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कक्षा 7 हिन्दी सीखने के प्रतिफल (Class 7 Hindi Learning Outcomes)

कक्षा 7 हिन्दी सीखने के प्रतिफल (Class 7 Hindi Learning Outcomes)

उच्च प्राथमिक स्तर पर विभिन्न स्थितियों के संदर्भ में अपने आप को लिखित रूप में अभिव्यक्त और अपेक्षित है और लेखन का उद्देश्य भी यही है। उच्च प्राथमिक स्तर पर यह अपेक्षा भी रहती है कि शिक्षार्थी विभिन्न रचनाओं को पढ़कर उसमें झलकने वाली सोच, पूर्वाग्रह और सरोकार आदि को पहचान पाएँ। कुल मिलाकर प्रयास यह होना चाहिए कि इस चरण के पूरा होने तक शिक्षार्थी किसी भाषा, व्यक्ति, वस्तु, स्थान, रचना आदि का विश्लेषण करने, उसकी व्याख्या करने और उस व्याख्या को आत्मविश्वास व स्पष्टता के साथ अभिव्यक्त करने के अभ्यस्त हो जाएँ। वे रचनात्मक और सृजनात्मक ढंग से भाषा को बरतना सीख जाएँ।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए यहाँ पाठ्यचर्या संबंधी अपेक्षाएँ, सीखने-सिखाने की प्रक्रिया तथा सीखने संबंधी संप्राप्ति को दर्शाने वाले बिन्दु दिए गए हैं। यहाँ यह समझना जरूरी होगा कि हिन्दी भाषा संबंधी जो भाषा-संप्राप्ति के बिन्दु दिए गए हैं उनमें परस्पर जुड़ाव है और एक से अधिक भाषायी क्षमताओं की झलक उनमें मिलती है।

कक्षा 7 हिन्दी सीखने के प्रतिफल (Class 7 Hindi Learning Outcomes)
Learning-Outcomes

कक्षा 7 हिन्दी सीखने के प्रतिफल (Class 7 Hindi Learning Outcomes)

1. विविध प्रकार की रचनाओं को पढ़कर समूह में चर्चा करते हैं।

2. किसी सामग्री को पढ़ते हुए लेखक द्वारा रचना के परिप्रेक्ष्य में कहे गए विचार को समझकर और अपने अनुभवों के साथ उसकी संगति, सहमति या असहमति के संदर्भ में अपने विचार अभिव्यक्त करते हैं।

3. किसी चित्र या दृश्य को देखने के अनुभव को अपने ढंग से मौखिक,/सांकेतिक भाषा में व्यक्त करते हैं।

4. पढ़ी गई सामग्री पर चिंतन करते हुए बेहतर समझ के लिए प्रश्न पूछते परिचर्चा करते हैं।

5. अपने परिवेश में मौजूद लोककथाओं और लोकगीतो के बारे में चर्चा करते हैं और उनकी सराहना करते हैं।

6. विविध कलाओं जैसे-हस्तकला, वास्तुकला, खेती-बाड़ी, नृत्यकला और इनमें प्रयोग होने वाली भाषा के बारे में जिज्ञासा व्यक्त करते है, उन्हें समझने का प्रयास करते हैं।

7. विभिन्न संवेदनशील मुद्दों/विषयों जैसे-जाति, धर्म, रंग, जेंडर, रीति-रिवाजों के बारे में मौखिक रूप में अपनी तार्किक समझ अभिव्यक्त करते हैं।

8. सरसरी तौर पर किसी पाठ्यवस्तु को पढ़कर उसकी उपयोगिता के बारे में बताते हैं।

9. किसी पाठ्यवस्तु की बारीकी से जाँच करते हुए उसमें किसी विशेष बिंदु को खोजते हैं।

10. पढ़ी गई सामग्री पर चिंतन करते हुए बेहतर समझ के लिए प्रश्न पूछते हैं।

11.विभिन्न पठन सामग्रियों में प्रयुक्त शब्दों, मुहावरों, लोकोक्तियों के अर्थ समझते हुए उनकी सराहना करते हैं।

12. कहानी, कविता आदि पढ़कर लेखन के विविध तरीकों और शैलियों को पहचानते हैं। जैसे-वर्णनात्मक, विवरणात्मक, भावात्मक, प्रकृति चित्रण आदि।

कक्षा 7 हिन्दी सीखने की संप्राप्ति

13. किसी पाठ्यवस्तु को पढ़ने के दौरान समझने के लिए जरूरत पड़ने पर अपने किसी सहपाठी या शिक्षक की मदद लेकर उपयुक्त संदर्भ सामग्री: जैसे- शब्दकोश, मानचित्र, इंटरनेट या अन्य पुस्तकों की मदद लेते हैं।

14. विविध कलाओं जैसे- हस्तकला, वास्तुकला, खेती-बाड़ी, नृत्यकला आदि से जुड़ी सामग्री में प्रयुक्त भाषा के प्रति जिज्ञासा व्यक्त करते हुए उसकी सराहना करते है।

15. भाषा की बारीकियों/व्यवस्था तथा नए शब्दों का प्रयोग करते हैं जैसे- किसी कविता में प्रयुक्त शब्द विशेष, पदबंध का प्रयोग-आप बढ़ते हैं तो बढ़ते ही चले जाते हैं या जल-रेल जैसे प्रयोग।

16. विभिन्न अवसरों/संदर्भो में कही जा रही दूसरों की बातों को अपने ढंग से लिखते हैं; जैसे -अपने गाँव की चौपाल की बातचीत या अपने मोहल्ले के लिए तरह तरह के कार्य करने वालों की बातचीत।

17.हिन्दी भाषा में विभिन्न प्रकार की सामग्री (समाचार, पत्र-पत्रिका, कहानी, जानकारीपरक सामग्री, इंटरनेट प्रकाशित होने वाली सामग्री आदि) को समझकर पढ़ते हैं और उसमें अपनी पसंद-नापसंद के पक्ष में लिखित या ब्रेल भाषा में अपने तर्क रखते हैं।

18. अपने अनुभवों को अपनी भाषा शैली में लिखते है।

19. विभिन्न विषयों और उद्देश्यों के लिए लिखते समय उपयुक्त शब्दों, वाक्य मुहावरों. लोकोक्तियों. विराम-चिहनों एवं अन्य व्याकरणिक इकाइयों (जैसे- काल, क्रिया विशेषण, शब्द-युग्म आदि का प्रयोग करते हैं।

20. विभिन्न संवेदनशील मुददों/विषयों, जैसे- जाति, धर्म, रंग,जेडर रीति-रिवाजों के बारे में लिखित रूप संस्थनाओं अभिव्यक्त करते हैं।

21.भित्ति पत्रिका/पत्रिका आदि के लिए तरह-तरह की सामग्री जुटाते हैं, लिखते हैं। और उसका संपादन करते है।

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