छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग और समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) द्वारा सत्र 2026-27 के नए शैक्षणिक कैलेंडर के साथ हाई स्कूल (कक्षा 9वीं और 10वीं) तथा हायर सेकेंडरी (कक्षा 11वीं और 12th) के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (Vocational Courses) के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के ‘एकीकृत व्यावसायिक शिक्षा’ (Integrated Vocational Education) के विजन को अमलीजामा पहनाते हुए अब राज्य के चुनिंदा व्यावसायिक स्कूलों में ‘हाई स्कूल अप्रेंटिसशिप/इंटर्नशिप प्रोग्राम’ को अनिवार्य और अधिक व्यावहारिक बना दिया गया है।

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी थ्योरी न पढ़ाकर सीधे वास्तविक कार्यस्थलों (Job Markets) का लाइव अनुभव देना है। आइए हमारे शिक्षक साथियों, व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) और विद्यार्थियों के लिए जारी हुए इन नए निर्देशों को विस्तार से समझते हैं:
1. किन ट्रेड्स (Subjects) के लिए लागू होंगे ये निर्देश?
छत्तीसगढ़ के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के तहत संचालित होने वाले सभी प्रमुख वोकेशनल ट्रेड्स पर यह गाइडलाइन प्रभावी होगी:
- आईटी/आईटीईएस (Information Technology/ITeS)
- हेल्थकेयर (Health Care)
- ऑटोमोबाइल (Automobile Service Technician)
- एग्रीकल्चर (Agriculture & Retailing)
- बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस (BFSI)
- ब्यूटी एंड वेलनेस (Beauty & Wellness)
- इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, अपैरल तथा टेलीकम्युनिकेशन
2. नए अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम की मुख्य बातें (Key Guidelines)
- ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) अनिवार्य: कक्षा 9वीं से 12वीं तक के वोकेशनल छात्रों के लिए हर सत्र में निर्धारित घंटों की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग या शॉर्ट-टर्म अप्रेंटिसशिप अनिवार्य होगी।
- स्थानीय उद्योगों के साथ एमओयू (MoU): स्कूल प्रबंधन और व्यावसायिक प्रशिक्षक (VTs) अपने आस-पास के स्थानीय उद्योगों, सर्विस सेंटर्स, अस्पतालों, बैंकों, कृषि केंद्रों या निजी प्रतिष्ठानों के साथ टाइ-अप करेंगे ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके。
- शनिवार ‘गतिविधि दिवस’ का उपयोग: हाई स्कूल के बच्चों के लिए हर शनिवार को होने वाले गतिविधि दिवस (Activity Day) के सेकंड हाफ (उत्तरार्ध) का विशेष उपयोग इसी प्रकार के व्यावहारिक कौशल, अप्रेंटिसशिप विजिट और प्रोजेक्ट वर्क के लिए किया जाएगा।
3. ‘कौशल और कार्य की गरिमा’ पर विशेष जोर
विभाग द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अप्रेंटिसशिप के दौरान बच्चों में ‘श्रम की गरिमा’ (Dignity of Labor) का भाव जगाया जाए।
- विद्यार्थी कार्यस्थल पर जाकर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े व्यावहारिक काम को खुद अपने हाथों से करके सीखेंगे।
- उदाहरण के लिए, ऑटोमोबाइल के छात्र गैराज में जाकर केवल देखेंगे नहीं, बल्कि टूल्स का उपयोग कर इंजन ट्यूनिंग या सर्विसिंग का व्यावहारिक ज्ञान लेंगे। ब्यूटी एंड वेलनेस की छात्राएं सैलून या वैलनेस सेंटर में जाकर व्यावहारिक कौशल सीखेंगी।
4. गाइडेंस, काउंसलिंग और प्लेसमेंट लिंकेज
हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी के स्तर पर ही बच्चों को भविष्य के करियर के प्रति जागरूक करने के लिए शनिवार के दिन विशेष मार्गदर्शन सत्र रखे जाएंगे:
- करियर काउंसलिंग: विद्यार्थियों को यह बताया जाएगा कि स्कूल स्तर की इस वोकेशनल शिक्षा के बाद वे सीधे ‘वर्कफोर्स’ (Workforce) में शामिल होकर रोजगार कैसे पा सकते हैं या फिर उच्च शिक्षा (जैसे बी-वोक, पॉलिटेक्निक या आईटीआई) में कैसे प्रवेश ले सकते हैं।
- इंडस्ट्री कनेक्ट: स्थानीय उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों को ‘अतिथि वक्ता’ (Guest Lecturers) के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।
5. मूल्यांकन और क्रेडिट सिस्टम (360-Degree HPC Integration)
- अप्रेंटिसशिप के दौरान विद्यार्थियों के प्रदर्शन, उनकी उपस्थिति और उनके द्वारा तैयार की गई ‘प्रोजेक्ट रिपोर्ट/डायरी’ के आधार पर उन्हें ग्रेड या क्रेडिट दिए जाएंगे।
- इस व्यावहारिक मूल्यांकन के अंकों को सीधे उनके 360-डिग्री होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) और मुख्य बोर्ड परीक्षा के प्रैक्टिकल अंकों के साथ संरेखित (Align) किया जाएगा।
ब्लॉग निष्कर्ष (Takeaway):
छत्तीसगढ़ के हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम को इस प्रकार सुदृढ़ करना राज्य के युवाओं को हुनरमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह नीति शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने का काम करेगी, जिससे छात्र स्कूल से निकलते ही आत्मनिर्भर बनने या अपने चुने हुए क्षेत्र में उच्च विशेषज्ञता हासिल करने के योग्य बन सकेंगे।


