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शिक्षक दिवस के बारे में जानकारी

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शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) भारत में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म -दिवस के अवसर पर मनाया जाता है । यह दिवस केवल भारत में ही नहीं मनाया जाता है अपितु शिक्षक के प्रति आदर-भाव को प्रकट करने के लिए दुनिया के लगभग सभी देशों में अलग – अलग तिथि को मनाया जाता है ।

शिक्षक दिवस के बारे में जानकारी

  • अमेरिका में मई के पहले मंगलवार को ‘नेशनल टीचर्स डे’ मनाया जाता है । इसलिए वहाँ शिक्षक दिवस के लिए कोई निश्चित तारीख नहीं है।
  • चीन में शिक्षक दिवस 10 सितंबर को मनाया जाता है।
  • वेनेजुएला में 15 जनवरी
  • कोरिया में 15 मई
  • थाईलैंड में 16 जनवरी
  • ईरान में 2 मई
  • ताइवान में 28 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

गुरु-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा है। जीवन में माता-पिता का स्थान कभी कोई नहीं ले सकता, क्योंकि वे ही हमें इस रंगीन खूबसूरत दुनिया में लाते हैं। कहा जाता है कि जीवन के सबसे पहले गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। भारत में प्राचीन समय से ही गुरु व शिक्षक परंपरा चली आ रही है, लेकिन जीने का असली सलीका हमें शिक्षक ही सिखाते हैं। सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस के अवसर पर शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए पूरे भारत में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है। ‘गुरु’ का हर किसी के जीवन में बहुत महत्व होता है। समाज में भी उनका अपना एक विशिष्ट स्थान होता है। सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा में बहुत विश्वास रखते थे। वे एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। अपने जीवन के 40 वर्ष उन्होंने अध्यापन कार्य में व्यतीत किए , उन्हें अध्यापन से गहरा प्रेम था । एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण उनमें विद्यमान थे। इस दिन समस्त देश में भारत सरकार द्वारा श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है।

सादा जीवन बिताने वाले भारत रत्न से सम्मानित डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी में हुआ था । उन्होंने छात्र जीवन में आर्थिक सकटों का सामना करते हुए कभी हिम्मत नहीं हारी थी। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भाग्य से अधिक कर्म में विश्वास करते थे। वह दर्शनशास्त्र के अध्यापक थे। उन्होंन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया था। सन 1952 में वे देश के उपराष्ट्रपति चुने गए और दस वर्ष तक उपराष्ट्रपति के पद पर रहे। फिर 12 मई 1962 में वे भारत के राष्ट्रपति चुने गए । इसी दौरान चीन के आक्रमण के समय उन्होंने अदभुत धैर्य और साहस का परिचय दिया । डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को बच्चे विशेष प्रिय थे ।

स्वाधीन भारत के सामने जब उच्च शिक्षा की नवीन व्यवस्था की स्थापना का प्रश्न उठा तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद ने शिक्षा आयोग की नियुक्ति की योजना बनाई । उस समय शिक्षा आयोग का अध्यक्ष डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को ही बनाया गया। भारत के अलावा पश्चिमी देशों तक में भारतीय ज्ञान का प्रभुत्व स्थापित करने वाले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम श्रेष्ट शिक्षाशास्त्री के रूप में सदैव अमर रहेगा।

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