राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छत्तीसगढ़ के स्कूलों के लिए सत्र 2026-27 से नया शैक्षणिक ढांचा लागू किया गया है। पुराने ’10+2′ के फॉर्मूले को बदलकर अब ‘5+3+3+4’ का नया स्ट्रक्चर तैयार किया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, स्कूली शिक्षा को चार मुख्य स्तरों (Stages) में बांटा गया है।
आइए इन चारों स्तरों, बच्चों की आयु और पाठ्यक्रम के बदलावों को विस्तार से समझते हैं:
1. मूलभूत स्तर (Foundational Stage) — 5 वर्ष
यह स्कूली शिक्षा का सबसे पहला और बुनियादी आधार है। इसे कुल 5 वर्षों के लिए तैयार किया गया है, जिसमें शुरुआती खेल-कूद और गतिविधि आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है। इसे दो भागों में बांटा गया है:

- बालवाड़ी (Ages 5-6): इसमें 5 से 6 वर्ष तक के बच्चे शामिल होंगे। यह आंगनवाड़ी या प्री-स्कूल के साथ समन्वय स्थापित कर संचालित होगा।
- कक्षा 1 और 2 (Ages 6-8): इसमें 6 से 8 वर्ष तक के बच्चे आएंगे।
- मुख्य बातें: इस स्तर पर बच्चों के लिए ‘जादुई पिटारा’ और खिलौना निर्माण जैसी खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। इसके अलावा, पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए शुरुआती 3 महीनों का ‘स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम’ चलाया जाएगा ताकि वे स्कूल के माहौल में आसानी से ढल सकें।
2. प्रारंभिक स्तर (Preparatory Stage) — 3 वर्ष
मूलभूत स्तर को पार करने के बाद बच्चे इस चरण में प्रवेश करते हैं। यह चरण 3 वर्षों का है।

- कक्षाएं: कक्षा 3, 4 और 5 शामिल हैं।
- आयु वर्ग: 8 से 11 वर्ष के बच्चे।
- मुख्य बातें: इस स्तर से बच्चों को औपचारिक रूप से विषयों (जैसे गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और कला) से परिचित कराया जाता है। छत्तीसगढ़ के नए कैलेंडर के अनुसार, कक्षा 3 और 4 में कला शिक्षा (बांसुरी वादन) और शारीरिक शिक्षा व आरोग्य (खेल योग) जैसे नए विषयों को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। इसके लिए साल भर में लगभग 100-100 घंटे निर्धारित किए गए हैं। साथ ही कंप्यूटर शिक्षा के लिए ICT और लाइब्रेरी पीरियड भी अनिवार्य किया गया है।
3. मध्य स्तर (Middle Stage) — 3 वर्ष
यह स्कूली शिक्षा का तीसरा चरण है, जो बच्चों के मानसिक और कौशल विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह भी 3 वर्षों का होता है।

- कक्षाएं: कक्षा 6, 7 और 8 शामिल हैं।
- आयु वर्ग: 11 to 14 वर्ष के बच्चे।
- मुख्य बातें: इस स्तर पर पारंपरिक विषयों के साथ-साथ कौशल बोध (व्यावसायिक/स्किल शिक्षा) को जोड़ा गया है, जिसके लिए पूरे सत्र में 110 घंटे तय किए गए हैं। कक्षा 6 और 7 के लिए कला शिक्षा (कृति-1) और शारीरिक शिक्षा (खेल यात्रा) जैसे पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं। इसी स्तर पर बच्चों के लिए 10 बैगलेस शनिवार (10 Bagless Saturdays) निर्धारित हैं, जिसके तहत उन्हें किताबी ज्ञान से दूर व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए बैंक, डेयरी फार्म, मोटर गैराज या स्थानीय कुटीर उद्योगों का भ्रमण कराया जाएगा।
4. माध्यमिक स्तर (Secondary Stage) — 4 वर्ष
यह स्कूली शिक्षा का अंतिम और सबसे गंभीर चरण है, जिसे कुल 4 वर्षों में विभाजित किया गया है।

- कक्षाएं: कक्षा 9, 10, 11 और 12 शामिल हैं।
- आयु वर्ग: 14 से 18 वर्ष के किशोर/युवा।
- मुख्य बातें: इस चरण में विषयों का गहन अध्ययन, आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और करियर निर्माण पर ध्यान दिया जाता है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) और NCERT की किताबों के समन्वय से पढ़ाई होगी। व्यावसायिक शिक्षा वाले स्कूलों में अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship) की व्यवस्था की गई है। साथ ही कक्षा 11वीं और 12वीं के कृषि व वाणिज्य जैसे संकायों के लिए व्यावहारिक प्रोजेक्ट, रिसर्च और सर्वे के विशेष नियम बनाए गए हैं। शनिवार के दिन इन बच्चों के लिए गाइडेंस एंड काउंसलिंग (Guidance & Counselling) सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि वे सही करियर चुन सकें।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू किया गया यह नया ‘5+3+3+4’ का स्ट्रक्चर रटने की पद्धति को खत्म कर बच्चों के 360-डिग्री होलिस्टिक प्रोग्रेस (सर्वांगीण विकास) पर केंद्रित है। इसमें हर शनिवार को ‘गतिविधि दिवस’ मनाकर बच्चों को तनाव-मुक्त माहौल में हुनरमंद बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

