छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी नए विस्तृत दिशा-निर्देशों में बच्चों के बौद्धिक और डिजिटल विकास को एक नया आयाम दिया गया है。 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत आधुनिक कौशलों को बढ़ावा देने के लिए अब प्रदेश के सभी शासकीय प्राथमिक और मिडिल स्कूलों (कक्षा 3वीं से 8वीं) की मुख्य समय सारणी (Time Table) में ‘ICT (कंप्यूटर शिक्षा)’ और ‘लाइब्रेरी (पुस्तकालय) पीरियड’ को अनिवार्य रूप से शामिल कर दिया गया है。

अब तक कई स्कूलों में ये कालखंड (Periods) केवल व्यवस्था के अनुसार या वैकल्पिक तौर पर चलते थे, लेकिन नए नियमों के मुताबिक अब हर हफ्ते इनके लिए विशेष घंटे तय कर दिए गए हैं। आइए शिक्षक साथियों और पाठकों के लिए इस नई व्यवस्था के नियमों और उद्देश्यों को विस्तार से समझते हैं:
1. नई समय सारणी (Time Table) का ढांचा
नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, कक्षा 3 से 5 (प्राथमिक) और कक्षा 6 से 8 (मिडिल) के विद्यार्थियों के लिए हर सप्ताह की नियमित समय सारणी में इन दोनों कालखंडों को जगह देना अनिवार्य है:
- ICT / कंप्यूटर कालखंड: प्रति सप्ताह न्यूनतम 1 कालखंड अनिवार्य।
- लाइब्रेरी / पुस्तकालय कालखंड: प्रति सप्ताह न्यूनतम 1 कालखंड अनिवार्य।
2. ICT पीरियड अनिवार्य करने का उद्देश्य (Digital Literacy)
आज का युग डिजिटल युग है, और ग्रामीण व दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी तकनीक में अव्वल बनाना इस पहल का मुख्य लक्ष्य है:
- बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान: कक्षा 3वीं से ही बच्चों को कंप्यूटर चालू-बंद करने, माउस और कीबोर्ड के उपयोग जैसे बेसिक इनपुट-आउटपुट की समझ दी जाएगी।
- सॉफ्टवेयर और टूल्स: मिडिल स्कूल (कक्षा 6वीं से 8वीं) के स्तर पर बच्चों को एमएस वर्ड (MS Word), एक्सेल (Excel) और पेंट जैसे जरूरी टूल्स का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा।
- सुरक्षित इंटरनेट उपयोग: बच्चों को साइबर सुरक्षा, इंटरनेट पर जानकारी खोजने (Searching) और शैक्षिक ऐप्स के उपयोग के बारे में जागरूक किया जाएगा।
3. लाइब्रेरी पीरियड: किताबों से दोस्ती और पढ़ने की आदत (Reading Habit)
डिजिटल स्क्रीन के इस दौर में बच्चों का किताबों से नाता न टूटे, इसके लिए लाइब्रेरी पीरियड को अनिवार्य किया गया है:
- स्वतंत्र पठन (Independent Reading): इस विशेष कालखंड में बच्चे अपनी पसंद की कॉमिक्स, पंचतंत्र की कहानियां, महान व्यक्तित्वों की जीवनियां या ज्ञानवर्धक पत्रिकाएं खुद चुनकर पढ़ेंगे।
- भाषाई सुधार: नियमित रूप से किताबें पढ़ने से बच्चों के शब्दकोश (Vocabulary) में वृद्धि होगी और उनकी शुद्ध उच्चारण व पढ़ने की गति में सुधार होगा।
- पुस्तकालय प्रबंधन: बच्चों को किताबें जारी (Issue) कराने, उनकी देखभाल करने और पुस्तकालय के नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी, जिससे उनमें नागरिक चेतना विकसित हो।
4. शनिवार ‘गतिविधि दिवस’ (Bagless Saturday) के साथ समन्वय
हर शनिवार को मनाए जाने वाले ‘गतिविधि दिवस’ (Activity Day) में इन दोनों कालखंडों का उपयोग बेहद रचनात्मक तरीके से किया जा सकता है:
- लाइब्रेरी एक्टिविटी: शनिवार को शिक्षक ‘कहानी वाचन’ (Storytelling), पुस्तक समीक्षा (Book Review) या पढ़ी गई कहानी पर आधारित नाटक/अभिनय (Role Play) जैसी गतिविधियां आयोजित करा सकते हैं।
- ICT एक्टिविटी: कंप्यूटर लैब में बच्चे डिजिटल पेंटिंग प्रतियोगिता, बेसिक कोडिंग गेम्स या शैक्षिक क्विज़ (Quiz) में भाग ले सकते हैं।
5. मूल्यांकन और होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) में जुड़ाव
पारंपरिक विषयों की तरह इनका कोई लिखित पेन-पेपर टेस्ट नहीं होगा।
- शिक्षक यह देखेंगे कि लाइब्रेरी पीरियड में बच्चे की पढ़ने में रुचि कैसी है और ICT पीरियड में वह कंप्यूटर का उपयोग करने में कितना सहज है।
- इस व्यावहारिक अवलोकन को सीधे बच्चे के 360-डिग्री होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) में ‘ICT और अन्य कौशल’ के कॉलम में दर्ज किया जाएगा, जो उनके संपूर्ण मूल्यांकन का हिस्सा बनेगा।
ब्लॉग निष्कर्ष (Takeaway):
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में ICT और लाइब्रेरी पीरियड को अनिवार्य करना एक बेहद प्रगतिशील कदम है。 एक तरफ जहां लाइब्रेरी बच्चों की कल्पनाशीलता और भाषा को समृद्ध करेगी, वहीं दूसरी तरफ कंप्यूटर का ज्ञान उन्हें भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करेगा। इन दोनों के मिलन से सरकारी स्कूलों के बच्चे भी निजी स्कूलों के समकक्ष खड़े हो सकेंगे।


