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पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 उपलब्धि हेतु कार्ययोजना व निर्देश |

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पढ़ई तुहंर दुआर 2.0-बच्चों की उपलब्धि हेतु कार्ययोजना व दिशा निर्देश पढ़ई तुंहर दुआर 2.0 के अंतर्गत हस्तलिखित पुस्तिका निर्माण योजना है

Table of Contents

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 Part-2

    राज्य में स्कूलों में विद्यार्थियों के सीखने में हुई क्षति एवं असर सर्वेे में बच्चों की उपलब्धि को ध्यान में रखते हुये सीखने में हुए क्षति की भरपाई हेतु विशेष कार्यक्रम (Learning Recovery Program) इस ग्रीष्मावकाश मे संचालित होना है। इसके तहत हमें क्या करना है जानें-

    1. शिक्षा विभाग का शैक्षणिक सत्र 01 अप्रैल से 31 मार्च तक होता था| जिसे वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 30 अप्रेल तक बढ़ाया गया है। जिससे लगभग 60 दिनों का समय शाला में सीखने-सिखाने हेतु उपलब्ध हो सकेगा।
    2. इस अवधि का बेहतर से बेहतर उपयोग किए जाने हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रयास किया जाये:
      • कोरोना लाकडाउन से बच्चों में (learning loss) हुआ सीखने में नुकसान की भरपाई,
      • लाकडाउन के दौरान बच्चों की दिनचर्या, व्यवहार में बदलाव की समझ,
      • स्कूलों में बच्चों के सीखने में हुए नुकसान की भरपाई (learning recovery) हेतु विशेष कार्यक्रम हेतु सुझाव देना,
      • समुदाय एवं पालकों की ओर से बच्चों के सीखने में सहयोग हेतु प्रस्ताव बनाना,
    3. स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर विशेष योजना बनाकर क्रियान्वयन किया जाये।
    4. इस बढ़ी हुई अवधि में बच्चों के सीखने पर फोकस किया जाएगा।
    5. कक्षा संचालन का समय शाला प्रबन्धन समिति एवं पालकों के द्वारा तय किया जाएगा।
    6. NIC के सहयोग से विकसित टेली-प्रेक्टीस के माध्यम से अभ्यास करने का अवसर उपलब्ध करवाया जा सके।
    7. अकादमिक निरीक्षण से पूरा फोकस बच्चों की उपलब्धि में सुधार किया जाना होगा एवं अच्छे कार्य कर रहे शिक्षकों को प्रोत्साहित किए जाने की भी व्यवस्था की जाएगी।
    8. विभिन्न स्तर पर PLC को सक्रिय कर शिक्षकों की मेंटरिंग की सुविधा दी जाएगी ।
    9. शिक्षकों के प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी के माध्यम से स्थानीय स्तर पर सीखने में सहयोग हेतु सामग्री विकसित की जाएगी।
    10. “अंगना म शिक्षा” जैसे कार्यक्रम से बच्चों की शिक्षा को आंगनवाड़ी के साथ जोड़कर सीखने पर फोकस किया जाएगा। यह कार्यक्रम पूर्व प्राथमिक से लेकर कक्षा दूसरी के बच्चों के लिए लागू किया जाएगा।
    1. आगामी शैक्षणिक सत्र में SCERT द्वारा रेडीनेस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में विभिन्न रोचक गतिविधियों के माध्यम से मूलभूत दक्षताओं का विकास किया जाएगा।
    2. कक्षा तीसरी से पांचवीं हेतु सरल कार्यक्रम, कक्षा छठवीं से आठवीं हेतु नवा जतन कार्यक्रम एवं कक्षा नवमीं से बारहवीं हेतु विशेष उपचारात्मक कार्यक्रम संचालित किया जाएगा।
    3. सौ दिवसीय अभियान के माध्यम से विद्यार्थी विकास सूचकांक द्वारा कक्षवार निगरानी की व्यवस्था की जायेगी।
    1. बच्चों की शिक्षा में सहभागिता, टेली प्रेक्टीज के उपयोग से बाह्य मूल्यांकन किया जाएगा। जिससे विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के performance grading के आकलन के लिए पैमाने के रूप में लिया जायेगा

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 – बच्चों की उपलब्धि हेतु कार्ययोजना व दिशा निर्देश

    राज्य में वर्तमान में एस.सी.ई.आर.टी. द्वारा बेसलाइन आकलन किया जा रहा है |

    रिपोर्ट के आधार पर आपको अपने जिले के समस्त शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों की वर्तमान स्थिति एवं विद्यार्थी के पास अपने वर्तमान में दर्ज कक्षा से कितनी कक्षा पहले की दक्षता हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही मिड-आइन एवं एंड-लाइन रिपोर्ट के माध्यम से आप अपने जिले में विद्यार्थियों की प्रगति की ट्रेकिंग भी कर सकेंगे |

    अपने जिले में शुरू से लेकर कक्षा बारहवीं तक के विद्यार्थियों के कोरोना की वजह से हुए लर्निंग लोस को कम करने एवं विद्यार्थियों की उपलब्धि में सुधार लाने के उद्देश्य से जिले में आपके नेतृत्व में इस सत्र में पढई तुंहर दुआर 2.0 के नाम से एक समयबद्ध कार्यक्रम संचालित किया जाना है जिसका विवरण संलग्न है। इस कार्यक्रम में उल्लेखित समयसीमा का पालन करते हुए वृहद स्तर पर विभिन्न प्रस्तावित कार्यक्रमों का संचालन अपने जिले की समस्त शालाओं में अनिवार्यतः किया जाना सुनिश्चित करें |

    ( यहाँ से खोलें )

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 आदेश दिनाँक-02-09-2021

    • पालकों से संपर्क कर सभी शालाओं में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति |
    • शिक्षकों को विभिन्न गैर-शिक्षकीय कार्यों के हटाकर अधिक से अधिक समय कक्षा में बच्चों को सीखने में सक्रिय रखने |
    • जिले एवं विकासखंड स्तर पर पढ़ना-लिखना, गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन एवं अन्य विषयों के लिए प्रत्येक स्तर पर कम से कम दस-दस मेंटर का चयन |
    • मेंटर्स की इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें कार्यक्रम के बेहतर समझ विकसित करते हुए अपने संपर्क में आने वाले शिक्षकों को इस कार्यक्रम में जोड़े रखने हेतु मेंटर एवं शिक्षकों को सभी आवश्यक क्षमता विकास कार्यक्रमों का नियमित आयोजन करें।
    • मेंटर के माध्यम से विभिन्न दक्षताओं के विकास हेतु सामग्रियों की मैपिंग, दिन-प्रतिदिन क्या-क्या सीखना होगा, अभ्यास करना होगा, विभिन्न दक्षताओं पर सामग्री निर्माण कर शालाओं तक अभ्यास हेतु सोशियल मीडिया से पहुंचाना, शिक्षकों का क्षमता विकास आदि किया जाना होगा
    • मेंटर एवं प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी को सक्रिय रखने टेलीग्राम ग्रुप में सभी शत प्रतिशत शिक्षकों को शामिल करें एवं विद्यार्थियों जुड़े रहने हेतु उनके पालकों को व्हात्सेप्प ग्रुप में कक्षावार जोड़ें
    • शाला, संकुल, विकासखंड एवं जिले स्तर पर निर्धारित तिथियों में निर्धारित स्तरों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन पूरी गंभीरता से करते प्रत्येक शाला में निर्धारित गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में समुदाय को सक्रिय रूप से शामिल किया जाए एवं मीडिया में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए
    • प्रत्येक कक्षा में इस कार्यक्रम के अंतर्गत फोकस किए जा रहे लर्निंग आउटकम को ध्यान में रखकर विद्यार्थी विकास सूचकांक का नियमित उपयोग कर अद्यतन रखा जाए । मानिटरिंग के दौरान विद्यार्थी विकास सूचकांक के आधार पर विद्यार्थियों का आकलन करें।
    • पढई तुंहर दुआर 2.0 कार्यक्रम के विभिन्न गतिविधियों की प्रविष्टि स्कूल शिक्षा विभाग के वेबसाईट cgschool.in में की जाएगी अतः समय पर सभी निर्धारित कार्यक्रमों का

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 गाईड लाईन

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 पार्ट-2 आदेशDownload Order
    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 पार्ट-2 मेनुअलDownload Order
    ग्रीष्मावकाश कटौती आदेश 21-02-2022Download Order

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 के अंतर्गत हस्तलिखित पुस्तिका निर्माण की योजना है-

    • जिसमें सभी शालाओं में स्तरवार हस्तलिखित पुस्तिका तैयार कर संकुल से लेकर जिले स्तर तक प्रतियोगिताओं की योजना है |
    • जिसके लिये प्रत्येक शाला में कम से कम एक हस्तपुस्तिका बच्चों द्वारा तैयार किया जाना है
    • कक्षा पहली से तीसरी तक के विद्यार्थियों के लिए एक हस्तलिखित पुस्तिका तैयार की जाए
    • कक्षा चार एवं पांच के लिये रचनात्मक कौशल विकास से संबंधित अभ्यास पर कार्य करवाया जाए।
    • कोरे कागज में प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा हस्तलिखित लेखों को संकलित कर स्टेपल कर शाला हस्तलिखित पुस्तिका तैयार की जाए।
    • जिन्हें संकुल से लेकर जिले स्तर तक आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में शामिल करवाया जाना है।
    • जिलों में चयनित हस्तलिखित पुस्तिकाओं एवं बेस्ट परियोजनाओं को राज्य स्तर पर प्रदर्शनी में रखा जाना प्रस्तावित है।
    • प्राथमिक से लेकर हायर सेकन्डरी स्तर तक बच्चों के लिए हस्तपुस्तिकाएं तैयार करने के निर्देश मिले हैं
    • बच्चों को लेखन कार्य में पर्याप्त अभ्यास हेतु अभ्यास पुस्तिकाओं कार्य, कर्सिव लेखन, रचनात्मक लेखन हेतु प्रेरित करें

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 के अंतर्गत गतिविधियों की Online Entry कैसे करें:-

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0

    संकुल स्तर पर बच्चों द्वारा हैंडबुक बनाने के लिये जारी बजट-

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 में हस्तलिखित पुस्तिका निर्माण संबंधी:- 14-09-2021

    हस्तलिखित पुस्तिका निर्माण

    पठन कौशल विकास हेतु स्टोरीव्हीवर का क्रियान्वयन |

    • राज्य के सभी प्राथमिक शालाओं के विद्यार्थियों के पठन कौशल को विकसित करने एवं रोचक कहानियों के माध्यम से पढ़ने के अनुभव को आनंददाई बनान इसका मुख्य उद्देश्य है
    • स्टोरीव्हीवर एक संस्था के साथ मिलकर फाउंडेशनल लिटरेसी नामक कार्यक्रम प्रारंभ हुआ है जिसके मुख्य बिंदु:-
    • सभी शिक्षक स्टोरीव्हीवर के वेबसाईट में अपना पंजीयन करना है जिसका लिंक cgschool.in में दिया जायेगा ।
    • जिसके प्रत्येक कहानी को निपुण भारत के लिए निर्धारित लर्निंग आउटकम से मैप किया गया है।
    • इसके 3 स्तर होंगे –
      1. कक्षा एक के लिए स्तर एक एवं स्तर दो
      2. कक्षा दो के लिए स्तर तीन एवं स्तर चार
      3. कक्षा तीन के लिए- स्तर पांच एवं स्तर छः
    • प्रत्येक स्तर पर बीस से तीस कहानियों की पुस्तकें उपलब्ध होंगी ।  स्तर अनुसार अगले स्तर पर आगे बढना होगा |
    • बच्चों में सुनने के साथ-साथ पढ़ने का अभ्यास होगा |
    • इस श्रंखला में कुल 180 कहानियाँ होंगी। जिसकी समझ के लिये वर्कशीट एवं प्रश्न उपलब्ध होगा जिसमें सुनाना, साझा पठन, मार्गदर्शन पठन एवं मुक्त पठन पर आधारित पोस्टर भी उपलब्ध होंगे
    • इन कहानियों को पढ़ने का अभ्यास करवाया जा सकता है।
    • इन कहानियों का अधिक से अधिक संख्या में समझ के साथ वाचन कर हो |

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 में हस्तलिखित पुस्तिका निर्माण संबंधी:- 21-09-2021

    पढ़ई तुहंर दुआर स्टोरीव्यीवर

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 के अंतर्गत सौ दिन सौ कहानियाँ का क्रियान्वयन

    • इन पुस्तकों का सेट सभी उच्च प्राथमिक शालाओं में उपलब्ध करवाते हुए इनको सभी बच्चों द्वारा नियमित पढ़ा जाना
    • प्रत्येक कहानी में अंग्रेजी में कुल कितने शब्द हैं उनकी गणना कर प्रत्येक कहानी की समझ की जांच करने पांच प्रश्न तैयार कर सभी शालाओं में उपलब्ध करवाएं।
    • उच्च प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी पढ़ा रहे सभी शिक्षकों को अनिवार्यतः जोड़ें |
    • बच्चे पहले अंग्रेजी में कहानी पढ़कर समझने का प्रयास करेंगे एवं ठीक से समझ में नहीं आने पर का हिन्दी में अनुवाद पढ़कर समझने की कोशिश करेंगे |
    • पुनः वे अंग्रेजी में अब उस कहानी को समझने का प्रयास करेंगे। इन कहानियों को ठीक से समझने के बाद वे अपने से छोटे बच्चों को कहानी सुनाएंगे |
    • बच्चों को इन कहानियों को पढ़ने के बाद उन्हें प्रत्येक कहानी को पढ़ने की स्पीड (प्रति मिनट कितने शब्द) एवं कहानियों के आधार पर पांच प्रश्नों को पूछकर उसमें से कितने प्रश्नों के वे सही जवाब दे सकते हैं,
    • सौवें कहानी पहुंचते तक उनकी पढ़ने की स्पीड एवं समझ कर प्रश्नों के जवाब दे सकने के बारे में अध्ययन कर डाटा एकत्र करना होगा |
    • गूगल फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरने निम्नलिखित जानकारी प्रत्येक स्कूल से कम से कम बीस विद्यार्थियों से इस जानकारी की प्रविष्टि गूगल फॉर्म में करें।
    • यही जानकारी तीन माह बाद पुनः एक नए गूगल फॉर्म के माध्यम से आपको भरे जाने हेतु भेजी जाएगी। दोनों जानकारियों की तुलना करने पर हमें इस कार्यक्रम का प्रभाव का पता चल सकेगा।
    • यह प्रयास करें कि पहली पुस्तक से लेकर सौवें पुस्तक पढ़ते तक प्रत्येक बच्चे की पढ़ने की स्पीड एवं समझ के स्तर में व्यापक अंतर एवं सुधार दिखाई दे सके
    • शिक्षक चाहें तो इसी प्रक्रिया को उनके विद्यार्थियों द्वारा हिन्दी पढ़ने का अभ्यास करते हिन्दी में स्पीड एवं समझ के स्तर की जांच कर हो रहे बदलाव को देखा जा सकेगा ।
    सौ दिन सौ कहानियाँ प्रोग्रेस रिपोर्ट
    सौ दिन सौ कहानियाँ प्रतियोगिता तिथी

    पढ़ई तुहंर दुआर 2.0 में सौ दिन सौ कहानियाँ संबंधी:- 21-09-2021 ( यहाँ से आदेश को पढ़ें )

    जिले में इस कार्यक्रम को पूरी गंभीरता के साथ आपके नेतृत्व में प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं शिक्षण संस्थाओं के सभी सद स्य एवं जिला मिशन समन्वयक सभी को शामिल कर क्रियान्वित करें। राज्य कार्यालय से सीधे शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं पालकों से आपके जिले में इस कार्यक्रम का कोडबैक लिया जाएगा। कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार इस प्रकार से किया जाये की कोई भी हतग्राही इस कार्यक्रम से अनभिज्ञ न रहे।

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