कौशल बोध (व्यावसायिक शिक्षा): कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए 110 घंटे का विशेष स्किल कोर्स

छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सत्र 2026-27 से मिडिल स्कूल स्तर (कक्षा 6वीं से 8वीं) के बच्चों के लिए एक बेहद व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख पाठ्यक्रम लागू किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के मध्य स्तर (Middle Stage) की अनुशंसाओं को अपनाते हुए प्रदेश के सभी मिडिल स्कूलों में ‘कौशल बोध’ (व्यावसायिक/स्किल शिक्षा) को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया गया है।

कौशल बोध (व्यावसायिक शिक्षा): कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए 110 घंटे का विशेष स्किल कोर्स

अब तक व्यावसायिक या वोकेशनल शिक्षा केवल हाई स्कूल या हायर सेकेंडरी स्तर पर ही दी जाती थी, लेकिन अब बच्चों को बचपन से ही हुनरमंद बनाने के लिए मिडिल स्कूल में इसके लिए पूरे सत्र में 110 घंटे का विशेष समय निर्धारित किया गया है।

आइए शिक्षक साथियों और पाठकों के लिए इस नए स्किल कोर्स के स्वरूप, उद्देश्यों और नियमों को विस्तार से समझते हैं:

1. ‘कौशल बोध’ पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को किसी खास व्यवसाय में तुरंत धकेलना नहीं है, बल्कि बहुत ही बुनियादी स्तर पर उनके भीतर श्रम के प्रति सम्मान (Dignity of Labor) पैदा करना और विभिन्न कौशलों के प्रति उनकी रुचि को जगाना है।

  • व्यावहारिक अनुभव (Hands-on Experience): बच्चे केवल किताबों में न पढ़ें कि बिजली का काम या बागवानी कैसे होती है, बल्कि वे खुद इसे करके देखें।
  • भविष्य की नींव: मिडिल स्कूल स्तर पर ही बच्चे अपनी रुचि के क्षेत्र (जैसे आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कला या कृषि) को पहचान सकें, ताकि आगे चलकर वे सही करियर चुन सकें।

2. 110 घंटों का विभाजन और पाठ्यक्रम (Syllabus Structure)

सत्र 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, निर्धारित 110 घंटों को पूरे साल की मासिक समय-सारणी में विभाजित किया गया है। इस पाठ्यक्रम के तहत बच्चों को निम्नलिखित क्षेत्रों का बुनियादी ज्ञान दिया जाएगा:

  • कृषि और बागवानी (Agriculture & Gardening): स्कूल परिसर में किचन गार्डन बनाना, पौधों की देखभाल, जैविक खाद (वर्मीकंपोस्ट) तैयार करना और स्थानीय फसलों की बुनियादी समझ।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण: घर में इस्तेमाल होने वाले छोटे उपकरणों की समझ, फ्यूज तार बदलना, बल्ब/एलईडी लगाना और बिजली सुरक्षा के नियम।
  • काष्ठकला और मिट्टी शिल्प (Carpentry & Pottery): लकड़ी और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मिट्टी से उपयोगी छोटी वस्तुएं या मॉडल तैयार करना।
  • डिजिटल साक्षरता और कोडिंग (ICT Skills): कंप्यूटर का बुनियादी संचालन, एमएस ऑफिस (Word/Excel) का व्यावहारिक उपयोग और कोडिंग की शुरुआती समझ।
  • घरेलू हुनर और सिलाई-कढ़ाई: कपड़ों की बुनियादी सिलाई, बटन लगाना और स्थानीय हस्तशिल्प कलाओं का अभ्यास।

3. ’10 बैगलेस शनिवार’ (10 Bagless Saturdays) के साथ जुड़ाव

कौशल बोध पाठ्यक्रम को सबसे प्रभावी बनाने का माध्यम ’10 बैगलेस शनिवार’ को बनाया गया है।

  • इन निर्धारित 10 शनिवारों को बच्चे बिना बस्ते के स्कूल आएंगे और शिक्षक उन्हें स्थानीय कौशल केंद्रों या सार्वजनिक/व्यावसायिक संस्थानों के भ्रमण (Field Visits) पर ले जाएंगे।
  • फील्ड विजिट के स्थान: बच्चे अपने क्षेत्र के स्थानीय बैंक, पोस्ट ऑफिस, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मोटर गैराज, कुटीर उद्योग केंद्र, डेयरी फार्म या कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा करेंगे। वहां वे सीधे कारीगरों, तकनीशियनों और अधिकारियों को काम करते हुए देखेंगे और उनसे बातचीत करेंगे।

4. मूल्यांकन की प्रक्रिया: होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC)

  • ‘कौशल बोध’ विषय के लिए पारंपरिक रूप से कोई पेन-पेपर लिखित परीक्षा नहीं आयोजित की जाएगी।
  • मूल्यांकन पूरी तरह से व्यावहारिक प्रदर्शन, प्रोजेक्ट फाइल, बनाए गए मॉडल और फील्ड विजिट के बाद बच्चों द्वारा तैयार की गई संक्षिप्त रिपोर्ट (Feedback) पर आधारित होगा।
  • इस स्किल कोर्स में बच्चे की प्रगति को सीधे 360-डिग्री होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) के ‘कौशल और व्यावसायिक शिक्षा’ कॉलम में दर्ज किया जाएगा।

निष्कर्ष (Takeaway):

छत्तीसगढ़ के मिडिल स्कूलों में शुरू हुआ 110 घंटे का यह ‘कौशल बोध’ कोर्स केवल एक विषय नहीं, बल्कि शिक्षा को वास्तविक जीवन से जोड़ने का एक महा-अभियान है। किताबी ज्ञान के साथ जब बच्चों के हाथों में हुनर का बल होगा, तभी प्रदेश का हर बच्चा आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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