं छात्रः अस्मि।”
- दो लोगों के लिए (आवाम्) और बहुतों के लिए (वयम्) वाक्य बना सकेंगे।
2. शिक्षण-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 45-48)
- ‘अस्’ धातु का चार्ट (उत्तम पुरुष)
- व्यवसायों के चित्र-कार्ड्स (छात्रः, शिक्षकः, चिकित्सकः, कृषकः, सैनिकः, गायकः, चित्रकारः, आरक्षकः)
- फ्लैश कार्ड्स (अहम्, आवाम्, वयम्, अस्मि, स्वः, स्मः)
- बोर्ड/स्मार्टबोर्ड
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पाठ 2 में लिंग, वचन, सर्वनाम (सः, सा, तत्) और क्रियापद (पठति आदि) सीखे हैं।
- उन्हें ‘मैं’, ‘हम’ (हिंदी) का सामान्य ज्ञान है।
- उन्होंने पिछली कक्षाओं में व्यवसायों के नाम (जैसे — शिक्षक, डॉक्टर) सुने हैं।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure) – चरणबद्ध
चरण 1: प्रस्तावना (प्रेरक प्रश्न) – (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
कक्षा में प्रवेश करते ही विद्यार्थियों से पूछें—
- “आप अपना परिचय हिंदी में कैसे देते हैं? — ‘मैं राम हूँ।'”
- “क्या आप जानते हैं कि संस्कृत में ‘मैं हूँ’ कैसे कहते हैं?”
- “यदि दो लोग मिलकर कहें — ‘हम दोनों हैं’ — तो संस्कृत में क्या कहेंगे?”
छात्र प्रतिक्रिया: छात्र अपने विचार साझा करेंगे।
उद्देश्य: उत्तम पुरुष (अहम्/आवाम्/वयम्) के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – उत्तम पुरुष एवं ‘अस्’ धातु (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) उत्तम पुरुष (प्रथम पुरुष नहीं — उत्तम = स्वयं) — बोर्ड पर तालिका:
| सर्वनाम (संस्कृत) | हिंदी अर्थ | वचन |
| अहम् | मैं | एकवचनम् |
| आवाम् | हम दोनों | द्विवचनम् |
| वयम् | हम सब | बहुवचनम् |
(ख) ‘अस्’ धातु के उत्तम पुरुष रूप (बोर्ड पर):
| पुरुष/वचन | सर्वनाम | ‘अस्’ धातु का रूप | हिंदी अर्थ |
| उत्तम-एकवचन | अहम् | अस्मि | मैं हूँ |
| उत्तम-द्विवचन | आवाम् | स्वः | हम दोनों हैं |
| उत्तम-बहुवचन | वयम् | स्मः | हम सब हैं |
(ग) उदाहरण वाक्य (बोर्ड पर):
- अहं छात्रः अस्मि। (मैं छात्र हूँ।)
- अहं शिक्षकः अस्मि। (मैं शिक्षक हूँ।)
- अहं चिकित्सकः अस्मि। (मैं डॉक्टर हूँ।)
- आवां छात्रौ स्वः। (हम दोनों छात्र हैं।)
- वयं छात्राः स्मः। (हम सब छात्र हैं।)
(घ) व्यवसायों के नाम (बोर्ड पर — चित्रों के साथ):
| पुल्लिङ्ग शब्द | हिंदी अर्थ |
| छात्रः | विद्यार्थी |
| शिक्षकः | शिक्षक |
| चिकित्सकः | डॉक्टर |
| कृषकः | किसान |
| सैनिकः | सैनिक |
| गायकः | गायक |
| चित्रकारः | चित्रकार |
| आरक्षकः | पुलिसकर्मी |
| पत्रकारः | पत्रकार |
| पाचकः | रसोइया |
चरण 3: श्रवण एवं अनुकरण (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- सभी वाक्यों को सही उच्चारण के साथ पढ़ें:
- “अहं छात्रः अस्मि।”
- “आवां छात्रौ स्वः।”
- “वयं छात्राः स्मः।”
- छात्र प्रत्येक वाक्य को 2-3 बार दोहराएँ।
- विशेष ध्यान दें: ‘स्वः’ (हम दोनों हैं) का उच्चारण — यह ‘अस्मि’ और ‘स्मः’ से भिन्न है।
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (10 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
निम्नलिखित प्रश्न पूछें—
- “अहम्” का अर्थ क्या है? (मैं)
- “‘अस्मि’ का हिंदी अर्थ क्या है?” (हूँ)
- “आवाम्” के लिए कौन-सा क्रियापद आता है?” (स्वः)
- “वयम्” के लिए कौन-सा क्रियापद आता है?” (स्मः)
- “‘अहं कृषकः अस्मि।’ — इसका हिंदी अर्थ क्या है?” (मैं किसान हूँ।)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| अहम् | मैं (I) | अहं छात्रः अस्मि। |
| आवाम् | हम दोनों (We two) | आवां मित्रे स्वः। |
| वयम् | हम सब (We all) | वयं भारतीयाः स्मः। |
| अस्मि | हूँ (am) | अहं सुखी अस्मि। |
| स्वः | हैं (दो के लिए — are for two) | आवां बालकौ स्वः। |
| स्मः | हैं (बहुतों के लिए — are) | वयं छात्राः स्मः। |
| उत्तमपुरुषः | उत्तम पुरुष (First Person) | अहम् उत्तमपुरुषः। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र ‘अहम्’, ‘आवाम्’, ‘वयम्’ का अर्थ बता सकेंगे।
- छात्र ‘अस्मि’, ‘स्वः’, ‘स्मः’ का सही प्रयोग कर सकेंगे।
- छात्र अपना परिचय संस्कृत में दे सकेंगे (“अहं ______ अस्मि।”)।
- छात्र दो और बहुतों के लिए वाक्य बना सकेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘अहम्’ के लिए कौन-सा क्रियापद आता है?” (अस्मि)
- “‘आवाम्’ के लिए कौन-सा क्रियापद आता है?” (स्वः)
बोर्ड पर लिखवाएँ:
- “अहं छात्रः अस्मि।” — लिखवाएँ और उच्चारण करवाएँ।
- “वयं सैनिकाः स्मः।” — लिखवाएँ।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- अहं गायकः ______ (अस्मि / स्वः / स्मः) — उत्तर: अस्मि
- आवां शिक्षकौ ______ (अस्मि / स्वः / स्मः) — उत्तर: स्वः
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने ‘अस्मि’, ‘स्वः’, ‘स्मः’ में अंतर समझ लिया?
- क्या ‘स्वः’ (द्विवचन) का प्रयोग स्पष्ट हो पाया? (हिंदी में नहीं है, इसलिए विशेष ध्यान देना होगा।)
- क्या वे अपना परिचय देने में सक्षम हुए?
- अगली अवधि के लिए योजना: मध्यम पुरुष (त्वम्, युवाम्, यूयम्) और ‘असि’, ‘स्थः’, ‘स्थ’ सिखाना है।
⏳ कालखंड 2 (द्वितीय अवधि – 35-40 मिनट)
क्लिक करें
दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- मध्यम पुरुष (Second Person) — त्वम्, युवाम्, यूयम् — को पहचान सकेंगे।
- ‘अस्’ धातु के मध्यम पुरुष के रूप — असि, स्थः, स्थ — का अर्थ और प्रयोग समझ सकेंगे।
- किसी अन्य व्यक्ति से पूछताछ/संवाद कर सकेंगे — “त्वं कः?” (तू कौन है?)
- उत्तम और मध्यम पुरुष के रूपों में अंतर कर सकेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 45, 47)
- ‘अस्’ धातु का पूरा चार्ट (उत्तम + मध्यम)
- फ्लैश कार्ड्स (त्वम्, युवाम्, यूयम्, असि, स्थः, स्थ)
- रोल-प्ले कार्ड्स (संवाद हेतु)
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने उत्तम पुरुष (अहम्, आवाम्, वयम्) के रूप सीख लिए हैं (पिछली अवधि)।
- उन्हें ‘तू’, ‘तुम’ (हिंदी) का सामान्य ज्ञान है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का पुनःस्मरण:
“‘अहम्’ के लिए कौन-सा रूप आता है? (अस्मि)”
“‘आवाम्’ के लिए? (स्वः)”
“‘वयम्’ के लिए? (स्मः)” - अब प्रश्न करें:
“यदि मैं आपसे पूछूँ — ‘तू कौन है?’ — तो संस्कृत में क्या कहूँगा?”
“‘तुम दोनों क्या हो?’ — संस्कृत में क्या कहूँगा?” - उद्देश्य: मध्यम पुरुष के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – मध्यम पुरुष एवं ‘अस्’ धातु (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) मध्यम पुरुष (दूसरा पुरुष — सामने वाला) — बोर्ड पर तालिका:
| सर्वनाम (संस्कृत) | हिंदी अर्थ | वचन |
| त्वम् | तू / आप (एक) | एकवचनम् |
| युवाम् | तुम दोनों | द्विवचनम् |
| यूयम् | तुम सब | बहुवचनम् |
(ख) ‘अस्’ धातु के मध्यम पुरुष रूप (बोर्ड पर):
| पुरुष/वचन | सर्वनाम | ‘अस्’ धातु का रूप | हिंदी अर्थ |
| मध्यम-एकवचन | त्वम् | असि | तू है / आप हैं |
| मध्यम-द्विवचन | युवाम् | स्थः | तुम दोनों हो |
| मध्यम-बहुवचन | यूयम् | स्थ | तुम सब हो |
(ग) उदाहरण वाक्य (बोर्ड पर):
- त्वं छात्रः असि। (तू छात्र है। / आप छात्र हैं।)
- त्वं शिक्षकः असि। (तू शिक्षक है।)
- युवां छात्रौ स्थः। (तुम दोनों छात्र हो।)
- यूयं छात्राः स्थ। (तुम सब छात्र हो।)
(घ) उत्तम और मध्यम की तुलना (बोर्ड पर):
| वचन | उत्तम (मैं/हम) | मध्यम (तू/तुम) | हिंदी अर्थ |
| एकवचन | अहम् अस्मि | त्वम् असि | मैं हूँ / तू है |
| द्विवचन | आवाम् स्वः | युवाम् स्थः | हम दो हैं / तुम दो हो |
| बहुवचन | वयम् स्मः | यूयम् स्थ | हम सब हैं / तुम सब हो |
चरण 3: संवाद अभ्यास (रोल-प्ले) – (8 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- शिक्षक एक छात्र से पूछें:
- “त्वं कः?” (तू कौन है?)
- छात्र उत्तर दे: “अहं छात्रः अस्मि।”
- दो छात्रों से पूछें:
- “युवां कौ?” (तुम दोनों कौन हो?)
- छात्र उत्तर दें: “आवां छात्रौ स्वः।”
- सभी छात्रों से पूछें:
- “यूयं के?” (तुम सब कौन हो?)
- छात्र उत्तर दें: “वयं छात्राः स्मः।”
- छात्र आपस में जोड़ियों में संवाद करें:
- छात्र 1: “त्वं कः?”
- छात्र 2: “अहं सैनिकः अस्मि।”
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (7 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “त्वम्” का अर्थ क्या है? (तू / आप — एक)
- “‘असि’ का हिंदी अर्थ क्या है?” (तू है / आप हैं)
- “युवाम्” के लिए कौन-सा क्रियापद आता है?” (स्थः)
- “‘यूयम्’ के लिए कौन-सा क्रियापद आता है?” (स्थ)
- “अहम् अस्मि” और “त्वम् असि” — इनमें क्या अंतर है? (मैं हूँ / तू है)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| त्वम् | तू / आप (You — singular) | त्वं कृषकः असि। |
| युवाम् | तुम दोनों (You two) | युवां शिक्षकौ स्थः। |
| यूयम् | तुम सब (You all) | यूयं सैनिकाः स्थ। |
| असि | तू है (You are) | त्वं बालकः असि। |
| स्थः | तुम दोनों हो (You two are) | युवां मित्रे स्थः। |
| स्थ | तुम सब हो (You all are) | यूयं छात्राः स्थ। |
| मध्यमपुरुषः | मध्यम पुरुष (Second Person) | त्वम् मध्यमपुरुषः। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र ‘त्वम्’, ‘युवाम्’, ‘यूयम्’ का अर्थ बता सकेंगे।
- छात्र ‘असि’, ‘स्थः’, ‘स्थ’ का सही प्रयोग कर सकेंगे।
- छात्र किसी अन्य से प्रश्न पूछ सकेंगे (“त्वं कः?”) और उत्तर दे सकेंगे।
- छात्र उत्तम और मध्यम पुरुष के रूपों में अंतर कर सकेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘त्वम्’ के लिए कौन-सा क्रियापद आता है?” (असि)
- “‘यूयम्’ के लिए कौन-सा क्रियापद आता है?” (स्थ)
लिखित कार्य:
- “त्वं गायकः असि।” — लिखवाएँ।
- “युवां कृषकौ स्थः।” — लिखवाएँ।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- त्वं पाचकः ______ (असि / स्थः / स्थ) — उत्तर: असि
- यूयं वैद्याः ______ (असि / स्थः / स्थ) — उत्तर: स्थ
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने ‘असि’, ‘स्थः’, ‘स्थ’ का सही उच्चारण सीखा?
- क्या वे संवाद में प्रश्न-उत्तर कर पा रहे हैं?
- क्या उत्तम और मध्यम के रूपों में भ्रम हो रहा है? (यदि हाँ, तो अधिक अभ्यास कराएँ।)
- अगली अवधि के लिए योजना: स्त्रीलिङ्ग रूप (गायिका, छात्रा, चिकित्सिका आदि) और समस्त ‘अस्’ धातु तालिका सिखाना है।
⏳ कालखंड 3 (तृतीय अवधि – 35-40 मिनट)
क्लिक करें
दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- स्त्रीलिङ्ग शब्दों (गायिका, छात्रा, नर्तकी, चिकित्सिका, पाचिका, तन्त्रज्ञा, आरक्षिका) के साथ ‘अस्’ धातु का प्रयोग समझेंगे।
- स्त्रीलिङ्ग में भी उत्तम (अहम्, आवाम्, वयम्) और मध्यम (त्वम्, युवाम्, यूयम्) के रूपों का प्रयोग करेंगे।
- स्त्रीलिङ्ग में वचन-रूप (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) पहचानेंगे।
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 46-48) के स्त्रीलिङ्ग संवादों का अध्ययन करेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 46-48)
- स्त्रीलिङ्ग-शब्द चार्ट (छात्रा, गायिका, नर्तकी, चिकित्सिका, पाचिका, तन्त्रज्ञा, आरक्षिका)
- ‘अस्’ धातु का पूरा चार्ट (उत्तम + मध्यम + प्रथम — सभी लिंगों के लिए)
- चित्र-कार्ड्स (पुरुष/स्त्री व्यवसाय)
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पुल्लिङ्ग में उत्तम और मध्यम पुरुष के रूप सीख लिए हैं (पिछली दो अवधियाँ)।
- उन्हें पाठ 2 से स्त्रीलिङ्ग शब्दों (बालिका, शिक्षिका, लता) का ज्ञान है।
- उन्हें ‘गायिका’, ‘नर्तकी’ जैसे शब्दों का सामान्य ज्ञान है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का पुनःस्मरण:
“त्वं छात्रः असि।” — इसका अर्थ क्या है?
“यूयं शिक्षकाः स्थ।” — इसका अर्थ क्या है? - अब प्रश्न करें:
“यदि कोई लड़की कहे — ‘मैं छात्रा हूँ’ — तो संस्कृत में क्या कहेगी?”
“‘तुम गायिका हो’ — संस्कृत में क्या कहेगा?” - उद्देश्य: स्त्रीलिङ्ग में ‘अस्’ धातु के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – स्त्रीलिङ्ग शब्द एवं ‘अस्’ धातु (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) स्त्रीलिङ्ग व्यवसाय-शब्द (बोर्ड पर — चित्रों के साथ):
| स्त्रीलिङ्ग शब्द | हिंदी अर्थ | पुल्लिङ्ग समकक्ष |
| छात्रा | छात्रा (Female Student) | छात्रः |
| गायिका | गायिका (Singer — Female) | गायकः |
| नर्तकी / नर्तिका | नर्तकी (Dancer — Female) | नर्तकः |
| चिकित्सिका | चिकित्सिका (Female Doctor) | चिकित्सकः |
| पाचिका | रसोइया (Female Cook) | पाचकः |
| तन्त्रज्ञा | वैज्ञानिक/तकनीशियन (Female) | तन्त्रज्ञः |
| आरक्षिका | महिला पुलिस (Female Police) | आरक्षकः |
(ख) स्त्रीलिङ्ग में ‘अस्’ धातु के रूप (बोर्ड पर — वचनानुसार):
| वचन | उत्तम (मैं/हम) | मध्यम (तू/तुम) | हिंदी अर्थ |
| एकवचन | अहं गायिका अस्मि। | त्वं गायिका असि। | मैं गायिका हूँ। / तू गायिका है। |
| द्विवचन | आवां गायिके स्वः। | युवां गायिके स्थः। | हम दो गायिकाएँ हैं। / तुम दो गायिकाएँ हो। |
| बहुवचन | वयं गायिकाः स्मः। | यूयं गायिकाः स्थ। | हम सब गायिकाएँ हैं। / तुम सब गायिकाएँ हो। |
(ग) अधिक उदाहरण (बोर्ड पर):
- अहं छात्रा अस्मि। (मैं छात्रा हूँ।)
- त्वं नर्तकी असि। (तू नर्तकी है।)
- आवां चिकित्सिके स्वः। (हम दोनों चिकित्सिकाएँ हैं।)
- यूयं पाचिकाः स्थ। (तुम सब रसोइयाँ हो।)
- वयं तन्त्रज्ञाः स्मः। (हम सब वैज्ञानिक हैं। — स्त्रीलिङ्ग)
चरण 3: पाठ्यपुस्तक संवाद (पृष्ठ 46-48) – 8 मिनट
शिक्षक क्रिया:
- पृष्ठ 46-48 के चित्रों और संवादों को दिखाएँ:
- स्त्रीलिङ्ग संवाद (पृष्ठ 48):
- “त्वं का?” (तुम कौन हो? — स्त्री के लिए)
- “अहं गायिका अस्मि।” (मैं गायिका हूँ।)
- “युवां के?” (तुम दोनों कौन हो? — स्त्री)
- “आवां गायिके स्वः।” (हम दोनों गायिकाएँ हैं।)
- “यूयं का:” (तुम सब कौन हो? — स्त्री)
- “वयं गायिकाः स्मः।” (हम सब गायिकाएँ हैं।)
- स्त्रीलिङ्ग संवाद (पृष्ठ 48):
- छात्रों से इन संवादों को जोड़ियों में पढ़ने और अभिनय करने को कहें।
चरण 4: निष्कर्ष एवं चर्चा (7 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “‘गायिका’ किस लिंग का शब्द है?” (स्त्रीलिङ्गम्)
- “अहं गायिका अस्मि।” — यह किस वचन का वाक्य है? (एकवचनम्)
- “‘आवां नर्तक्यौ स्वः।’ — यहाँ कितनी नर्तकियाँ हैं?” (2)
- “‘त्वं पाचिका असि।’ — इसका हिंदी अर्थ क्या है?” (तू रसोइया है।)
- पुल्लिङ्ग और स्त्रीलिङ्ग में क्या अंतर है? (शब्द के अंत में ‘ः’/’आ’/’ई’ का अंतर, किन्तु क्रियापद समान रहते हैं।)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| छात्रा | छात्रा (Female Student) | अहं छात्रा अस्मि। |
| गायिका | गायिका (Female Singer) | त्वं गायिका असि। |
| नर्तकी | नर्तकी (Female Dancer) | आवां नर्तक्यौ स्वः। |
| चिकित्सिका | महिला चिकित्सक | वयं चिकित्सिकाः स्मः। |
| पाचिका | महिला रसोइया | सा पाचिका अस्ति। |
| तन्त्रज्ञा | महिला वैज्ञानिक | यूयं तन्त्रज्ञाः स्थ। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र स्त्रीलिङ्ग शब्दों को पहचान सकेंगे।
- छात्र स्त्रीलिङ्ग शब्दों के साथ ‘अस्मि’, ‘असि’, ‘स्वः’, ‘स्थः’, ‘स्मः’, ‘स्थ’ का प्रयोग कर सकेंगे।
- छात्र स्त्रीलिङ्ग में प्रश्न-उत्तर (“त्वं का?”, “यूयं का:?” आदि) कर सकेंगे।
- छात्र पुल्लिङ्ग और स्त्रीलिङ्ग में क्रियापदों की समानता को समझेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘गायिका’ — इसके द्विवचन में क्रियापद क्या होगा?” (स्वः — आवां गायिके स्वः।)
- “‘त्वं का?’ — इसका उत्तर क्या होगा?” (अहं छात्रा अस्मि।)
लिखित कार्य:
- “अहं नर्तकी अस्मि।” — लिखवाएँ।
- “यूयं पाचिकाः स्थ।” — लिखवाएँ।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- अहं चिकित्सिका ______ (अस्मि / असि) — उत्तर: अस्मि
- युवां गायिके ______ (स्थः / स्थ) — उत्तर: स्थः
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने स्त्रीलिङ्ग शब्दों को पहचान लिया?
- क्या उन्हें ‘नर्तकी’ जैसे ईकारान्त शब्दों का द्विवचन (नर्तक्यौ) समझ आया?
- क्या वे स्त्रीलिङ्ग में संवाद कर पा रहे हैं?
- अगली अवधि के लिए योजना: पुरुषों की तालिका (प्रथम, मध्यम, उत्तम), अनुस्वार नियम, और अभ्यास कराना है।
⏳ कालखंड 4 (चौथी अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- तीनों पुरुषों (उत्तम, मध्यम, प्रथम) की तालिका को समझेंगे और स्मरण करेंगे।
- अनुस्वार (अं) का नियम — ‘म्’ का ‘अनुस्वार’ में परिवर्तन — समझेंगे (जैसे — पुस्तकम् अस्ति → पुस्तकं नास्ति)।
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 49-52) के अभ्यासों को हल करेंगे।
- ‘अस्’ धातु के सभी रूपों का अभ्यास करेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 49-52)
- तीनों पुरुषों की तालिका (बोर्ड पर)
- अनुस्वार नियम चार्ट
- अभ्यास-पत्रिका (Worksheets)
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने उत्तम, मध्यम और प्रथम पुरुष (सः, सा, तत्) के रूप सीख लिए हैं।
- उन्होंने पाठ 1 में ‘अनुस्वार’ (अं) का परिचय प्राप्त किया है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधियों का संक्षिप्त पुनःस्मरण:
“उत्तम पुरुष के सर्वनाम कौन-से हैं?” (अहम्, आवाम्, वयम्)
“मध्यम पुरुष के सर्वनाम कौन-से हैं?” (त्वम्, युवाम्, यूयम्)
“प्रथम पुरुष के सर्वनाम कौन-से हैं?” (सः, सा, तत् / तौ, ते / ते, ताः, तानि) - अब प्रश्न करें:
“क्या आपने कभी सोचा है कि ‘पुस्तकम्’ और ‘पुस्तकं’ में क्या अंतर है?”
“‘अस्ति’ और ‘नास्ति’ में क्या अंतर है?” - उद्देश्य: अनुस्वार नियम के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना।
चरण 2: प्रस्तुतीकरण – तीनों पुरुषों की तालिका एवं अनुस्वार नियम (15 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) ‘अस्’ धातु — सभी पुरुष एवं वचन (बोर्ड पर पूरी तालिका):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम (वह/वे) | सः अस्ति | तौ स्तः | ते सन्ति |
| मध्यम (तू/तुम) | त्वम् असि | युवाम् स्थः | यूयम् स्थ |
| उत्तम (मैं/हम) | अहम् अस्मि | आवाम् स्वः | वयम् स्मः |
(ख) अनुस्वार का नियम (बोर्ड पर):
“व्यञ्जनवर्णात् पूर्वं पदान्तस्य ‘म्’कारस्य स्थाने ‘अनुस्वारः’ लेखनीयः।”
(अर्थ: किसी व्यंजन से पहले, पद के अंत में आने वाले ‘म्’ को ‘अं’ (अनुस्वार) लिखा जाता है।)
उदाहरण (बोर्ड पर):
| गलत (अशुद्ध) | सही (शुद्ध) | नियम |
| पुस्तकम् नास्ति | पुस्तकं नास्ति | ‘न’ (व्यंजन) से पहले ‘म्’ → ‘अं’ |
| फलम् पतति | फलं पतति | ‘प’ (व्यंजन) से पहले ‘म्’ → ‘अं’ |
| पुस्तकम् अस्ति | पुस्तकम् अस्ति | ‘अ’ (स्वर) से पहले ‘म्’ → ‘म्’ (कोई परिवर्तन नहीं) |
| रामः गच्छति | रामः गच्छति | ‘ः’ (विसर्ग) — कोई परिवर्तन नहीं |
(ग) सारांश:
- यदि ‘म्’ के बाद व्यंजन (क, ख, ग, घ, च, छ, ज, ट, ठ, त, थ, प, फ, य, र, ल, व, श, ष, स, ह) — तो ‘म्’ → ‘अं’।
- यदि ‘म्’ के बाद स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) — तो ‘म्’ → ‘म्’ (ज्यों का त्यों)।
- यदि ‘म्’ के बाद विसर्ग (ः) — तो कोई परिवर्तन नहीं।
चरण 3: अभ्यास (पाठ्यपुस्तक – पृष्ठ 49-52) – 10 मिनट
शिक्षक क्रिया:
छात्रों को निम्नलिखित अभ्यास करने को कहें:
- पृष्ठ 51 — अभ्यास 2: उदाहरणानुगुणं रिक्त स्थान भरें (त्वम्, युवाम्, यूयम्, अहम्, आवाम्, वयम्)।
- (क) ______ शिक्षकौ स्वः। (उत्तर: आवाम्)
- (ख) ______ मञ्चे नर्तक्यः स्थ। (उत्तर: यूयम्)
- (ग) ______ अत्र अस्मि। (उत्तर: अहम्)
- पृष्ठ 51 — अभ्यास 3: चित्र देखकर वाक्य बनाएँ (शिक्षक, शिक्षिका, छात्रा, नर्तकी आदि)।
- पृष्ठ 53 — अभ्यास 4: उदाहरणानुसार वाक्य जोड़ें (परस्परं योजयन्तु)।
- शिक्षक घूम-घूमकर सहायता करेंगे।
चरण 4: निष्कर्ष एवं आकलन (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
प्रश्न पूछें—
- “उत्तम पुरुष के रूप कौन-से हैं?” (अस्मि, स्वः, स्मः)
- “मध्यम पुरुष के रूप कौन-से हैं?” (असि, स्थः, स्थ)
- “प्रथम पुरुष के रूप कौन-से हैं?” (अस्ति, स्तः, सन्ति)
- “पुस्तकम् अस्ति” — यहाँ ‘म्’ क्यों नहीं बदला? (क्योंकि ‘अ’ स्वर है।)
- “पुस्तकं नास्ति” — यहाँ ‘म्’ क्यों बदला? (क्योंकि ‘न’ व्यंजन है।)
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| प्रथमपुरुषः | प्रथम पुरुष (Third Person) | सः, सा, तत् — प्रथमपुरुषः। |
| मध्यमपुरुषः | मध्यम पुरुष (Second Person) | त्वम्, युवाम्, यूयम् — मध्यमपुरुषः। |
| उत्तमपुरुषः | उत्तम पुरुष (First Person) | अहम्, आवाम्, वयम् — उत्तमपुरुषः। |
| अनुस्वारः | अनुस्वार (अं) | पुस्तकं नास्ति — अनुस्वारः। |
| व्यञ्जनम् | व्यंजन (Consonant) | व्यञ्जनात् पूर्वम् म् → अं। |
| स्वरः | स्वर (Vowel) | स्वरात् पूर्वम् म् → म्। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र तीनों पुरुषों के सर्वनाम और क्रियापद रूपों को स्मरण करेंगे।
- छात्र अनुस्वार नियम को समझेंगे और सही स्थानों पर ‘म्’/’अं’ का प्रयोग कर सकेंगे।
- छात्र पाठ्यपुस्तक के अभ्यासों को हल करेंगे।
- छात्र ‘अस्ति’ और ‘नास्ति’ का सही प्रयोग कर सकेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘अहम्’ के लिए कौन-सा रूप आता है?” (अस्मि)
- “‘त्वम्’ के लिए कौन-सा रूप आता है?” (असि)
- “‘सः’ के लिए कौन-सा रूप आता है?” (अस्ति)
लिखित कार्य:
- “पुस्तकम् अस्ति।” को “न” (नहीं) के साथ लिखें (शुद्ध रूप में) — उत्तर: “पुस्तकं नास्ति।”
- “फलम् अस्ति।” को “न” के साथ लिखें — उत्तर: “फलं नास्ति।”
रिक्त स्थान पूर्ति:
- पुस्तक______ नास्ति। (अम्/अं) — उत्तर: अं
- गजः अस्ति। (म्/ं — नहीं बदलेगा क्योंकि ‘अ’ स्वर है।) — उत्तर: म् (गजः अस्ति। — कोई परिवर्तन नहीं)
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने तीनों पुरुषों की तालिका स्मरण कर ली?
- क्या अनुस्वार नियम (व्यंजन से पहले ‘म्’ → ‘अं’) समझ आया?
- क्या वे ‘अस्ति’ और ‘नास्ति’ का सही प्रयोग कर पा रहे हैं?
- अगली अवधि के लिए योजना: शेष अभ्यास, ‘त्वमेव माता’ श्लोक, ‘अहं पठामि’ गीत और परियोजना-कार्य कराना है।
⏳ कालखंड 5 (पाँचवीं अवधि – 35-40 मिनट)
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दिनांक: _________
1. शिक्षण-उद्देश्य (Learning Objectives)
छात्र—
- पाठ के शेष अभ्यास (पृष्ठ 52-56) को पूरा करेंगे।
- ‘त्वमेव माता…’ श्लोक का पाठ, अर्थ और स्मरण करेंगे।
- ‘अहं पठामि’ गीत (पृष्ठ 55) का गायन करेंगे।
- योग्यताविस्तार (प्रथम/मध्यम/उत्तम पुरुष तालिका) को समझेंगे।
- परियोजना-कार्य — ‘अहम्’ और ‘त्वम्’ के सभी रूपों को स्फोरकपत्र (Chart) पर लिखेंगे।
2. पाठ्य-सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 52-56)
- ‘त्वमेव माता’ श्लोक का चार्ट
- ‘अहं पठामि’ गीत का चार्ट
- A3 शीट/चार्ट पेपर (परियोजना-कार्य हेतु)
- रंगीन पेन/मार्कर
3. पूर्व-ज्ञान (Prerequisite Knowledge)
- छात्रों ने पिछली अवधियों में ‘अस्’ धातु के सभी रूप, अनुस्वार नियम, अभ्यास कर लिए हैं।
- उन्होंने उत्तम और मध्यम पुरुष के साथ वाक्य बनाना सीख लिया है।
4. शिक्षण-प्रक्रिया (Teaching Procedure)
चरण 1: पुनरावृत्ति एवं प्रस्तावना (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पिछली अवधि का संक्षिप्त पुनःस्मरण:
“अनुस्वार का नियम क्या है?”
“‘अहम्’ के तीनों रूप क्या हैं?” (अस्मि, स्वः, स्मः)
“‘त्वम्’ के तीनों रूप क्या हैं?” (असि, स्थः, स्थ) - अब घोषित करें:
“आज हम पाठ के शेष अभ्यास, एक सुंदर श्लोक (‘त्वमेव माता’), एक गीत और परियोजना-कार्य करेंगे।”
चरण 2: शेष अभ्यास – 10 मिनट
शिक्षक क्रिया:
छात्रों को निम्नलिखित शेष अभ्यास करने को कहें:
- पृष्ठ 55 — अभ्यास 5: उदाहरणानुसार उत्तरों के प्रश्न-निर्माण करें:
- (क) “त्वं तन्त्रज्ञः।” → “त्वं कः?”
- (ख) “युवां बालकौ।” → “युवां कौ?”
- (ग) “यूयं छात्राः।” → “यूयं के?”
- पृष्ठ 56 — अभ्यास (गीत): ‘अहं पठामि’ गीत पढ़ें और समझें।
- अनुस्वार अभ्यास: बोर्ड पर कुछ वाक्य लिखें और छात्रों को ‘म्’ को ‘अं’ में बदलने को कहें:
- “पुस्तकम् नास्ति।” → “पुस्तकं नास्ति।”
- “फलम् पतति।” → “फलं पतति।”
- “जलम् अस्ति।” → “जलम् अस्ति।” (कोई परिवर्तन नहीं)
चरण 3: ‘त्वमेव माता…’ श्लोक (पृष्ठ 51) – 5 मिनट
शिक्षक क्रिया:
(क) श्लोक का सस्वर पाठ:
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वं मम देवदेव।।
(ख) भावार्थ (सरल हिंदी में):
- “आप ही माता हैं, आप ही पिता हैं।”
- “आप ही बंधु हैं, आप ही मित्र हैं।”
- “आप ही विद्या हैं, आप ही धन हैं।”
- “आप ही मेरे सब कुछ हैं, हे देवदेव!”
(ग) स्मरण: छात्रों को श्लोक को 3-4 बार दोहराने को कहें और घर पर स्मरण करने के लिए कहें।
चरण 4: ‘अहं पठामि’ गीत (पृष्ठ 55) – 5 मिनट
शिक्षक क्रिया:
(क) गीत का सस्वर पाठ:
अहं पठामि संस्कृतम्।
अहं वदामि संस्कृतम्।
अहं लिखामि संस्कृतम्।
सदैव सुन्दराक्षरम्।।
अहं स्मरामि मातरम्।
अहं भजामि मातरम्।
अहं नमामि मातरम्।
सदैव भवितपूर्वकम्।।
(ख) अर्थ:
- मैं संस्कृत पढ़ता/ती हूँ।
- मैं संस्कृत बोलता/ती हूँ।
- मैं संस्कृत लिखता/ती हूँ।
- सदैव सुंदर अक्षरों में।
- मैं माता (भारत माता/गोमाता) को स्मरण करता/ती हूँ।
- मैं माता की भक्ति करता/ती हूँ।
- मैं माता को नमस्कार करता/ती हूँ।
- सदैव श्रद्धापूर्वक।
(ग) गायन: शिक्षक स्वयं गुनगुनाएँ, छात्र अनुगमन करें। ताल (ताली) के साथ गाएँ।
चरण 5: योग्यताविस्तर एवं परियोजना-कार्य (10 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
(क) योग्यताविस्तर (पृष्ठ 55) — तीनों पुरुषों की तालिका:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम (वह) | भवान्/भवती अस्ति | भवन्तौ/भवत्यौ स्तः | भवन्तः/भवत्यः सन्ति |
| मध्यम (तू) | त्वम् असि | युवाम् स्थः | यूयम् स्थ |
| उत्तम (मैं) | अहम् अस्मि | आवाम् स्वः | वयम् स्मः |
(ख) परियोजना-कार्य (पृष्ठ 56):
- “अहम्” और “त्वम्” के सभी रूपों को स्फोरकपत्र (Chart) पर सुंदर अक्षरों में लिखें।
- तीनों वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) के साथ उदाहरण वाक्य भी लिखें।
उदाहरण (बोर्ड पर):
- अहम् — अस्मि → अहं छात्रः अस्मि।
- आवाम् — स्वः → आवां छात्रौ स्वः।
- वयम् — स्मः → वयं छात्राः स्मः।
- त्वम् — असि → त्वं छात्रः असि।
- युवाम् — स्थः → युवां छात्रौ स्थः।
- यूयम् — स्थ → यूयं छात्राः स्थ।
चरण 6: सारांश एवं आकलन (5 मिनट)
शिक्षक क्रिया:
- पूरे पाठ का संक्षिप्त सारांश:
“इस पाठ में हमने ‘अस्’ धातु के उत्तम (अहम्, आवाम्, वयम्) और मध्यम (त्वम्, युवाम्, यूयम्) पुरुषों के रूप सीखे। हमने अनुस्वार का नियम सीखा। ‘त्वमेव माता’ श्लोक और ‘अहं पठामि’ गीत सीखा।”
मूल्यांकन प्रश्न:
- “त्वम्” के साथ कौन-सा क्रियापद आता है? (असि)
- “आवाम्” के साथ कौन-सा क्रियापद आता है? (स्वः)
- “अनुस्वार नियम” एक उदाहरण सहित लिखें।
- “त्वमेव माता” — इस श्लोक का एक पद लिखें।
5. प्रमुख शब्द-अर्थ (Key Vocabulary)
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| स्मरामि | स्मरण करता/ती हूँ | अहं मातरं स्मरामि। |
| भजामि | भक्ति/पूजा करता/ती हूँ | अहं देवं भजामि। |
| नमामि | नमस्कार करता/ती हूँ | अहं गुरुं नमामि। |
| स्फोरकपत्रम् | चार्ट (Chart) | स्फोरकपत्रे रूपाणि लिखत। |
| भवान् | आप (पुल्लिंग — सम्मान) | भवान् शिक्षकः अस्ति। |
| भवती | आप (स्त्रीलिंग — सम्मान) | भवती गायिका अस्ति। |
6. छात्र-अधिगम (Student Learning Outcomes)
इस कालखंड के अंत तक—
- छात्र पाठ के सभी अभ्यासों को पूरा कर चुके होंगे।
- छात्र ‘त्वमेव माता’ श्लोक का पाठ और अर्थ समझेंगे।
- छात्र ‘अहं पठामि’ गीत गा सकेंगे और उसका अर्थ बता सकेंगे।
- छात्र योग्यताविस्तर की तालिका को समझेंगे।
- छात्र परियोजना-कार्य (चार्ट) पूरा करेंगे।
7. सतत मूल्यांकन (Formative Assessment)
मौखिक प्रश्न:
- “‘त्वमेव माता’ — इसका क्या अर्थ है?”
- “‘अहं पठामि’ गीत का पहला पद गाएँ।”
लिखित कार्य:
- ‘अहम्’ के तीनों रूप (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) लिखें।
- ‘त्वम्’ के तीनों रूप लिखें।
रिक्त स्थान पूर्ति:
- अहं मातरं ______ (स्मरामि / स्मरावः) — उत्तर: स्मरामि
- वयं देवं ______ (भजामि / भजामः) — उत्तर: भजामः
8. शिक्षक-टिप्पणी (Teacher’s Remark)
- क्या छात्रों ने सभी अभ्यासों को स्वतंत्र रूप से हल कर लिया?
- क्या श्लोक और गीत को सीखने में रुचि दिखाई?
- क्या तीनों पुरुषों की तालिका स्मरण हो गई?
- परियोजना-कार्य (चार्ट) के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
- अगले पाठ हेतु तैयारी: पाठ 4 — “अहं प्रातः उत्तिष्ठामि” (दिनचर्या, समय, क्रियापद) का आरंभ करना है।


