बच्चों के कक्षावार दर्ज आयु सीमा व उनके शिक्षा के अधिकार

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बच्चों के स्कूल में दाखिला करने की जिम्मेदारी केवल शिक्षक व पालक की नहीं अपितु समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है। SMC की भूमिका बच्चों के नामांकन में महत्वपूर्ण रहता है। इस पोस्ट में हम बच्चों के कक्षावार दर्ज आयु सीमा व उनके शिक्षा के अधिकार के बारे में जानेंगे।

बच्चों के कक्षावार दर्ज आयु सीमा व उनके शिक्षा के अधिकार

शिक्षा सभी बच्चों का प्राथमिक व मूलभूत अधिकार है अतः स्कूल में बच्चों के नामांकन होना जरुरी है । बिना शिक्षा के बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता है। शिक्षित व सभ्य होने के लिए बच्चों को स्कूल में दाखिला लेना अनिवार्य है। इसीलिए 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार मिला हुआ है ।

शाला-प्रवेशोत्सव
शाला प्रवेश उत्सव 2024-25
शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009Click Here
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020Click Here
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019Click Here

शैक्षिक सत्र 2024-25 में प्रवेश हेतु आयु सीमा-

कक्षाकक्षा हेतु
आयु वर्ग
जन्मतिथि
समयान्तराल
बालवाड़ी5 से 6 वर्ष02-04-2018 से
01-04-2019
कक्षा-16 से 7 वर्ष02-04-2017 से
01-04-2018
कक्षा-27 से 8 वर्ष02-04-2016 से
01-04-2017
कक्षा-38 से 9 वर्ष02-04-2015 से
01-04-2016
कक्षा-49 से 10 वर्ष02-04-2014 से
01-04-2015
कक्षा-510 से 11 वर्ष02-04-2013 से
01-04-2014
कक्षा-611 से 12 वर्ष02-04-2012 से
01-04-2013
कक्षा-712 से 13 वर्ष02-04-2011 से
01-04-2012
कक्षा-813 से 14 वर्ष02-04-2010 से
01-04-2011

टीप:-उपरोक्त चार्ट में कक्षा में भर्ती होने कि तिथि का निर्धारण विभाग के किसी आदेशानुसार नहीं किया गया, किन्तु शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के नियमों के आधार पर शिक्षको की सहायता हेतु बनाया गया है। पंजीकरण व प्रवेश प्रक्रिया शिक्षक अपनी सुविधा अनुसार कर सकते है।

शाला प्रवेश उत्सव

विद्यालय में तीन उत्सव बहुत महत्वपूर्ण हैं। पहला स्वतंत्रता दिवस, दूसरा गणतंत्र दिवस और तीसरा प्रवेश उत्सव । प्रवेश उत्सव मनाने का समय है 16 जून से 15 जुलाई तक। जब बच्चे पहली बार स्कूल आते हैं। उस समय उनके मन में असीम खुशियों, आकांक्षाएँ एवं भविष्य के लिए सपने छुपे रहते हैं। चाहे वह प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक माध्यमिक या कालेज स्तर के क्यों न हों अपार उत्साह रहता है।

निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार के मुख्य बिन्दु-

  1. प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार – 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को उसकी प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक किसी आस-पास के विद्यालय में निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार होगा । [अध्याय2]
  2. नि:शुल्क शिक्षा – प्रारंभिक शिक्षा के लिए किसी प्रकार की फीस नहीं लिया जायेगा। [अध्याय4]
  3. आयु अनुसार प्रवेश – 6 से 14 वर्ष से अधिक की आयु के सभी बच्चों को किसी विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया गया है या उसने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं की है, तो उसे उसकी आयु के अनुसार समुचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा।[अध्याय4]
  4. दस्तावेज की आवश्यकता नहीं – शिक्षा में प्रवेश के प्रयोजनों के लिए किसी बच्चे की आयु, जन्म, मृत्यु और परंतु किसी बालक को प्रवेश से इंकार नहीं किया जाएगा। [अध्याय2]
  5. विशेष प्रशिक्षण – उन सभी बच्चों को उसकी आयु के अनुसार समुचित कक्षा में सीधे प्रवेश दिया जाता है, तों उसे अन्य बालकों के समान होने के लिए उसे विशेष प्रशिक्षण(उपचारात्मक शिक्षण) प्राप्त करने का अधिकार होगा। [अध्याय4]
  6. गुणवत्तायुक्त शिक्षा का अधिकार – देश के सभी वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों को अच्छी गुणवत्ता सहित प्राथमिक शिक्षा लेना का अधिकार होगा।[अध्याय4]
  7. स्थानांतरण का अधिकार – जहां किसी विद्यालय में, प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने की व्यवस्था नहीं है वहां किसी बालक को विद्यालय को छोड़कर, अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के लिए किसी अन्य विद्यालय में स्थानांतरण कराने का अधिकार होगा।[अध्याय4]
  8. स्थानांतरण कराने का अधिकार – जहां किसी बालक से किसी राज्य के भीतर या बाहर किसी भी कारण से एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में जाने की अपेक्षा की जाती है, वहां ऐसे बालक को विद्यालय को छोड़कर,अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के लिए किसी अन्य विद्यालय में, स्थानांतरण कराने का अधिकार होगा। [अध्याय4]
  9. स्थानांतरण के लिये नहीं रोका जायेगा – बच्च को अन्य विद्यालय में प्रवेश लेने के लिए उस विद्यालय का प्रधान अध्यापक नहीं रोकेगा उसे उसकी इच्छा अनुसार कहीं भी शिक्षा लेने का अधिकार होगा [अध्याय4]
  10. रोकने और निष्कासन का प्रतिषेध – किसी विद्यालय में प्रवेश प्राप्त बालक को किसी कक्षा में नहीं रोका जाएगा [अध्याय4]
  11. प्रवेश से इंकार न किया जाना – किसी बालक को, शैक्षणिक वर्ष के प्रारंभ पर या सत्र के बीच में कभी भी किसी भी विद्यालय में प्रवेश दिया जायेगा और बच्चा अपना अध्ययन पूरा करेगा।[अध्याय4]
  12. शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का प्रतिषेध – बालक के शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न का प्रतिषेध किसी बालक को शारीरिक दंड नहीं दिया जाएगा या उसका मानसिक उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।[अध्याय4]
  13. पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रक्रिया – प्रारंभिक शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम और उसकी मूल्यांकन प्रक्रिया समुचित सरकार द्वारा, निर्मित किया जायेगा। [अध्याय5]
  14. बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता नहीं- बच्चे का भय, मानसिक अभिघात और चिन्तामुक्त बिना बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन करना होगा। [अध्याय5]
  15. पूर्णता प्रमाण पत्र – प्रत्येक बच्चे को, जिसने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर ली है, को प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने का एक प्रमाणपत्र दिया जाएगा ।[अध्याय5]

नामांकन को लेकर हमारा उद्देश्य

  • 6 से 14 आयु समूह के सभी बच्चों का सर्वे करके चिह्नांकन करना।
  • नामांकन में आने वाली परेशानियों की पहचान करना।
  • जो बच्चे किसी भी कारण से विद्यालय नहीं आ रहे हैं, उन्हें उनकी आयु के अनुसार कक्षा में दाखिल करवाने हेतु SMC द्वारा पहल करना।

नामांकन में SMC की भूमिका

  • 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को शासकीय शालाओं में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रवेश कराना।
  • शासकीय या स्थानीय पदाधिकारी (ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, जनपद पंचायत, नगर निगम, जिला पंचायत) द्वारा सहायता प्राप्त शालाओं में निःशुल्क प्रवेश दिलाना है।
  • 6 से 14 वर्ष के बच्चों का (जिसमें किसी प्रकार की निशक्ता वाले बच्चे भी सम्मिलित है) सर्वे में सहयोग प्रदान करना।
  • किसी निजी शाला के कक्षा 1 में आस-पास के कमजोर अलाभित समूह के 25 प्रतिशत तक प्रवेश दिलाने में सहयोग कर सकता है।
  • कमजोर व अलाभित बच्चों को निजी शाला में प्रवेश लेने पर प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक शाला से बाहर नहीं किया जाएगा।
  • यदि कोई निजी शाला प्राथमिक पूर्व शिक्षा से प्रारंभ करता है, तो उस शाला में भी 25 प्रतिशत प्रवेश की शर्ते लागू होगी।
  • यदि किसी निजी शाला में 25 प्रतिशत प्रवेश की सीटें भरी हो तो वहा पर पुनः 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश दिलाने की बाध्यता नहीं होगी।
  • नामांकन से संबंधित जानकारी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा मांगे जाने पर अशासकीय संस्थाएं अनिवार्यतः देगी।
  • प्रवेश के समय कोई भी शाला या व्यक्ति किसी भी प्रकार की फीस नहीं लेगा।
  • यदि कोई शाला, व्यक्ति फीस प्राप्त करता है, तो RTE अधिनियम के अन्तर्गत (प्रति व्यक्ति फीस का 10 गुणा) अर्थदण्ड का प्रावधान है।
  • किसी बालक को अनुवीक्षण प्रकिया के अधीन रखने पर (उल्लंघन करने पर) कार्रवाई करने का प्रावधान है।
  • आंगन बाड़ी के बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश करवाना।
  • किन्ही भी कारणों से 6 से 14 आयु समूह के प्रवेश से छूटे बच्चों को प्रवेश देना ही होगा।
  • अप्रवेशी बच्चों की जानकारी रखना।
  • अप्रवेशी होने के कारणों की जानकारी रखना।

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