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अवकाश नगदीकरण की गणना कैसे करते हैं ?

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अवकाश नगदीकरण की गणना : अवकाश नगदीकरण संपूर्ण सेवा अवधि के लिए प्रथमतः दो वर्ष के कालखण्ड पर 15 दिवस की दर से एवं शेष अवधि के लिए 7 दिवस प्रति वर्ष की दर से अर्जित अवकाश (समर्पित अवकाश ) की पात्रता की गणना किया जाता है ।

पोस्ट विवरण

अवकाश नगदीकरण की गणना कैसे करते हैं ?

सेवानिवृत्त पर अवकाश नगदीकरण –

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अवकाश नगदीकरण की गणना

सेवानिवृत्त पर अवकाश नगदीकरण पात्रता-

  • अधिवार्षिकी आयु पूर्ण होने वाले शासकीय सेवकों को, 
  • स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों को, 
  • शासन द्वारा अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए जाने वाले शासकीय सेवकों को,
  • असमर्थ पेंशन पर सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों को, 
टिप्पणी:- कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अवकाश नगदीकरण की पात्रता नहीं है।

अवकाश नगदीकरण कि अधिकतम सीमा-

  • सेवा निवृत्त होने के दिनांक को अवकाश लेखे में शेष बचे अर्जित अवकाश के बराबर,
  • परन्तु जो 240 दिन से अधिक नहीं हो सकता,
  • नगदीकरण तथा समर्पण अवकाश कि कुल सीमा से उससे अधिक नहीं होगी |
  • जो शासकीय सेवक अपनी पूरी सेवा में रहते वर्तमान आदेशों के अधीन अवकाश का समर्पण करता है।एकमुश्त भुगतान-अवकाश वेतन के बराबर स्वीकार नगद राशि सेवानिवृत्ति पर देय होगी 
  • सेवा में रहते अवकाश का समर्पणऔर उसकी अदाएगी एक ही बार भुगतान के रूप में की जावेगी।

अवकाश नगदीकरण में अवकाश वेतन- 

  • अवकाश वेतन वही होगा जो कर्मचारी को अर्जित अवकाश पर जाने पर मिलता है |
  • इसमें नगर क्षतिपूर्ति भत्ता शामिल नहीं होता है। 
  • अवकाश भत्ता की गणना = वेतन + महगाई भत्ता / 30 X समर्पित अवकाश के दिनों की संख्या

अवकाश नगदीकरण स्वीकृति कर्ता सक्षम आधिकारी-

कर्मचारी का अवकाश स्वीकृत करने वाला अधिकारी ही अवकाश नगदीकरण के लिए सक्षम अधिकारी है ।

मृत्यु पर अर्जित अवकाश का नगदीकरण – 

मृत्यु पर अर्जित अवकाश नगदीकरण की पात्रता –

  • आखिल भारतीय सेवा के अधिकारी के लिए लाभ अखिल भारतीय सेवा सेवानिवृत्त नियमों के अन्तर्गत यह लाभ देय है
  • कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारी ।
  • ऐसे पेंशनभोगी, जो अधिवार्षिकी अथवा सेवानिवृत्त पेंशन पा रहे है, हुए है
  • ठेके पर अथवा प्रतिनियुक्ति पर लिए गए कर्मचारी ।

मृत्यु पर अर्जित अवकाश नगदीकरण उत्तराधिकारी –

  1. विधवा पत्नी (एक से अधिक जीवित विधवा पत्नी होने पर राशि दोनों में बराबर बाँट दी जायेगी)
  2. विधुर पति
  3. मृत कर्मचारी का ज्येष्ठ पुत्र यदि वह परिवार के साथ रहता हो |
  4. ज्येष्ठ अविवाहित पुत्री 
  5. मृत कर्मचारी पर आश्रित विधवा पुत्री (एक से अधिक होने पर बराबर  बाँट दी जायेगी)
  6. पिता
  7. माता ।

मृत्यु पर अर्जित अवकाश नगदीकरण की अधिकतम सीमा-

  • मृत्यु के दिन तक अवशेष जमा अर्जित अवकाश 
  • परन्तु 240 दिन से अधिक नहीं। 

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मृत्यु पर नगदीकरण स्वीकृति कर्ता सक्षम आधिकारी-

  • अवकाश स्वीकृत करने वाला अधिकारी ही, अवकाश नगदीकरण भुगतान के लिए सक्षम होगा।

अवकाश नगदीकरण की गणना का नियम-

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अवकाश नगदीकरण की गणना-

  • संपूर्ण सेवा अवधि के लिए प्रथमतः दो वर्ष के कालखण्ड पर 15 दिवस की दर से एवं शेष अवधि के लिए 7 दिवस प्रति वर्ष की दर से अर्जित अवकाश (समर्पित अवकाश) की पात्रता की गणना किया जाता है ।
  • पात्रता की गणना करते समय नगदीकरण मूल वेतन व महंगाई भत्ता जोड़कर किया जाता है।

मृत कर्मचारियों के अवकाश नगदीकरण की गणना-

  • यदि किसी शासकीय कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत हो जाता है, तब मृत्यु के दिनांक को उसके खाते में जमा अर्जित अवकाश (समर्पित अवकाश) के आधार पर नगदीकरण का गणना किया जाता है ।

अवकाश नगदीकरण में महंगाई भत्ते की गणना-

  • अवकाश की गणना में महँगाई भत्ताको  मूल वेतनमें जोड़कर अवकाश नगदीकरण की गणना किया जाता है।

 निलम्बित कर्मचारियों को अवकाश नगदीकरण की गणना-

  • ऐसे कर्मचारियों के अवकाश नगदीकरण की गणना उनके विरूद्ध प्रारम्भ विभागीय जाँच के मामले में निर्णय के बाद हो सकेगा।

अवकाश नगदीकरण की गणना = (अंतिम मूल वेतन + महगाई भत्ता) / 30 X समर्पित अवकाश के दिनों की संख्या

= 2,56,785 /30 X 240

= 20,54,280

अवकाश नगदीकरण की गणना-

  • 01 वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर 7 दिन अथवा 2 वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर 15 दिन के हिसाब से अर्जित अवकाश के नगदीकरण की गणना की जाति है| 
  • यदि किसी कर्मचारी का कुल अर्जित अवकाश 265 दिन है तो उसको 240 दिन अथवा उतने दिनों के अर्जित अवकाश का नगद भुगतान देय होगा जो सेवानिवृत्ति की तिथि को उसके अवकाश खाते में जमा हो । 
  • यदि किसी कर्मचारी का कुल अर्जित अवकाश 204 दिन जमा है, तो 204 दिन ही समर्पण की पात्रता है, एवं इससे कम अर्जित अवकाश जमा है तो उतने ही दिनों के अर्जित अवकाश का नगद भुगतान देय होगा।
  • अर्जित अवकाश 240 दिन से किसी भी स्थिति में ज़्यादा नहीं हो सकता ।

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