स्कूली शिक्षा में सुधार हेतु स्कूलों में विविध कार्यक्रम

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स्कूली शिक्षा में सुधार हेतु शाला में विविध गतिविधियों का आयोजन करते हुए इसकी नियमित मानिटरिंग की व्यवस्था विभाग द्वारा की जा रही है । जिसके तहत….

स्कूली शिक्षा में सुधार हेतु स्कूलों में विविद कार्यक्रम

शिक्षा में सुधार कार्ययोजनाCLICK HERE
स्कूली शिक्षा में सुधार

पालक जागरूकता अभियान (Parents awareness drive)

अभियान का उद्देश्य :-

  • सभी शालाओं में शाला प्रबन्धन समिति एवं पालकों का सम्मेलन आयोजित करवाना
  • पालकों को अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने हेतु प्रोत्साहित करना
  • पालकों को नियमित स्कूल आने हेतु प्रेरित करते हुए उन्हें पूर्ण महत्व प्रदान करना
  • पालकों को स्कूलों से जोड़ने एवं बच्चों की पढ़ाई में ध्यान देने के नवीन तरीके ढूंढना
  • प्रत्येक शाला में सक्रिय पालक इंडकर उन्हें अन्य पालकों को सक्रिय करने की जिम्मेदारी देना

क्रियान्वयन हेतु कोर ग्रुप का गठन:

  • प्रत्येक जिले एवं विकासखंड से पांच पांच विभागीय अधिकारियों का कोर ग्रुप में चयन
  • जिले स्तर से एपीसी डाईट अकादमिक सदस्य, एसएमसी मास्टर ट्रेनर एवं विकासखंड स्तर से• सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी
  • संकुल स्तर में प्रत्येक शाला से एक सक्रिय शाला प्रबंध समिति के सदस्य, एक शिक्षक, एक सक्रिय माता, चयनित जनप्रतिनिधि एवं एक प्रभावी व्यक्तित्व जिनकी बात सभी मानते हों

कोर ग्रुप के कार्य:-

  • जिले के समस्त शालाओं में पालक जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु कार्ययोजना बनाना
  • प्रत्येक शाला में पालक जागरूकता हेतु रणनीति एवं चर्चा के बिंदु / गतिविधि तैयार करना
  • विकासखंड एवं संकुल स्तर पर कोर ग्रुप का उन्मुखीकरण एवं स्थानीय इनपुट देना
  • शाला स्तर पर शाला प्रबन्धन समिति एवं पालकों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम
  • पालक उन्मुखीकरण उपरान्त निरंतर फोलो अप एवं पालकों की सक्रिय सहभागिता के बेहतरउदाहरणों का संकलन, दस्तावेजीकरण एवं मीडिया को उपलब्ध करवाया जाना

पालकों के उन्मुखीकरण हेतु चर्चा/ गतिविधि के क्षेत्रों का निर्धारण:

  • बच्चों एवं शिक्षकों की शाला में नियमित उपस्थिति एवं बेहतर शिक्षा सुविधा सुलभ करवाना
  • CWSN एवं शाला से बाहर के बच्चों को शाला में दाखिला एवं उनके लिए आवश्यक सुविधाएँ
  • पालकों को स्कूल से जोड़ने एवं उन्हें बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने हेतु रणनीतियां
  • घर पर बच्चों के सीखने हेतु बेहतर माहौल बनाना एवं पढ़ने हेतु उचित स्थान देना
  • बच्चों के घर की भाषा एवं स्कूल की भाषा अलग होने पर होने वाली परेशानियां एवं शुरुआती कक्षाओंमें बच्चों को सीखने हेतु स्थानीय सामग्री के उपयोग हेतु आवश्यक समर्थन
  • आंगनवाड़ी में सभी बच्चों का प्रवेश एवं उनमें बच्चों के सीखने हेतु आवश्यक सहयोग
  • शाला में बच्चों को मिलने वाली समस्त सुविधाओं की समय पर उपलब्धता एवं गुणवत्ता हेतु संपर्क

शालाओं के मध्य साझेदारी (Twinning of Schools )

कार्यक्रम का उद्देश्य:

  • दो स्कूलों के बीच आपस में साझेदारी कर एक दूसरे के संसाधनों का बेहतर उपयोग
  • छोटे बच्चों को निकट के बड़े स्कूलों में ले जाकर उन्हें आगे पढने हेतु प्रेरित करना
  • सामाजिक सरोकार से प्रेरित होकर निजी स्कूलों द्वारा सरकारी स्कूलों को गोद लेना
  • सरकारी एवं निजी स्कूलों के बीच विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन

क्रियान्वयन हेतु कोर ग्रुप का गठन:-

  • प्रत्येक जिले एवं विकासखंड से पांच पांच विभागीय अधिकारियों का कोर ग्रुप में चयन
  • जिले स्तर से एपीसी, ADPO, एवं विकासखंड स्तर से शाला संकुल प्राचार्यों, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्रोत समन्वयक को कोर ग्रुप में शामिल कर जवाबदेही देवें

कोर ग्रुप के कार्य:

  • कोर ग्रुप को ट्विनिंग ऑफ़ स्कूल कार्यक्रम की समझ विकसित करने हेतु कार्यक्रम से संबंधित सभीजानकारियां पढ़ने एवं कार्यक्रम की समझ विकसित करने हेतु अवसर देवें
  • कोर ग्रुप अपने जिले में इस योजना का क्रियान्वयन कैसे करेंगे, इसकी माइक्रो प्लानिंग कर लेवें
  • कोर ग्रुप को एक सप्ताह के भीतर अपने जिले की सभी शालाओं की आपस में ट्विनिंग करने हेतु जवाबदेही देते हुए कार्यक्रम की निगरानी करें एवं प्रगति की समीक्षा कर सुधार लाएं

साझेदारी के प्रकार:-

  • निजी शालाएं अपने अलग-अलग कक्षाओं को अलग अलग गाँव के स्कूलों के बच्चों के साथ ताकि वे एकदूसरे के पास उपलब्ध संसाधनों को देखकर, अनुभव कर सीख सकें।
  • हायर सेकंडरी शालाएं अपने आसपास के उच्च प्राथमिक, प्राथमिक शालाओं एवं आगनबाड़ियों के बच्चोंके साथ ताकि उनमें पढने एवं आगे अध्ययन के लिए प्रेरित किया जा सके
  • किसी क्षेत्र में बेहतर प्रयास एवं कार्य कर रहे स्कूलों में जाकर अन्य स्कूल के शिक्षक एवं बच्चे उस माडल को देखकर अपने यहाँ लागू करने की प्रेरणा लेकर वापस आने हेतु
  • किसी एक शाला में उपलब्ध संसाधनों को अन्य शाला के शिक्षक भी उपयोग कर सकें, ऐसा अवसर उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से ट्विनिंग (उदाहरण अटल टिंकरिंग लैब)
  • अन्य संबंधित शासकीय विभागों से शाला में आवश्यक सुविधाओं की प्राप्ति हेतु ट्विनिंग

साझेदारी की प्रक्रिया:-

सफलतापूर्वक ट्विनिंग हेतु आवश्यक विशेषताएं:-

  • दोनों साझेदारों के बीच win-win स्थिति होनी चाहिए
  • दोनों साझेदार ट्विनिंग के क्षेत्र के लिए सहमत एवं एकमत होना चाहिएदोनों की आवश्यकताओं एवं वास्तविक मांग पर आधारित होनी चाहिए
  • स्पष्ट एवं फोक्स दृष्टि होनी चाहिए एवं इस बाबत ठोस योजना होनी चाहिए
  • नेतृत्व क्षमता एवं कौशल होना चाहिए एवं आवश्यक संसाधन हेतु पर्यास बजट सुलभ होना चाहिए
  • एक दूसरे का सम्मान, कल्चर की समझ एवं सतत संवाद या कम्युनिकेशन होना चाहिए

सफल ट्विनिंग हेतु सुझावात्मक क्षेत्र:-

  • एक दूसरे की शालाओं का शैक्षिक भ्रमण एवं कक्षाओं, शिक्षण पद्धतियों, सुविधाओं से परिचय
  • एक दूसरे की संस्कृति, परंपराओं एवं पृष्ठभूमि से परिचय एवं समझ विकसित करना
  • किसी परियोजना में शामिल होकर मिलकर उसे पूरा करने की दिशा में कार्य करना
  • विषय विशेषज्ञ शिक्षक से अन्य शिक्षकों एवं बच्चों को मार्गदर्शन या अन्य शालाओं को मेंटरिंग बेहतर प्रयासों / अभ्यासों को देखकर सीखने के अवसर मुहैय्या कराते हुए सीखना
  • बच्चों के लिए समर कैम्प के अलावा विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए मिलकर तैयारी करना
  • शाला त्यागी बच्चों को पढ़ाई में मदद करने दानोत्सव जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग देना जैसे चस्ता, कपडे एवं अन्य आवश्यक सामग्री एकत्रित कर उपलब्ध कराना
  • मिलकर कुछ उत्पाद बनाकर बेचकर उससे हुई आय से गरीब बच्चों को सहयोग जैसे किसी शाला केबच्चों द्वारा मिट्टी के दिए बनाकर उसे बेचकर वृद्धाश्रम के लिए वाटर कूलर दान में दिया
  • अखवार के साथ आने वाले बाल पत्रिकाओं को एकत्र कर सरकारी स्कूलों के मुस्कान पुस्तकालयों के लिए दान करना
  • किसी स्कूल में बढ़िया आधुनिक प्रयोगशाला होने की स्थिति में अन्य शालाओं के बच्चों को समय समय पर उस प्रयोगशाला के उपयोग का अवसर उपलब्ध कराना
  • किसी परियोजना जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम या किसी फिल्म को बनाने में एक दूसरे का सहयोग लेकर उस परियोजना को पूरा करना
  • ई-ट्विनिंग के अवसर ढूंढकर अन्य राज्यों एवं देशों के बच्चों के साथ भी साझेदारी के 4/6 ई-ट्विनिंग हेतु इन्टरनेट, स्काइप या अन्य किसी सोशियल मीडिया का उपयोग करना
  • सरकारी स्कूलों व्दारा स्थानीय लोक कलाकारों को निजी स्कूलों में बच्चों को लोक कला सिखाने हेतुउपलब्ध कराने में सहयोग देना

निकटवर्ती स्कूलों द्वारा आंगनबाडी को अपनाना

कार्यक्रम का उद्देश्य:-

  • आंगनबाडी एवं प्राथमिक शालाओं के बीच नजदीकी संबंध स्थापित करवाना
  • छोटे बच्चों को आंगनवाडी स्तर पर सीखने में सहयोग करने के दिशा में सहयोग
  • समुदाय को इस बात के लिए जागरूक करना कि सभी बच्चों को नियमित आंगनवाडी भेजें
  • आंगनबाडी में सीखने-सिखाने में स्मार्ट माता एवं स्थानीय स्तर पर सुविधाएं देना
  • छोटे बच्चों को निकट के बड़े स्कूलों में ले जाकर उन्हें आगे पढ़ने हेतु प्रेरित करना

क्रियान्वयन हेतु कोर ग्रुप का गठन:-

  • प्रत्येक जिले एवं विकासखंड से पांच पांच विभागीय अधिकारियों का कोर ग्रुप में चयन
  • जिले स्तर से महिला एवं बाल विकास के अधिकारी, DIET, एपीसी, एवं विकासखंड स्तर से शाला संकुल प्राचार्यो, विकासखंड शिक्षा अधिकारी विकासखंड स्रोत समन्वयक एवं महिला एवं बालविकास से संबंधित अधिकारियों को कोर ग्रुप में शामिल कर जवाबदेही देवें

कोर ग्रुप के कार्य:-

  • कोर ग्रुप द्वारा प्राथमिक शाला एवं आंगनबाड़ी की जोड़ी बनाने हेतु मैपिंग की योजना बनाकरतत्काल क्रियान्वयन हेतु दोनों विभागों की ओर से आवश्यक कार्यवाहियां की जाएगी
  • प्राथमिक शालाएं किस प्रकार से निकट के आंगनबाडी को अकादमिक समर्थन दे सकेंगी, इसके लिएरणनीतियां बनाकर आवश्यक कार्यवाहियां की जानी होगी
  • कोर ग्रुप को दस दिनों के भीतर अपने जिले की सभी प्राथमिक शालाओं एवं आंगनबाडी की आपस मेंट्विर्निंग करने हेतु जवाबदेही देते हुए कार्यक्रम की निगरानी एवं प्रगति की समीक्षा करें

क्रियान्वयन की रणनीतिः-

  • कोर ग्रुप का उन्मुखीकरण कर उनके माध्यम से आंगनबाडी में छोटे बच्चों को सीखने के अवसर देने की आवश्यकता है, इस संबंध में सभी हितग्राहियों का उन्मुखीकरण आवश्यक है
  • प्राथमिक शालाओं एवं निकट के आंगनवाडी के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य प्रारंभ करना
  • प्राथमिक शाला के शिक्षक द्वारा आंगनवाड़ी में सिखाने वाली टीम की मेंटरिंग करना
  • निपुण भारत के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों को नोट कर आंगनबाडी को उसकी प्राप्ति के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं बच्चों के साथ उन लक्ष्यों में कार्य हो रहा है अथवा नहीं, इस पर ध्यान देना
  • कक्षा पहली में प्रवेश लेने वाले सभी बच्चों में कौन कौन सी दक्षताएं हासिल करवाई जानी है, उसकी संप्राप्ति सभी बच्चों में हासिल करने हेतु आवश्यक उपचारात्मक प्रयास5/6Dedagogy/Letter 55A 2022 Paul Page 17

कोर ग्रुप के कार्य:-

  • कोर ग्रुप द्वारा प्राथमिक शाला एवं आंगनवाडी की जोड़ी बनाने हेतु मैगिंग की योजना बनाकर तत्काल क्रियान्वयन हेतु दोनों विभागों की ओर से आवश्यक कार्यवाहियां की जाएगी
  • प्राथमिक शालाएं किस प्रकार से निकट के आंगनबाडी को अकादमिक समर्थन दे सकेंगी. इसके लिएरणनीतिया बनाकर आवश्यक कार्यवाहियां की जानी होगी।
  • कोर ग्रुप को दस दिनों के भीतर अपने जिले की सभी प्राथमिक शालाओं एवं आंगनवाडी की आपस मेंट्विर्निंग करने हेतु जबाबदेही देते हुए कार्यक्रम की निगरानी एवं प्रगति की समीक्षा करें

क्रियान्वयन की रणनीतिः-

  • कोर ग्रुप का उन्मुखीकरण कर उनके माध्यम से आंगनबाडी में छोटे बच्चों को सीखने के अवसर देने कीआवश्यकता है, इस संबंध में सभी हितग्राहियों का उन्मुखीकरण आवश्यक है
  • प्राथमिक शालाओं एवं निकट के आंगनबाडी के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य प्रारंभ करना
  • प्राथमिक शाला के शिक्षक द्वारा आंगनवाडी में सिखाने वाली टीम की मैटरिंग करना
  • निपुण भारत के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों को नोट कर आंगनबाड़ी को उसकी प्राप्ति के लिए आवश्यकमार्गदर्शन एवं बच्चों के साथ उन लक्ष्यों में कार्य हो रहा है अथवा नहीं, इस पर ध्यान देना
  • कक्षा पहली में प्रवेश लेने वाले सभी बच्चों में कौन कौन सी दक्षताएं हासिल करवाई जानी है, उसकीसंप्राप्ति सभी बच्चों में हासिल करने हेतु आवश्यक उपचारात्मक प्रयास

मांग-आधारित प्रशिक्षण का आयोजन

कार्यक्रम का उद्देश्य:-

  • शिक्षकों के लिए उनकी आवश्यकता एवं मांग पर आधारित प्रशिक्षण की शुरुआत करना
  • प्रशिक्षण की वजह से बच्चों की पढ़ाई के नुकसान को कम से कम करने की दिशा में कार्य
  • शिक्षकों के प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान करने का कल्चर विकसित करना
  • शिक्षकों द्वारा उनकी आवश्यकताओं पर आधारित प्रशिक्षण की मांग एवं उनकी सुलभता स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रशिक्षण मोड्यूल तैयार कर उनका उपयोग सुनिश्चित करनाक्रियान्वयन हेतु

कोर ग्रुप का गठन:-

  • प्रत्येक जिले एवं विकासखंड से पांच पांच विभागीय अधिकारियों का कोर ग्रुप में चयन
  • जिले स्तर से डाईट, एपीसी प्रशिक्षण, विभिन्न प्रशिक्षणों में मास्टर ट्रेनर्स की सफल भूमिका निभातेहुए स्रोत व्यक्ति, सेवानिवृत्त कुशल शिक्षक प्रशिक्षक एवं शिक्षाविद जो स्थानीय स्तर पर शिक्षागुणवत्ता में सुधार हेतु इच्छुक हो

कोर ग्रुप के कार्य:-

  • कोर ग्रुप द्वारा बालवाडी से लेकर सेकन्डरी स्तर तक शिक्षकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं का आकलनकिया जाएगा
  • शिक्षकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं के आधार पर छोटे-छोटे कोर्सेस तैयार किये जाएंगे या प्रचलितकोर्सेस को संकलित कर उन्हें शिक्षकों को करने हेतु उपलब्ध करवाया जाएगा
  • विकासखंड स्तर पर मांग-आधारित प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सुविधाएँ एवं सिस्टम स्थापित कियाजाएगा

क्रियान्वयन की रणनीतिः-

  • कोर ग्रुप का उन्मुखीकरण कर उनके माध्यम से छोटी छोटी विशेषज्ञ टीम बनाकर प्रशिक्षण मोड्यूलएवं डिजाइन तैयार किया जाना प्रारंभ किया जाएगा
  • विभिन्न विकासखंड एवं जिले आपस में समन्वय कर अपने अपने लिए अलग अलग प्रशिक्षण के क्षेत्रों का निर्धारण कर लेवें ताकि वे आपस में एक दूसरे से साझा कर सके
  • शिक्षकों को अपनी रूचि एवं आवश्यकता के आधार पर प्रशिक्षण का चयन करने का अवसर देवें
  • इस प्रकार के प्रशिक्षण के लिए शुरुआत में कुछ इस प्रकार के क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सकता है
    1. सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र
    2. स्थानीय भाषा में बच्चों को सिखाए जाने की आवश्यकता
    3. सामाजिक अंकेक्षण कैसे करवाए
    4. शालाओं का सुरक्षा ओडिट कैसे करें
    5. लर्निंग आउटकम के आधार पर सभी बच्चों का सीखना सुनिश्चित करना
    6. विद्यार्थी विकास सूचकांक का बच्चों की प्रगति की ट्रेकिंग में उपयोग
    7. बस्ताबिहीन शालाओं का आयोजन कैसे करें
    8. समग्र रिपोर्ट कार्ड में बच्चों की प्रगति का अंकन एवं उसके माध्यम से उपचारात्मक शिक्षण
    9. असर टूल के सफल उपयोग हेतु गाँव के सभी बच्चों को शत-प्रतिशत दक्ष करना
    10. बालवाडी हेतु गतिविधियों

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