कला शिक्षा (कृति-1) और खेल यात्रा: कक्षा 6 और 7 के विद्यार्थियों के लिए क्या है नया सिलेबस?

छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी नए शैक्षणिक कैलेंडर में मिडिल स्कूल (Middle Stage – कक्षा 6वीं और 7वीं) के विद्यार्थियों के लिए एक बेहद प्रगतिशील और कौशल-आधारित पाठ्यक्रम लागू किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की अनुशंसाओं के तहत अब मिडिल स्कूल के बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उनके शारीरिक, मानसिक और रचनात्मक विकास को मुख्य पाठ्यक्रम से जोड़ दिया गया है।

कला शिक्षा (कृति-1) और खेल यात्रा: कक्षा 6 और 7 के विद्यार्थियों के लिए क्या है नया सिलेबस?

इस नए सिलेबस के अंतर्गत कक्षा 6वीं और 7वीं के लिए दो नए और अनिवार्य विषय पेश किए गए हैं: कला शिक्षा (कृति-1) और शारीरिक शिक्षा (खेल यात्रा-1)। आइए शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए इस नए सिलेबस को विस्तार से समझते हैं:

1. नए सिलेबस का ढांचा और निर्धारित घंटे

सत्र 2026-27 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन दोनों विषयों को केवल औपचारिक या नाममात्र का नहीं रखा गया है, बल्कि इनके बेहतर क्रियान्वयन के लिए पूरे साल में विशेष घंटों (Hours) का निर्धारण किया गया है:

  • कला शिक्षा (कृति-1): इसके सफल संचालन के लिए पूरे सत्र में 100 घंटे निर्धारित हैं।
  • शारीरिक शिक्षा (खेल यात्रा-1): इसके विकास और अभ्यास के लिए भी पूरे सत्र में 100 घंटे दिए गए हैं।

2. कला शिक्षा — ‘कृति-1’ (Art Education) में क्या है खास?

कक्षा 6वीं और 7वीं के स्तर पर बच्चों की रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को एक नया मंच देने के लिए ‘कृति-1’ पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसके तहत बच्चे निम्नलिखित व्यावहारिक विधाएं सीखेंगे:

  • दृश्य कला (Visual Arts): इसके अंतर्गत बच्चों को पेंटिंग, स्केचिंग, कोलाज मेकिंग और स्थानीय छत्तीसगढ़ी पारंपरिक लोक कलाओं (जैसे- गोधना शिल्प, मंडाना या भित्ति चित्र) की बुनियादी समझ दी जाएगी।
  • मिट्टी और शिल्प कला: मिट्टी से मूर्तियां, रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं और स्थानीय स्तर पर मिलने वाली बेकार चीजों (Best out of Waste) से कलाकृतियां बनाना इसका मुख्य हिस्सा है।
  • प्रदर्शनकारी कला (Performing Arts): स्थानीय लोक गीतों, लोक नृत्यों (जैसे- सुआ, करमा, पंथी) और छोटे नाटकों या नुक्कड़ नाटकों (Drama) के माध्यम से बच्चों को अपनी अभिव्यक्ति निखारने का मौका मिलेगा।

3. शारीरिक शिक्षा — ‘खेल यात्रा-1’ (Physical Education & Sports)

बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक सुदृढ़ता और खेल भावना (Sportsmanship) को विकसित करने के लिए पुराने पीटी (PT) के स्वरूप को बदलते हुए ‘खेल यात्रा-1’ नाम से नया सिलेबस लाया गया है। इसके मुख्य बिंदु हैं:

  • स्थानीय और पारंपरिक खेल: इस पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और स्थानीय खेलों (जैसे- गेंड़ी दौड़, भौंरा, बाटी, फुगड़ी) को विशेष महत्व दिया जाएगा ताकि बच्चे अपनी संस्कृति से जुड़े रहें।
  • एथलेटिक्स और मैदानी खेल: दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद के साथ-साथ कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और फुटबॉल जैसे खेलों के बुनियादी नियम और तकनीक बच्चों को सिखाई जाएगी।
  • नियमित योग और प्राणायाम: बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से एकाग्र बनाए रखने के लिए सूर्य नमस्कार, बुनियादी आसन और प्राणायाम का दैनिक व साप्ताहिक अभ्यास कराया जाएगा।

4. प्रत्येक शनिवार ‘गतिविधि दिवस’ (Bagless Saturday) पर क्रियान्वयन

नए कैलेंडर के अनुसार, कक्षा 6वीं और 7वीं के विद्यार्थियों के लिए ‘कृति-1’ और ‘खेल यात्रा-1’ के व्यावहारिक अभ्यास के लिए हर शनिवार को होने वाला ‘गतिविधि दिवस’ (Bagless Activity Day) सबसे बेहतरीन माध्यम होगा।

  • शनिवार के दिन बच्चे बिना बस्ते के स्कूल आएंगे।
  • इस दिन शिक्षक इन दोनों विषयों के अंतर्गत आने वाले प्रोजेक्ट्स, सामूहिक नृत्य-संगीत अभ्यास, चित्रकला प्रतियोगिताएं और मैदानी खेलों के मैच आयोजित करवाएंगे।

5. मूल्यांकन का नया तरीका: होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC)

‘कृति-1’ और ‘खेल यात्रा-1’ में बच्चों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किसी पारंपरिक लिखित परीक्षा से नहीं होगा। इसके बजाय:

  • शिक्षक पूरे साल बच्चों की रुचि, खेल में उनकी टीमवर्क भावना, और कला के प्रति उनकी रचनात्मकता को बारीकी से देखेंगे।
  • इस प्रगति को सीधे बच्चों के 360-डिग्री होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) में दर्ज किया जाएगा, जिससे बच्चों को सह-शैक्षणिक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा अवसर मिले।

ब्लॉग निष्कर्ष (Takeaway):

कक्षा 6वीं और 7वीं के लिए लाया गया यह नया सिलेबस — ‘कृति-1’ और ‘खेल यात्रा-1’ — छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा को अधिक आधुनिक, व्यावहारिक और मनोरंजक बनाता है। यह पाठ्यक्रम बच्चों के मस्तिष्क और शरीर दोनों को समान रूप से सक्रिय रखकर उन्हें एक बहुमुखी प्रतिभावान (All-rounder) छात्र के रूप में विकसित करने में मदद करेगा।

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