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OPS vs NPS-पुरानी और नई पेंशन में क्या है अन्तर?

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इस पोस्ट में हम जानेंगे :-

  • 👉पुरानी पेंशन योजना(OPS) के क्या हैं फायदे?
  • 👉OPS व NPS में क्या है मुख्य अन्तर?

OPS vs NPS-पुरानी और नई पेंशन में क्या है अन्तर?

पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) क्यों हैं बेहतर -:

  • OPS एक सुरक्षित विकल्प है क्योंकि यह उन्हें अधिक भरोसा उपलब्ध कराती है । सरकारी कर्मी जब रिटायर होता था तो उसकी अंतिम वेतन के 50 फीसदी हिस्से के बराबर उसकी पेंशन तय हो जाती थी।
  • OPS एक डेफिनिट बेनिफिट स्कीम थी । OPS वह पेंशन योजना थी जिसमें पेंशन अंतिम ड्रॉन सैलरी के आधार पर बनती थी । OPS में 40 साल की नौकरी हो या 10 साल की, पेंशन की राशि अंतिम सैलरी से तय होती थी ।
  • OPS में महंगाई दर बढ़ने के साथ DA (महंगाई भत्‍ता) भी बढ़ जाता था ।
  • जब सरकार नया वेतन आयोग लागू करती है तो भी इससे पेंशन में बढ़ोतरी होती है ।
  • OPS में परिवार पेंशन की पात्रता निश्चित था अर्थात कर्मी के मृत्यु के पश्चात उसके परिवार को पेंशन मिलेगा ही, जो NPS में जरूरी नहीं है ।

राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के क्या हैं फायदे ?

  • सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के खातों में योगदान की सीमा को 10 से बढ़ाकर 14 फीसदी करने का भी प्रस्ताव किया गया है।
  • मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, कोई भी NPS ग्राहक रुपये की कुल सीमा में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD (1)  के तहत कुल सकल आय का 10 फीसदी तक टैक्स में छूट का क्लेम कर सकता है । सेक्शन 80CCC के के तहत यह लिमिट 1.5 लाख  तक है ।
  • राजकीय अंशदान या नियोक्ता अंशदान एक बार कुल आय में जुड़ेगा और  अधिकतम वेतन का 10% के बराबर कटौती धारा 80CCD(2) में घटेगा। ये 80C और 80CCD(1B) के अतिरिक्त होगा।
  • आयकर अधिनियम 80 CCD (1B) के तहत सभी एनपीएस अभिदाताओं के लिए विशेष कर लाभ एनपीएस Tier-1 में रू. 50,000 तक निवेश करने पर एनपीएस अभिताओं के लिए आयकर अधिनियम की धारा 80 CCD(1B) के तहत अरिरिक्त, कटौती का लाभ का उपलब्ध है। यह आयकर अधिनियम की धारा,1861 के अंतर्गत उपलब्ध C 1.5 लाख रूपए की कटौती के अतिरिक्त है।
  • एन्युटी की खरीद में निवेश की गई राशि को भी कर से पूरी तरह छूट प्राप्त है।
  • एनपीएस टियर-I से ग्राहक द्वारा किए गए अंशदान के 25% तक का अंतरिम/आंशिक आहरण कर मुक्त है।
  • दिनांक 01.04.2019 से सेवानिवृत्ति के समय एनपीएस टियर-I से कुल पेंशन निधि के 60% तक के एकमुश्त आहरण कर मुक्त हैं।
  • बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) द्वारा पंजीकृत और विनियमित तथा पीएफआरडीए द्वारा पैनलबद्ध वार्षिकी सेवा प्रदाता से वार्षिकी खरीदने के लिए उपयोग की गई राशि का न्‍यूनतम 40% भी कर मुक्त है।

पुरानी पेंशन योजना(OPS) और नई पेंशन योजना(NPS) में मुख्य अन्तर :-

  1. OPS – 01 जनवरी 2004 से पहले नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के लिये हैं जब्कि NPS – 01 जनवरी 2004 के बाद नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के लिये हैं।
  2. OPS में Employee के वेतन से किसी भी प्रकार की कोई कटौती नहीं की जाती जब्कि NPS में Employee के मूलवेतन+महंगाई भत्ते का 10% Employee के वेतन से हर माह कटौती की जाती है।
    • उदाहरण :- माना Employee का
    • मूल वेतन     =35400 रु.
    • महंगाई भत्ता =5000 रु.
    • कुल वेतन =35000+5000=40000 रु.
    • NPS में जमा करने हेतु Employee के वेतन से प्रतिमाह होने कटौती  की राशि होगी
    • 40000 रु. का 10% = 4000 रु.होगी।
  3. OPS में GPF(सामान्य भविष्य निधि) की सुविधा मिलती है जिसमें Employee को वेतन का कम से कम 6% जमा करना होता है। जिस पर 7 से 8% ब्याज मिलता है। GPF के आधार पर लोन भी ले सकते है। GPF राशि आहरण पुर्ण रुप से Tax free होता है। साथ ही Employee के मृत्यु पर नामिनी को पुरी राशि मिल जाती है। जब्कि NPS में GPF की सुविधा नहीं होने के चलते ये सारे लाभ नहीं मिलते।
  4. OPS में रिटायर्मेंट के बाद पेंशन राशि निश्चित रहती है जो अंतिम वेतन का 50% और महंगाई भत्ते को मिलाकर बनती है जब्कि NPS में Employee को कितना पेंशन मिलेगा यह निश्चित नहीं होता। क्योंकि NPS की राशि शेयर मार्केट पर आधारित है तो उसका रिटर्न कितना होगा ये तय नहीं है ।
    • उदाहरण:- माना किसी Employee का
    • अंतिम मूलवेतन = 50000 रु.
    • महंगाई भत्ता     = 5000 रु. है
    • तो Employee को मिलने वाली पेंशन = 50000  रु. का 50% + महंगाई भत्ता
    • 25000 + 5000 = ₹30000 पेंशन मिलेगा।
  5. OPS में अंतिम मूलवेतन का 50%+DA पेंशन के रूप में मिलता है जब्कि NPS में अंतिम वेतन का 17-24%(लगभग) तक पेंशन मिलेगा बिना किसी महंगाई भत्ते के, वो भी मौजुदा 10% कटौती पर जिसे केन्द्र द्वारा 14% करने का प्रस्ताव किया गया है।
  6. OPS में न्यूनतम पेंशन राशि तय की गयी है जो 9000 रु. है, उससे कम पेंशन किसी भी स्थिति में नहीं हो सकता जब्कि NPS में न्यूनतम पेंशन राशि निर्धारित ही नहीं की गयी है।
  7. OPS में Employee को प्रत्येक 6 माह के बाद महंगाई भत्ते का लाभ मिलता है। जब्कि NPS में महंगाई भत्ते का कोई लाभ नहीं मिलता। इसमें Employee के दिए हुए प्लान के अनुसार एक निश्चित (fixed) पेंशन ही मिलता है ।
  8. OPS में कर्मचारी की सेवाकाल न्यूनतम 10 वर्ष होनी चाहिये फिर उसे पेंशन की पात्रता होती है जब्कि NPS में 60 वर्ष होने पर ही पेंशन मिलता है।
  9. OPS में ग्रेच्युटी के तौर पर मूलवेतन व महंगाई भत्ते का 15 गुना या अधिकतम 20 लाख रुपये मिलते हैं जो कि Tax free होता है। मृत्यु पर यह लाभ नामिनी को देय होता है जब्कि NPS में  ग्रेच्युटी की पात्रता नहीं होने पर ये सारे लाभ देय नहीं हैं ।

NPS में पेंशन कम क्यों बन रहा?

हम लोग आये दिन देखते सुनते रहके हैं कि NPS में पेंशन किसी का 2000 बना तो किसी का 3000 तो इतना कम क्यों बन रहा और इसके पिछे के कारण क्या है? क्या आगे आने वाले दिनों मे भी इस प्रकार से ही पेंशन तय होगा या इसके कुछ बेहतर परिणाम निकल सकते हैं ? आइये तथ्यों पर आधारित वास्तविकता को समझते हैं पेंशन कम होने के फैक्टर को समझते हैं

Example-01
Example-02
OPS vs NPS
OPS vs NPS

1️⃣वेतन पे लेवल कम होने पर :-

चूँकि NPS खाते में Employee का अंशदान मूलवेतन व महंगाई भत्ता का 10% होता है और उतना ही राशि न्योक्ता द्वारा जमा की जाती है। तो हम कह सकते हैं कि जिस Employee का जितना ज्यादा वेतन बनता है उसका अंशदान उतना अधिक होगा और उसका पेंशन उतना ही ज्यादा होगा। अतः जिन कर्मचारियों का वेतन पे लेवल कम होगा उनका NPS में राशि कम जमा होगा जिससे अंत में उनका पेंशन भी कम बनेगा। लेकिन OPS में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं होती और अंतिम वेतन के आधार पर वेतन निर्धारण होता है इसलिये उनके कम या ज्यादा वेतन का पेंशन पर प्रभाव नहीं पड़ता।

2️⃣सेवाकाल की अवधि पर :-

सेवाकाल जितना अधिक होगा हमारा पेंशन उतना ही ज्यादा बनेगा। यहाँ दो प्रकार से शिक्षक का पेंशन कम बन सकता है।


👉 सर्विस देर से ज्वाईन करने वाले शिक्षकों का: ऐसे शिक्षक जिनकी नौकरी ज्यादा उम्र में लगी हो। जैसे अभी वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्थानीय निवासियों को 5 वर्ष की विशेष छूट दी गयी है जिससे नौकरी की उम्र 40 वर्ष हो गयी है। अत: उनकी सेवाकाल की अवधि कम होने पर उनकी जमा राशि भी कम होगी। तो उनका पेंशन भी कम बनेगा।

👉सर्विस में संविदा पर रहने के चलते NPS देर से लागू हुआ हो: नेशनल पेंशन सिस्टम 1 जनवरी 2004 से प्रारंभ हुई है पर छत्तीसगढ़ में इसे पुरी तरह से 1 अप्रैल 2012 को लागू किया गया। शिक्षाकर्मीयों को भी NPS का लाभ 1 अप्रैल 2012 से दी गयी हैं चुँकि शिक्षाकर्मी की नियुक्ति 1998 से हुई है पर उनको संविदा मानकर 2004 के पहले की सेवा के लिये न पुरानी पेंशन दी गयी और 2004 के बाद की सेवा के लिये 2012 तक NPS दी गयी । अत: 1998 से 2012 तक नियुक्त हुये शिक्षकों को इस अवधि के लिये किसी प्रकार का पेंशन संबंधी लाभ नहीं मिला। यह भी कम पेंशन बनने का एक कारण है।

छत्तीसगढ़ में NPS लागू करने संबंधी आदेश दिनाँक 01-08-2012👇CLICK HERE

3️⃣शासन द्वारा देय अंशदान :-

NPS खाते में न्योक्ता द्वारा 10% का अंशदान दिया जाता है। जिसे 14 % करने का प्रस्ताव किया जा चुका है कई राज्यों में लागू भी है पर हमारे छत्तीसगढ़ में फिलहाल 10% राशी ही जमा की जाती है। तो शासन के अंशदान के चलते भी अंतिम पेंशन राशि में प्रभाव पड़ेगा क्योंकि जितना ज्यादा अंशदान उतना ही ज्यादा पेंशन।

4️⃣देय महंगाई भत्ते पर :-

नियमित शिक्षकों को पेंशन की राशी पर शासन द्वारा समय समय पर देय महंगाई भत्ता भी देय होता है। जो कि NPS के मामले में देय नहीं है उसका एक नियत व Fix पेंशन तय कर दिया जाता है जो Annuity की दर पर निर्भर करता है। Annuity के हिसाब से ये कम या ज्यादा हो सकता है।

5️⃣शेयर मार्केट पर :-

Employee व न्योक्ता के अंशदान से NPS खाते में जमा होने वाली राशि को मुख्य रुप से शेयर मार्केट में Invest किया जाता हैं। जिसे फंड मेनेजर द्वारा मेनेज किया जाता है। जिससे हमारे पैसे की वृद्धि शेयर मार्केट के अच्छे या बुरे प्रदर्शन पर निर्भर करते हैं।और इस आधार पर ही हमारी पेंशन राशि तय होती है।

6️⃣NPS में जमा राशि का 40% ही पेंशन के लिये होता है :-

Employee व न्योक्ता के अंशदान के चलते रिटायर्मेंट के समय कुल राशि का 60% एक मुश्त संबंधी कर्मचारी को दे दी जाती है। बाकि के 40% से किसी कंपनी का Annuity खरीदना होता है। आप Annuity की राशि को 40% से बढ़ा भी सकते है पर इससे आपको एक मुश्त मिलने वाली राशि कम हो जायेगी तो इसे आप तय कर सकते हैं। नियमित शिक्षकों के मामले में वे GPF का 100% आहरण कर सकते हैं उसके बाद भी अंतिम वेतन का आधा पेंशन के रुप में मिलता है।

7️⃣Annuity Return की ब्याज दर पर :-

पेंशन निर्धारण के लिये यह फेक्टर सबसे महत्वपूर्ण है। रिटायर्मेंट पश्चात 40% राशि से किसी बिमा कंपनी की Annuity खरीदनी होती है। तो वह कंपनी Annuity की ब्याज दर व मूल के आधार पर एक निश्चित पेंशन राशि तय करती है। यह ब्याज दर साधारणतः 5-6% तक होती है जो बहुत ही कम है। इसके चलते भी पेंशन बहुत कम बनती है। OPS में इस प्रकार का कोई बंधन या प्रावधान नहीं है।

8️⃣गलत समय पर NPS से Exit करने पर :-

किसी कर्मचारी की रिटायर्मेंट की आयु हो चुकी है और वह NPS से निकलना चाहता है अर्थात अपना 60% एक मुश्त व 40% Annuity खरीदना चाहता है और उस समय शेयर बाजार गिरा हुआ है तो उसके रिटर्न पर बहुत प्रभाव पड़ेगा जिसके चलते पेंशन कम बनेगा। तो ऐसे समय में सलाह दी जाती है कि NPS से तुरंत Exit होने की बजाय कुछ समय तक होल्ड में रखे ताकि बाजार के चढ़ने पर बेहतर रिटर्न के साथ बेहतर राशि मिल सके । इसलिये NPS का कर्माचारियों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है क्योंकि बाजार कभी भी गिर सकता है जिससे पेंशन पर Effect पड़ सकता है।

9️⃣सातवाँ वेतनमान से पहले वेतन का बहुत कम होना:-

6th Pay में वैसे भी वेतन कम बनता था तो NPS में अंशदान भी कम होने पर जमा राशि कम होता था जिसके चलते पेंशन भी बहुत ही कम बनता था। कई बार सुनने में आता है कि अंतिम वेतन 70000 था पर पेंशन मिल रहा 2000 तो इसका सीधा सा कारण है कि अभी 2016 से मिल रहा साँतवा वेतनमान जिससे वेतन तो बढ़ गया पर हमारे NPS खाते में पहले से ही राशि कम है और अभी बढ़े हुये वेतन से 2-4 साल ही अंशदान कुछ ज्यादा जमा होने पर पेंशन ज्यादा मिले ये तो NPS के नियम से संभव नहीं है। यही सब कारण है जिससे अभी रिटायर होने वाले कर्मचारियों का पेंशन बहुत कम बन रहा।

पर हाँ शेयर मार्केट या मेचुवल फंड इसी सिध्दांत पर काम करता है कि आपका पैसा जितना ज्यादा समय तक Invested रहेगा तो लाभ मिलने की प्रायिकता बढ़ती जाती है तो अगर NPS में आप लंबे समय तक अच्छा खासा पैसा जमा करते रहते हैं जैसे अभी हो रहा तो पेंशन कुछ बेहतर हो सकती है पर हाँ ये OPS का कभी भी कर्मचारीयों के हित में सही विकल्प नहीं हो सकता

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