पदोन्नति संबंधी कोर्ट का निर्णय[Courts Decision Regarding Promotion]

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Courts Decision Regarding Promotion : वर्तमान में पदोन्नति के संबंध में हाईकोर्ट में स्टे लगा हुआ था जिसके कारण पदोन्नति की प्रक्रिया रुकी हुई थी । अब चूंकि 9 मार्च 2023 को कोर्ट का फ़ैसला आ चुका है। तो आइए जानते हैं कि कोर्ट में किन किन बिंदुओं पर याचिका दायर की गयी थी और उनके क्या निर्णय आए । इससे हमें पता चलेगा की प्रमोशन के संबंध में आगे हमें नियमों के बारे में पता चलेगा । बिन्दुवार सभी पहलुओं को जानेंगे और उससे हमारे प्रमोशन पर क्या प्रभाव पड़ेगा ।

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पदोन्नति संबंधी कोर्ट का निर्णय

[Courts Decision Regarding Promotion]

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भर्ती व पदोन्नत नियम 2019 पर याचिका-

  • Reference Point No.-10, 11

स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती व पदोन्नति नियम 2019 को चुनौती दी गई थी कि यह नियमों व संविधान के अनुसार नहीं है जिसे कोर्ट ने माना कि भर्ती व पदोन्नति नियम पूरी तरह से नियमों के आधार पर बनाया गया है इसलिए इस संबंध में दायर सभी याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया गया है । अतः सारी पदोन्नति इसी पार्टी हुआ पदोन्नति नियम 2019 के तहत होगी । जिसके चलते यह याचिका ख़ारिज कर दी गई । आप शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति 2019 का अध्ययन कर सकते हैं नीचे इसका पूरा विवरण दिया गया है ।

प्रधान पाठक 2010 द्वारा याचिका-

2010 में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा रायगढ़ और बलौदाबाजार ज़िले में सीमित भर्ती परीक्षा द्वारा प्राथमिक शाला प्रधान पाठक की नियुक्ति की गई थी । जिससे शिक्षाकर्मी प्रधान पाठक के रूप में नियुक्त हुये । वे 2010 से ही शिक्षा विभाग के नियमित कर्मचारी हो गये थे । उन्हीं प्रधान पाठकों द्वारा यह यह पिटीशन दायर किया गया था कि इस पदोन्नति से उनका नुकसान हो रहा है । क्योंकि उनकी सेवा विभाग में 2010 से और उनसे पहले LB संवर्ग के शिक्षक प्रमोट हो जायेंगे तो कोर्ट ने कहा कि उनका क़िस्सा भी प्रकार से कोई नुक़सान नहीं होगा क्योंकि शिक्षा विभाग के E-संवर्ग व LB-संवर्ग के लिये पदोन्नति के पदों का बँटवारा कर दिया गया है तो नियमित शिक्षकों के हिसाब से उन्हें पर्याप्त पद दिये गये हैं जिससे उनका नुक़सान नहीं होगा । जिसके चलते यह याचिका ख़ारिज कर दी गई ।

पूर्व सेवा अवधि की गणना पर याचिका-

कई शिक्षकों द्वारा पूर्व सेवा अवधि की गणना के संबंध में याचिका दायर किया गया था तो कोर्ट का कहना स्पष्ट है कि शिक्षाकर्मियों का संविलियन 2018 में शिक्षा विभाग में इन शर्तों के आधार पर किया गया कि पूर्व की सेवा का लाभ प्रमोशन या अन्य किसी लाभ के लिए नहीं कर सकते । इन नियमों और शर्तों को चुनौती देते हुए Artical 14 हुआ Artical-16 का उल्लंघन करना बताया गया जबकि यहाँ तो शुरु से ही शर्तों के साथ संविलियन किया गया था जो किसी नियम का उल्लंघन नहीं है। यह भी कहा गया कि प्रमोशन का मौक़ा आपका मौलिक अधिकार नहीं है । जिसके चलते यह याचिका ख़ारिज कर दी गई ।

कोटा के आधार प्रमोशन पर याचिका-

विभिन्न पदों पर प्रमोशन के लिये विभाग द्वारा कैडर के अनुसार पद निर्धारित किये गये हैं जिससे कि E-संवर्ग व LB-संवर्ग के समान मौक़ा मिले । तो इस याचिका पर कोर्ट द्वारा बताया गया कि पूरे राज्य में व्याख्याता व प्रधान पाठक के पदों के लिये व्याख्याता E संवर्ग के 27363 , व्याख्याता T संवर्ग के 18650 एवं मिडिल स्कूल हेडमास्टर E संवर्ग के 6365 मिडिल स्कूल हेडमास्टर T संवर्ग के 6084 पद पूरे राज्य में स्वीकृत हैं । जिसमें से 25% पदों को ही मिडिल स्कूल हेडमास्टर के लिये रखा गया है बाकि कि 75% व्याख्याता के लिये रखा गया है साथ ही भर्त व पदोन्नति नियम में हर पद के लिये अलग से पदों का निर्धारण कर दिया गया है जिससे किसी एक संवर्ग को नुक़सान न हो। जिसके चलते पदोन्नति नियम बिलकुल नियमों की अवहेलना नहीं है और यह भर्ती व पदोन्नति नियम 2019 के तहत सही है । जिसके चलते यह याचिका ख़ारिज कर दी गई ।

3 साल की सेवा अवधि पर याचिका-

कई शिक्षक द्वारा यह याचिका दायर की गयी थी कि 3 साल की सेवा अवधि प्रमोशन के लिये वैध नहीं है ये Artical 14 व Artical 16 का उल्लंघन है । अभी चुँकि 3 वर्ष की छुट शिक्षक/प्रधानपाठक(प्राथमिक)/व्याख्याता/प्रधानपाठक(मिडिल) के लिये ही वो भी इस शर्तें पर कि शिक्षा विभाग में इनके पर्याप्त पद ख़ाली हैं और उनके भरने पर बहुत से छात्रों को शिक्षक मिल जायेंगे जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी इसीलिए पाँच साल को घटाकर 3 साल की छुट देना सही फ़ैसला है। पूरे राज्य में E-संवर्ग के 87,669 पद ख़ाली हैं जब्कि E-संवर्ग में केवल 700 शिक्षक हैं तो इस कारण भी एक बार के लिये 5 वर्ष की सीमा को 3 वर्ष किया गया है । जिसके चलते यह याचिका ख़ारिज कर दी गई ।

व्याख्याता से प्राचार्य पद पर पदोन्नति में छुट देने पर याचिका-

  • Reference Point No.-27

वर्तमान में सहायक शिक्षक से शिक्षक, शिक्षक से व्याख्याता, सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक(प्रायमरी) एवं शिक्षक से प्रधान पाठक(मिडिल) में पदोन्नति के लिए तीन वर्ष की छूट दी गई है । तो कई शिक्षकों द्वारा यह याचिका दायर की गयी कि यह छुट व्याख्याता से प्राचार्य के लिए भी दिया जाए । रिक्त पदों के आधार पर छूट केवल एक बार के लिये इन्हीं पदों के लिए दिया गया है जिसके चलते इस याचिका को कोर्ट द्वारा ख़ारिज कर दिया गया ।

प्रधान पाठक कि सेवा अवधि पर याचिका-

  • Reference Point No.-28

कुछ शिक्षक सहायक शिक्षक से उच्च वर्ग शिक्षक बने वहाँ से वे मिडिल स्कूल प्रधान पाठक बने वहाँ से व्याख्याता बने तो उनके प्रधान पाठक की सेवा अवधि को जोड़ा जाये और उनकी पूर्व की सेवा को वरिष्ठता में शामिल किया जाये। इसी याचिका में आंशिक रुप से राहत दी गयी है और उनको वरिष्ठता का लाभ देने का फ़ैसला सुनाया गया ।

2020 संविलियन को भी मौक़ा देने पर याचिका-

  • Reference Point No.-28, 29

2020 संविलियन को भी मौक़ा देने को कहा गया उनके द्वारा भी इस पदोन्नति में शामिल करने की याचिका दायर की गयी थी । ज़िसे भी ख़ारिज कर दिया गया ।

प्रधान पाठक का प्राचार्य पद पर प्रमोशन पर याचिका-

  • Reference Point No.- 24, 25

व्याख्याता व प्रधान पाठक(मिडिल) से प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिये स्नातकोत्तर व प्रशिक्षित होना आवश्यक है । जिसके लिये मिडिल स्कूल के हेडमास्टर पात्र नहीं है । क्योंकि उनकी योग्यता प्राचार्य के लिये नहीं है। यदि वे केवल स्नातक व प्रशिक्षित हैं तो । साथ ही यह भी दलील दी गयी कि वो मिडिल स्कूल में सेवा देते हैं जब्कि व्याख्याता हाई व हायर सेकेण्डरी स्कूल में अध्यापन कराते हैं । पर ये भी ख़ारिज हो गया कि मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक भी पदोन्नति के लिये पात्र होंगे ।

निष्कर्ष-

  • सभी पदोन्नति भर्ती व पदोन्नति नियम 2019 के तहत होगी।
  • हमारी वरिष्ठता का निर्धारण 2018 से ही होगा ।
  • पूर्व सेवा की गणना नहीं की जायेगी ।
  • अभी केवल प्रधान पाठक(प्रायमरी), प्रधान पाठक(मिडिल), शिक्षक व व्याख्याता पर 3 साल की छुट रहेगी।

टीप-सारे नियम को कोर्ट के निर्णय के आधार पर बनाया गया है Edudepart.com इसकी शत प्रतिशत सत्यता की पुष्टि/दावा नहीं करता ।

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