स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम 2026 (School Readiness Program): पहली बार स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए 3 महीने का विशेष खेल-आधारित प्लान

छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी नए शैक्षणिक कैलेंडर में प्राथमिक शिक्षा की नींव को मजबूत करने के लिए एक बेहद सराहनीय कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के मूलभूत स्तर (Foundational Stage) की अनुशंसा के तहत, पहली बार स्कूल की चौखट पर कदम रखने वाले कक्षा 1 के नन्हे बच्चों के लिए 3 महीने का विशेष ‘स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम’ (School Readiness Program) अनिवार्य किया गया है।

अक्सर देखा जाता है कि घर या आंगनवाड़ी के खुले माहौल से निकलकर जब बच्चे पहली बार औपचारिक स्कूल में आते हैं, तो वे डर जाते हैं या असहज महसूस करते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए जून से सितंबर 2026 तक चलने वाला यह विशेष खेल-आधारित सफर तैयार किया गया है।

School Readiness Program

आइए इस 3 महीने के पूरे प्लान को आसान भाषा में समझते हैं:

1. क्या है स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य?

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों पर आते ही किताबी पढ़ाई या भारी-भरकम बस्ते का बोझ डालना नहीं है। बल्कि:

  • बच्चों को स्कूल के वातावरण से परिचित कराना और उसे उनके लिए ‘एक सुरक्षित खेल का मैदान’ बनाना।
  • बच्चों के भीतर स्कूल आने की उत्सुकता जगाना ताकि वे रोज खुशी-खुशी स्कूल आएं।
  • खेल, कहानी, संगीत और कला के माध्यम से उनके भीतर बुनियादी भाषाई (Linguistic) और संख्यात्मक (Mathematical) समझ की नींव रखना।

2. 3 महीने का चरणबद्ध मास्टर प्लान (Step-by-Step Execution)

पहला महीना (जून-जुलाई): आत्मीय स्वागत और ‘जादुई पिटारा’ से दोस्ती

  • स्कूल में प्रवेश: शुरुआती दिनों में बच्चों का तिलक लगाकर और फूलों से बहुत ही आत्मीय स्वागत किया जाएगा।
  • जादुई पिटारा का उपयोग: बच्चों को SCERT द्वारा तैयार ‘जादुई पिटारा’ बॉक्स से परिचित कराया जाएगा। इसमें मौजूद फ्लैश कार्ड्स, बड़े चित्रों वाली रंग-बिरंगी किताबों और पहेलियों (Puzzles) के माध्यम से बच्चे खेल-खेल में वर्णमाला (अक्षरों) और 1 से 9 तक के अंकों की केवल पहचान करना सीखेंगे।
  • दैनिक दिनचर्या: इस महीने बच्चे केवल स्कूल में बैठना, अपनी बारी का इंतजार करना और अपनी चीजों को संभालना सीखते हैं।

दूसरा महीना (जुलाई-अगस्त): कहानी, स्थानीय गीत और सामाजिक विकास

  • छत्तीसगढ़ी बाल-गीत: इस चरण में बच्चों के सामाजिक और भाषाई विकास के लिए स्थानीय छत्तीसगढ़ी बाल-गीतों, कविताओं और लोरियों का सहारा लिया जाएगा। शिक्षक बच्चों को गोल घेरे में बिठाकर कहानियां सुनाएंगे।
  • मेल-जोल और आपसी सहयोग: बच्चे अपने सहपाठियों (क्लासमेट्स) के साथ मिलकर सामूहिक खेलों में हिस्सा लेंगे। इससे उनके भीतर टीमवर्क, सहयोग और दोस्ती की भावना विकसित होगी।
  • शारीरिक गतिविधियां व योग: बच्चों के शारीरिक विकास के लिए सरल व्यायाम, ताली बजाने वाले खेल और बुनियादी योग मुद्राओं की शुरुआत की जाएगी।

तीसरा महीना (अगस्त-सितंबर): खिलौना निर्माण और अभिव्यक्ति

  • मिट्टी और कागज की कला: बच्चे अब अपने हाथों का इस्तेमाल करके रचनात्मक कार्य करेंगे। मिट्टी के छोटे-छोटे खिलौने, फल, आकृतियां बनाना और रंग-बिरंगे कागजों को मोड़कर नाव, हवाई जहाज या मुखौटे बनाना सिखाया जाएगा। इससे उनकी उंगलियों की मांसपेशियां मजबूत (Fine Motor Skills) होती हैं।
  • आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति: कला के माध्यम से बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखेंगे। वे चित्रों में रंग भरेंगे और अपनी बनाई हुई चीजों के बारे में टूटी-फूटी भाषा में क्लास के सामने बताएंगे।
  • औपचारिक पढ़ाई के लिए तैयार होना: इस महीने के अंत तक बच्चों का डर पूरी तरह खत्म हो जाता है और वे आत्मविश्वास के साथ नियमित/औपचारिक पढ़ाई शुरू करने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाते हैं।

3. हर शनिवार ‘गतिविधि दिवस’ (Bagless Saturday) का विशेष महत्व

इस पूरे प्रोग्राम के दौरान शनिवार का दिन सबसे खास होगा। नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, शनिवार को बच्चे बिना बस्ते के स्कूल आएंगे। इस दिन केवल और केवल आनंदमयी गतिविधियां जैसे- संगीत, नाटक, पेंटिंग और अभिनय (Role Play) करवाए जाएंगे, जिससे बच्चों का मानसिक तनाव पूरी तरह दूर रहे।

4. होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) में दर्ज होगी प्रगति

इस 3 महीने के दौरान बच्चों का कोई लिखित एग्जाम (Test) नहीं होगा। शिक्षक केवल बच्चों की गतिविधियों को ध्यान से देखेंगे और नए 360-डिग्री होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) में उनके सामाजिक व्यवहार, शारीरिक विकास, आत्मविश्वास और सीखने की ललक को दर्ज करेंगे।

निष्कर्ष (Takeaway):

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में ‘स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम 2026’ की यह शुरुआत बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। रटने की पुरानी और उबाऊ पद्धति को पीछे छोड़कर खेल-खेल में बच्चों को स्कूल से जोड़ना और उनका सर्वांगीण विकास करना ही इस अनूठे प्लान की असली सफलता है।

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