SMC 2026-27 : शाला प्रबंधन समिति (SMC) और स्कूल डेवलपमेंट मैनेजमेंट कमिटी (SMDC) का काम विद्यालयों के विकास और संचालन में अहम होता है।
SMC 2026-27
भारत सरकार द्वारा जारी “Guideline for SMCs-2026” के अनुक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की नई दिशा-निर्देश जारी की गई है। जिसके अनुसार अब……
SMC 2026-27 के गठन में मुख्य बदलाव –
- विद्यालय प्रबंधन समिति(SMC) में प्रारंभिक विद्यालय से माध्यमिक विद्यालय (कक्षा १ ली से 12वीं तक) तक शामिल होगी ।
- विद्यालय प्रबंधन समिति(SMC) को विद्यालय प्रबंधन एवं विकास समिति (SMDC) की जगह लागू किया जा रहा है।
- विद्यालय प्रबंधन समिति में विद्यार्थियों के अभिभावक संरक्षक, स्थानीय प्राधिकरण का प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, विषय विशेषज्ञ, विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी और वंचित समूहों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- विद्यालय प्रबंधन समिति में सदस्यों की संख्या बच्चों के नामांकन के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
SMC 2026-27 में नामांकन सीमा-
| क्र. | शाला की दर्ज संख्या | SMC में सदस्यों की अनुमानित संख्या |
| 01. | 0-100 तक | 12-15 सदस्य |
| 02. | 100-500 तक | 15-20 सदस्य |
| 03. | 500 से अधिक | 20-25 सदस्य |
SMC सदस्यों के चयन के मापदंड –
- SMC की कुल सदस्य संख्या का 75 प्रतिशत बच्चों के अभिभावक या संरक्षक में से होना चाहिए।
- शेष 25 प्रतिशत सदस्य में….
- एक तिहाई सदस्य स्थानीय प्राधिकरण (नगर निगम/नगर परिषद/जिला परिषद्/नगर पंचायत/पंचायत) के निर्वाचित सदस्यों में से, जिन्हें स्थानीय प्राधिकरण द्वारा चुना जाएगा।
- एक तिहाई सदस्य विद्यालय के शिक्षकों में से, जिन्हें विद्यालय के शिक्षकों द्वारा चुना जाएगा।
- शेष एक तिहाई सदस्य स्थानीय शिक्षाविद्, विषय विशेषज्ञ, अकादमिक, वरिष्ठ एवं पूर्व विद्यार्थी समुदाय के अग्रिम कार्यकर्ता जैसे- आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता और सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) जो विद्यालय के आसपास कार्यरत हो में से चुने जाएंगे।
- इन सदस्यों का चयन समिति के अभिभावक प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा।
- प्रत्येक विद्यालय में शैक्षणिक वर्ष की शुरूआत के एक महीने के भीतर विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन करना अनिवार्य होगा।
- विद्यालय प्रबंधन समिति में कुल सदस्य संख्या का 50 प्रतिशत महिला सदस्य होना अनिवार्य है।
- सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEDGS) जैसे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग आदि तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के अभिभावकों/संरक्षकों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना होगा।
- SMC के गठन के पश्चात नई समिति की पहली बैठक अगले कार्यदिवस या अधिकतम एक सप्ताह के भीतर आयोजित की जा सकती है।
- पहली बैठक में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया जावेगा।
SMC समिति की संरचना –
| शाला प्रबंधन समिति (SMC) प्रपत्र | Open |
| क्र. | सदस्य का विवरण | पद |
| 01. | माता-पिता / अभिभावक (निर्वाचित सदस्य) | अध्यक्ष |
| 02. | माता-पिता / अभिभावक (निर्वाचित सदस्य) | उपाअध्यक्ष |
| 03. | प्राचार्य / प्रधानपाठक / विद्यालय प्रभारी | सदस्य सचिव |
| 04. | स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचित सदस्य | सदस्य |
| 05. | स्थानीय शिक्षाविद्, विषय विशेषज्ञ, अकादमिक, वरिष्ठ एवं पूर्व विद्यार्थी समुदाय के अग्रिम कार्यकर्ता | सदस्य |
| 06. | विद्यालय के शिक्षक | सदस्य |
| 07. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 08. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 09. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 10. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 11. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 12. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 13. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 14. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 15. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
| 16. | माता-पिता / अभिभावक | सदस्य |
100-500 तक दर्ज संख्या वाले स्कूलों के लिए 16 सदस्यी SMC का अनुमानित प्रारूप…
SMC की बैठक हेतु निर्देश –
- विद्यालय के प्रभावी संचालन हेतु नियमित बैठक अत्यंत आवश्यक है।
- प्रत्येक माह में कम से कम एक बैठक आयोजित किया जाना है।
- किसी भी निर्णय की वैधता के लिए समिति के न्यूनतम 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति (कोरम) आवश्यक होगी।
- सभी बैठकों की कार्यवाही विवरण का समुचित अभिलेखन किया जाएगा, जिसे समिति के सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विद्यालय के सूचना पटल पर अथवा उपलब्ध होने पर डिजिटल माध्यम से सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जा सकता है।
SMC का कार्यकाल –
- विद्यालय प्रबंधन समिति का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा।
- समिति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी तब तक जारी रह सकती है जब तक नई समिति का गठन नहीं हो जाता।
- नई समिति के गठन की प्रक्रिया समिति के कार्यकाल समाप्त होने से पहले आरंभ करना उपयुक्त होगा।
- किसी भी सदस्य को एक और कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन एक सदस्य लगातार दो कार्यकाल से अधिक कार्य नहीं कर सकता, सिवाय सदस्य सचिव के।
SMC सदस्य के कार्यकाल की समाप्ति –
- यदि अभिभावक/संरक्षक सदस्य के बच्चे ने विद्यालय छोड़ दिया हो।
- किसी सदस्य का किसी आपराधिक आरोप या अन्य कारण से दोषसिद्धि/सजा होना हो।
- सदस्य का ब्लॉक/जिले से प्रवासन हो गया हो।
- सदस्य का आकस्मिक निधन हो गया हो।
- यदि कोई सदस्य लगातार चार बैठकों में बिना सूचना अनुपस्थित हो ।
SMC की भूमिका एवं कार्य –
- विद्यालय संचालन की प्रभावशीलता सुनिश्चित करना।
- शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना।
- सभी विद्यार्थियों के लिए नामांकन, निरंतर उपस्थिति और समावेशी शिक्षण अवसर सुनिश्चित करना।
- ड्रॉप आउट और विद्यालय से बाहर बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए नामांकन अभियान चलाना।
- विद्यार्थी के अधिकारों का समय पर वितरण सुनिश्चित करना।
- अभिभावक शिक्षक बैठक (PTM) में सहयोग।
- विभिन्न शैक्षणिक योजना का क्रियान्वयन व समर्थन करना।
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN) लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग करना।
- सुचारू प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) संचालन एवं स्वास्थ्य पहल की निगरानी करना।
- सामुदायिक सहभागिता एवं संसाधन संकलनकरना।
- विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एंव कल्याण सुनिश्चित करना।
- विद्यालय द्वारा तीन वर्षीय विद्यालय विकास योजना (SDP) तैयार करना।
- शाला अनुदान की राशि का सही मैड में व्यय की जानकारी रखना।
- शाला में प्रार्थना एवं अन्य सामुहिक गतिविधियां समय पर संचालित होने की जानकारी रखना।
- शाला अनुदान की राशि से शौचालय को क्रियाशील बनाये रखना।
- शाला में विशेषतः विद्युत, पंखा एवं लाईट की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
SMC द्वारा निर्माण/मरम्मत संबंधी वित्तीय प्रबंधन एवं सामाजिक लेखा परीक्षणः –
- अब 01 लाख तक की लागत वाले सभी निर्माण/मरम्मत कार्य अन्य एजेंसी के अलावा SMC द्वारा निष्पादित किए जा सकेंगे।
- इस प्रक्रिया में पारदर्शी योजना निर्माण, क्रय (Procurement) एवं कार्यान्वयन सुनिश्चित करते हुए सदस्य सचिव द्वारा लेखा अभिलेख संधारित किए जा सकेंगे।
- बजट उपलब्धता के अनुसार विद्यालय के संचालन हेतु आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए सामग्री का क्रय, छ.ग. भंडार क्रय नियम व राज्य शासन के निर्देशों/नियमों का पालन करते हुए किए जा सकेंगे।
- निर्माण/मरम्मत कार्यों की प्रकृति राशि रू. 01 लाख तक के लागत वाले निर्माण/मरम्मत कार्य जैसे-बालक/बालिका शौचालय निर्माण/मरम्मत, लघु मरम्मत, पेयजल, रैंप, बिजली कार्य (आंतरिक एवं बाह्य) आदि विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा भी किए जा सकेंगे।
- निर्माण/मरम्मत कार्य हेतु SRLM (राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) से प्रशिक्षित मिस्त्री/प्लंबर/इलेक्ट्रिशियन टाईल्स फीटर/श्रम विभाग से पंजीकृत कुशल श्रमिक/व्यावसायिक शिक्षण पाठ्यक्रम अंतर्गत प्रशिक्षित छ.ग. राज्य कौशल विकास प्राधिकरण द्वारा प्रशिक्षित व्यक्ति को प्राथमिकता देवें।
- तकनीकी मूल्यांकन कार्यों को मूल्यांकन ग्राम पंचायत के उपयंत्री जी-राम-जी योजना के तकनीकी सहायक / RES के अभियंता या जिला कलेक्टर द्वारा नामांकित शासकीय अभियंता से कराया जा सकेगा।
- भुगतान की प्रक्रिया – कार्यों का नियमानुसार मूल्यांकन उपरांत ही देयकों का अंतिमभुगतान किया जा सकेगा।
- दर निर्धारण – राज्य एवं जिला स्तर के विभिन्न निर्माण एजेंसी द्वारा निर्धारित किए गए न्यूनतम मूल्य दर (SOR) पर कार्य कराया जा सकेगा।
- निर्माण/मरम्मत संबंधी अन्य दिशा-निर्देश भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी नियमों/निर्देशों के अनुरूप रहेंगे।
- नियमों में त्रुटि एवं वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही किया जा सकेगा।
- मॉनिटरिंग समिति – उक्त निर्माण/मरम्मत कार्य के सुचारू संपादन, पारदर्शिता एवं गुणवत्ता नियंत्रण हेतु निम्नानुसार निरीक्षण समिति का गठन किया जा सकेगा।
- समिति द्वारा कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग की जावे एवं यथा आवश्यक कार्यवाही करते हुए नियमों का परिपालन एवं कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित किया जा सकेगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जिला मॉनिटरिंग समिति…..
- अध्यक्ष-जिला कलेक्टर,
- सदस्य-1. मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत/जनपद पंचायत),
- सदस्य-2. जिला शिक्षा अधिकारी,
- सदस्य-3. ग्रामीण यांत्रिकी सेवा-कार्यपालन यंत्री/संबंधित तकनीकी विभाग,
- सदस्य-4. जिला मिशन समन्वयक।
- शहरी क्षेत्रों के लिए जिला मॉनिटरिंग समिति…..
- अध्यक्ष – जिला कलेक्टर,
- सदस्य-1. आयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (नगर निगम नगर पालिका नगर पंचायत),
- सदस्य-2. जिला शिक्षा अधिकारी,
- सदस्य-3. ग्रामीण यांत्रिकी सेवा कार्यपालन यंत्री संबंधित तकनीकी विभाग,
- सदस्य-4. जिला मिशन समन्वयक ।
SMC SMDC शाला प्रबंधन समिति एवं विकास समिति के कार्य
SMC SMDC शाला प्रबंधन समिति एवं विकास समिति बैठक निर्देश
- शाला प्रबंधन एवं विकास समिति 2025-26 की बैठक निर्देश
- शाला प्रबंधन एवं विकास समिति 2024-25 की बैठक निर्देश
- शाला प्रबंधन एवं विकास समिति 2023-24 की बैठक निर्देश
SMC SMDC शाला प्रबंधन समिति एवं विकास समिति
- शाला प्रबंधन समिति मद 2025-26 राशि का उपयोग निर्देश।
- शाला प्रबंधन समिति मद 2024-25 राशि का उपयोग निर्देश।
- शाला प्रबंधन समिति मद 2023-24 राशि का उपयोग निर्देश।
- शाला प्रबंधन समिति मद 2023-24 राशि का उपयोग निर्देश।

SMC : जानिए शाला प्रबंधन समिति की संरचना, मुख्य कार्य, भूमिका और शिक्षा क्षेत्र में इसके महत्व के बारे में। शाला प्रबंधन समिति का उद्देश्य विद्यालयों के समुचित प्रबंधन और गुणवत्ता सुधार में सहभागिता को बढ़ाना है।
पोस्ट विवरण
शाला प्रबंधन समिति क्या है ?
शाला प्रबंधन समिति का गठन [School Management Committee]
शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के अनुभाग 21 में शाला प्रबंधन समिति का गठन सभी सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में अनिवार्य किया गया है।
समिति का हिस्सा कौन होते हैं ?
स्कूल प्रबंधन समिति में स्कूल के हेडमास्टर, अध्यापक, बच्चों के माता-पिता और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी होते हैं, जो स्कूल की योजना बनाने का और स्कूल के कार्यों और गतिविधियों पर निगरानी रखते हैं।
यह प्रावधान कब और कैसे लागू हुआ ?
निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा अधिनियम अंतर्गत 6 से 14 आयु वर्ग आयु के समस्त बच्चों के लिए शाला प्रबंधन समिति का गठन किया जाना है । निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में शाला प्रबंधन समिति का गठन निःशुल्क बाल शिक्षा अधिनियम 2009 अंतर्गत बनाये गये नियम 2010 के नियम 3 के अनुसार किया जाना है।
| शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 | Click Here |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 | Click Here |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 | Click Here |
स्कूल प्रबंधन समिति के उद्देश्य-
- बच्चों के लिए निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 के लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना।
- प्रारंभिक शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा निति द्वारा निर्धारित उपलब्ध नामांकन ठहराव एवं शैक्षणिक उपलब्धि के लक्ष्यों प्राप्ति सुनिश्चित करना।
- स्कूल प्रबंधन समिति में अभिभावकों व शिक्षकों की भागीदारी को सशक्त करना।
- सरकार व अन्य स्त्रोतों से प्राप्त स्कूल अनुदानों, सुविधाओं के उपयोग के निर्णय कार्यान्वयन व् अनुश्रवण हेतु अभिभावक शिक्षक समुदाय को सशक्त करना।
- विद्यार्थियों के शैक्षणिक उपलब्धि स्तर में सुधार हेतु सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना।
- स्कूल विकास एवं प्रबंधन हेतु सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करते हुए समुदाय को स्कूल गतिविधियों से परिचित करवाना।
शाला प्रबंधन समिति का गठन कैसे करें ?
- SMC का गठन ढाई साल के लिये होता है ।
- जब्कि SMC का पुनर्गठन प्रतिवर्ष करना है।
- SMC का सत्र में 10 बैठक होना होता है।
- SMC के सदस्य 3 बैठक में शामिल नहीं होने पर उसके जगह दूसरे सक्रिय सदस्य को SMC का सदस्य बनाया जा सकता है।
- SMC के 3 अनिवार्य बैठक होना ही है।
| शाला प्रबंधन समिति गठन संबंधी दिशा निर्देश | Click Here |

शाला प्रबंधन समिति (SMC) की संरचना –
- शाला प्रबंधन समिति का गठन निम्नानुसार होगा :-
शाला प्रबंधन समिति में सदस्यों की संख्या – कुल 16 सदस्य होंगे, जो निम्नानुसार प्रवर्ग के होंगे :-
- अध्यक्ष – 01 ( माता-पिता / पालक सदस्यों में से 1 निर्वाचित सदस्य / शासन द्वारा समय समय पर जारी निर्देशानुसार मनोनित सदस्य)
- उपाध्यक्ष – 01 ( माता-पिता / पालक सदस्यों में से 1 निर्वाचित )
- संयोजक – विद्यालय का प्रधान पाठक / प्रभारी प्रधान पाठक (पदेन)
- कोषाध्यक्ष – विद्यालय का वरिष्ठ शिक्षक (पदेन)
- समिति के 75 प्रतिशत सदस्य अर्थात् 12 सदस्य बच्चों के माता-पिता या पालक होंगे।
समिति के शेष 25 प्रतिशत सदस्यों का चयन निम्नानुसार किया जायेगा :-
- 25 प्रतिशत अर्थात् 4 का एक तिहाई अर्थात् 1 सदस्य विद्यालय के अध्यापकों में से होगा। जिसका चयन विद्यालय के अध्यापकों द्वारा किया जायेगा। (SMC के पदेन कोषाध्यक्ष)
- 25 प्रतिशत अर्थात् 4 का एक तिहाई सदस्य अर्थात् 1 सदस्य स्थानीय प्राधिकरण (पंचायत/नगरीय संस्था) के निर्वाचित सदस्यों में से होगा। जिसका चयन स्थानीय प्राधिकरण द्वारा किया जायेगा।
- 25 प्रतिशत अर्थात् 4 का एक तिहाई अर्थात् 1 सदस्य स्थानीय शिक्षाविदो/विद्यालय के बालकों में से होगा। जिसका चयन समिति में माता-पिता/पालकों द्वारा किया जायेगा।
टीप :- शाला प्रबंध समिति में उपरोक्तानुसार 16 सदस्यों में से 50 प्रतिशत अर्थात् 8 पदों पर महिला सदस्य होंगी।
शाला प्रबंधन समिति (SMC) की बैठक –
- शाला प्रबंधन समिति माह में कम से कम 1 बार व सत्र में 10 बार अपनी बैठक करेगी और बैठकों के कार्यवृत्त तथा विनिश्चिय समुचित रूप से तय करेगी|
- कोरम – बैठक हेतु पालक सदस्यों में से एक तिहाई सदस्य अर्थात् 4 तथा चयनित सदस्यों में से कम से कम 1 सदस्य की उपस्थिति आवश्यक होगा।
शाला प्रबंधन समिति (SMC) का कार्यकाल – समिति का गठन ढाई साल के लिये होता है। तत्पश्चात समिति का पुनर्गठन प्रतिवर्ष किया जाना है|
शाला प्रबंधन समिति (SMC) पद से मुक्ति –
- कोई भी सदस्य, सदस्य संयोजक को त्यागपत्र देकर अपनी सदस्यता समाप्त कर सकेगा।
- बिना पर्याप्त कारण के लगातार 3 बैठकों में अनुपस्थित रहने से सदस्यता समाप्त हो जायेगी। इसकी सूचना सदस्य संयोजक द्वारा दी जायेगी।
- पालक सदस्य की सभी संतानों/पाल्यों के स्कूल छोड़ देने पर अथवा लगातार 1 माह अनुपस्थित रहने पर उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी, इसकी सूचना सदस्य संयोजक द्वारा दी जायेगी। बच्चों की शारीरिक अस्वस्थता में यह शिथिलनीय होगा।
- किसी भी सदस्य की सदस्याता समाप्त होने पर शेष पालक सदस्यों द्वारा उसी प्रकार के सदस्य का चयन किया जायेगा, जिस प्रकार के सदस्य की सदस्यता की समाप्त हुई हो।
सक्रिय SMC हेतु सुझाव बिंदु:-
- SMC का गठन समिति की प्रक्रिया SMC के अनुरूप हो|
- SMC के सदस्यों को अपने अधिकार व कर्तव्य का बोध हो।
- शाला अनुदान व SDP में सक्रिय भागीदारी हो।
- SMC के सदस्यों द्वारा शाला कार्यो में भागीदारी, कार्यविभाजन व नियमित निगरीन हो।
- SMC सदस्यों को विविध कार्यों के लिये शाला कार्यक्रम में सम्मानित किया जाये|
- समिति के महिला व पुरुष सदस्यों को समान अवसर दिया जाये।
- सभी सदस्यों के सिखने में विशेष दक्षता का उपयोग करना।
- शाला के बेहतरी के लिए स्वयं के नियम बनाकर उस पर अमल किया जाये ।

