कक्षा 6 हिन्दी सीखने के प्रतिफल [Class 6 Hindi Learning Outcomes]

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कक्षा 6 हिन्दी सीखने के प्रतिफल [Class 6 Hindi Learning Outcomes] उच्च प्राथमिक स्तर पर यह अपेक्षा भी रहती है कि शिक्षार्थी विभिन्न रचनाओं को पढ़कर उसमें झलकने वाली सोच, पूर्वाग्रह और सरोकार आदि को पहचान पाएँ।

कक्षा 6 हिन्दी सीखने के प्रतिफल (Class 6 Hindi Learning Outcomes)

कुल मिलाकर प्रयास यह होना चाहिए कि इस चरण के पूरा होने तक शिक्षार्थी किसी भाषा, व्यक्ति, वस्तु, स्थान, रचना आदि का विश्लेषण करने, उसकी व्याख्या करने और उस व्याख्या को आत्मविश्वास व स्पष्टता के साथ अभिव्यक्त करने के अभ्यस्त हो जाएँ। वे रचनात्मक और सृजनात्मक ढंग से भाषा को बरतना सीख जाएँ। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए यहाँ पाठ्यचर्या संबंधी अपेक्षाएँ, सीखने-सिखाने की प्रक्रिया तथा सीखने संबंधी संप्राप्ति को दर्शाने वाले बिन्दु दिए गए हैं।

कक्षा 6 हिन्दी सीखने के प्रतिफल

1. विभिन्न प्रकार की ध्वनियों (जैसे- बारिश, हवा, रेल, बस, फेरीवाला आदि) को सुनने के वस्तु के स्वाद आदि के अनुभव को अपने ढंग से मौखिक/सांकेतिक भाषा में प्रस्तुत करते हैं ।

2. सुनी, देखी गई बातों, जैसे- स्थानीय सामाजिक घटनाओं, कार्यक्रमों और गतिविधियों पर बेझिझक बात करते हैं और प्रश्न करते हैं।

3. देखी, सुनी रचनाओं/घटनाओं/मुद्दों पर बातचीत को अपने ढंग से आगे बढ़ाते हैं, जैसे- किसी कहानी को आगे बढ़ाना।

4. रेडियो, टी.वी.. अखबार, इंटरनेट में देखी/सुनी गई खबरों को अपने शब्दों में कहते हैं।

5. विभिन्न अवसरों/संदभों में कही जा रही दूसरों की बातों को अपने ढंग से बताते हैं, जैसे-आँखों से न देख पाने वाले साथी का यात्रा- अनुभव।

6. अपने परिवेश में मौजूद लोककथाओं और लोकगीतों के बारे में जानते हुए चर्चा करते हैं।

7. अपने से भिन्न भाषा, खान-पान, रहन-सहन संबंधी विविधताओं पर बातचीत करते हैं।

8. सरसरी तौर पर किसी पाठ्यवस्तु को पढ़कर उसकी विषयवस्तु का अनुमान लगाते हैं।

9. किसी पाठ्यवस्तु की बारीकी से जाँच करते हुए उसमें किसी विशेष बिंदु को खोजते हैं, अनुमान लगाते हैं, निष्कर्ष निकालते हैं।

10. हिन्दी भाषा में विभिन्न प्रकार की सामग्री (समाचार, पत्र-पत्रिका, कहानी, जानकारी परक सामग्री, इंटरनेट पर प्रकाशित होने वाली सामग्री आदि) को समझकर पढ़ते हैं और उसमें अपनी पसंद-नापसंद, राय, टिप्पणी देते हैं।

11. भाषा की बारीकियों/व्यवस्था/ ढंग पर ध्यान देते हुए उसकी सराहना करते हैं, जैसे-कविता में लय-तुक, वर्ण-आवृत्ति (छंद) तथा कहानी, निबंध में मुहावरे, लोकक्ति आदि।

12. विभिन्न विधाओं में लिखी गई साहित्यिक सामग्री को उपयुक्त उतार-चढ़ाव और सही गति के साथ पढ़ते हैं।

13. हिन्दी भाषा में विविध प्रकार की रचनाओं को पढ़ते हैं।

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