सत्र 2022-23 में अकादमिक अवलोकन हेतु दिशा निर्देश ।

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सत्र 2022-23 में अकादमिक अवलोकन हेतु दिशा निर्देश ।

अकादमिक अवलोकन का मुख्य उद्येश्य प्रत्येक विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण अधिगम और शिक्षण को सुनिश्चित करते हुए विद्यार्थी और शिक्षक को बेहत्तर प्रदर्शन के लिए तैयार करना है। संभाग, जिला, विकासखंड, संकुल स्तर के सभी अधिकारी सप्ताह में दो दिन अकादमिक अवलोकन हेतु सुनिश्चित करेंगे। अकादमिक अवलोकन संबंधित निरीक्षण प्रपत्र और निर्देश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे ।

शिक्षक, HM व CAC कि भूमिका हेतुदिशा निर्देशCLICK HERE
अकादमिक अवलोकन हेतु विस्तृत दिशा निर्देशCLICK HERE
शैक्षणिक कैलेण्डर 2022-23CLICK HERE

अवलोकन बिन्दु :-

  • शासन स्तर से शिक्षा सत्र 2022-23 हेतु विद्यालयों के लिए शाला कैलेंडर जारी किया गया है। शालेय कैलेंडर अनुसार प्रत्येक विद्यालय में निर्धारित समय सारिणी का प्रदर्शन किया गया है अथवा नहीं ।
  • शाला कैलेंडर में प्रत्येक माह में की जाने वाली संज्ञानात्मक एवं सहसंज्ञानात्मक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है ।
  • यह सुनिश्चित किया जाना है कि क्या उस माह हेतु निर्धारित गतिविधियों का संपादन निर्धारित समय सीमा में किया जा रहा है ?
  • कक्षा प्रारंभ के पूर्व बुनियादी दक्षताओं के विकास हेतु कराये जा रहे अभ्यास का अवलोकन किया जाए ।
  • कक्षा शिक्षण को इस तरह सुनियोजित किया जाना है कि प्रत्येक कालखंड में 10 -15 मिनट का उपचारात्मक शिक्षण किया जाए ।

संकुल प्राचार्य की अकादमिक भूमिका एवं जिम्मेदारी –

  1. अपने संकुल के समस्त विद्यालयों की माह में कम से कम 02 बार सूक्ष्मता से मॉनिटरिंग करना तथा विकासखंड / जिले को फीडबैक देना ।
  2. प्रत्येक शाला में अवलोकन हेतु आधे दिवस का समय देना, शाला की अकादमिक वस्तुस्थिति की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन एवं समस्या का निराकरण करना ।
  3. शालेय शैक्षिक कैलेण्डर का पालन सुनिश्चित कराना ।
  4. उपचारात्मक शिक्षण सुनिश्चित कराना ।
  5. संकुल अंतर्गत शालाओं के शिक्षकों की विषयगत अवधारणात्मक समझ विकसीत करने के लिए अपने विद्यालय से व्याख्याताओं/ शिक्षकों को Mentor नियुक्त करना ।
  6. राज्य द्वारा भेजी गई विभिन्न पठन सामग्रियों का कक्षा में उपयोग सुनिश्चित कराना ।
  7. विद्यालयीन गतिविधियों का अवलोकन करना, छात्रों की बुनियादी दक्षताओं को जांचना ।
  8. राज्य द्वारा आयोजित विभिन्न योजनाओं / प्रशिक्षणों का अपने संकुल में क्रियान्वयन कराना।
  9. अपने अधीनस्थ समस्त विद्यालयों में मासिक, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक आकलन / परीक्षा सुचारू संचालनसुनिश्चित कराना तथा विद्यार्थियों की मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की रैंडम चेकिंग करना।
  10. कमजोर परीक्षाफल वाले विषय शिक्षकों का उपचारात्मक शिक्षण पर प्रशिक्षण सुनिश्चित कराना।
  11. शैक्षिक संकुल समन्वयक से विद्यालय अवलोकन का फीडबैक प्राप्त करना एवं समीक्षात्मक रिपोर्ट विकासखंड शिक्षा अधिकारी को सौंपना ।
  12. संकुल अंतर्गत प्रत्येक शाला का परीक्षा परिणाम निम्नानुसार हो यह सुनिश्चित करना
    • कक्षा 1 से 8 तक का प्रत्येक विद्यार्थी न्यूनतम C ग्रेड के साथ उत्तीर्ण हो ।
    • कक्षा 9वीं एवं 10वीं के प्रत्येक विषय में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत न्यूनतम 70% हो।
    • कक्षा 11वीं एवं 12वीं के प्रत्येक विषय में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत न्यूनतम 80% हो ।

शैक्षिक संकुल समन्वयक (CAC) की अकादमिक भूमिका एवं जिम्मेदारी –

  • शैक्षिक संकुल समन्वयक संकुल प्राचार्य के अकादमिक सहायक के रूप में कार्य करेंगे।
  • माह में संकुल की सभी शालाओं का न्यूनतम 02 बार सूक्ष्मता से अवलोकन करना । शाला अवधि के आधे समय तक रहकर अवलोकन करना।
  • विद्यालयीन गतिविधियों का अवलोकन करना, छात्रों की बुनियादी दक्षताओं को जांचना ।
  • शालात्यागी (ड्रापआउट) बच्चों को मुख्य धारा में जोड़ना ।
  • समावेशी शिक्षा हेतु प्रशिक्षित शिक्षक की व्यवस्था करना।
  • शैक्षिक गुणवत्ता के वृद्धि हेतु प्रयास ।
  • शालाओं में उपचारात्मक शिक्षण सुनिश्चित कराना।
  • समय – समय में शासन से प्राप्त निर्देशों एवं समय सारिणी का पालन सुनिश्चित करना।
  • अपने अधीनस्थ समस्त विद्यालयों में मासिक, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक आकलन / परीक्षा सुचारु संचालन सुनिश्चित कराना तथा विद्यार्थियों की मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की रैंडम चेकिंग करना ।
  • समस्त शासकीय योजनाओं का निरीक्षण एवं पालन सुनिश्चित करना / कराना ।
  • अधिकारियों द्वारा दिए गए टीप (फीडबैक) का परिपालन करना ।
  • अवलोकन की रिपोर्ट शाला संकुल प्राचार्य को सौंपना।

प्राचार्य/प्रधान पाठक की अकादमिक भूमिका एवं जिम्मेदारी –

  • कक्षा अध्यापन का अवलोकन करना।
  • विद्यालयीन गतिविधियों का अवलोकन करना, छात्रों की बुनियादी दक्षताओं को जांचना।
  • माह में न्यूनतम दो बार सभी अकादमिक पहलुओं पर सभी कक्षाओं का गहनता सेअवलोकन करें।
  • शाला का परीक्षा परिणाम निम्नानुसार हो यह सुनिश्चित करना
    • कक्षा 1 से 8 तक का प्रत्येक विद्यार्थी न्यूनतम C ग्रेड के साथ उत्तीर्ण हो ।
    • कक्षा 9वीं एवं 10वीं के प्रत्येक विषय में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत न्यूनतम 70% हो
    • कक्षा 11वीं एवं 12वीं के प्रत्येक विषय में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत न्यूनतम 80%हो ।
  • पाठ का सारांश अवलोकन एवं मार्गदर्शन देना (शिक्षक डायरी ) ।
  • शासकीय योजना एवं शासकीय निर्देशों का पालन करवाना।
  • शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा पंजी संधारण ।
  • सभी शिक्षकों का प्रशिक्षण सुनिश्चित करवाना।
  • अध्यापकों में नेतृत्व क्षमता का विकास।
  • समय – समय में शासन से प्राप्त निर्देशों का पालन करना ।
  • मासिक परीक्षा की 2 प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करेंगे और रिपोर्ट विकासखंड / जिला शिक्षा अधिकारी को सौपेंगे।
  • शिक्षक डायरी कक्षा शिक्षण के पूर्व प्रत्येक शिक्षक से अपेक्षा की जाती है कि पढ़ाए जाने वाले पाठ / अध्याय की समुचित तैयारी करें। इस हेतु निम्नानुसार निर्देश दिए जाते हैं
    1. शिक्षक नया पाठ प्रारंभ करने के पूर्व उस पाठ का सारांश एक पृष्ठ में तैयार करेंगे ।
    2. पाठ/अध्याय के सारांश को एक ही पृष्ठ पर लिखा जाना है। पाठ/अध्याय पूर्णता हेतु अनुमानित दिनों की संख्या के अनुसार सारांश को पृथक-पृथक खंड में लिखा जाना चाहिए ताकि प्रत्येक दिन हेतु निर्धारित विषय बिन्दु स्पष्ट हो सके। उदाहरण के लिए – यदि कोई शिक्षक किसी पाठ को 05 दिनों में समाप्त करने का अनुमान लगाता है तो पाठ / अध्याय का सारांश एक ही पृष्ठ किन्तु 05 छोटे-छोटे खंड/अनुच्छेद में लिखा जाना चाहिए। प्रत्येक खंड एक दिवस में अध्यापन हेतु तय विषय बिन्दुओं को दर्शाएगा।
    3. शिक्षक निर्धारित प्रारूप में डायरी भरना सुनिश्चित करें ।
    4. शिक्षक प्रत्येक सप्ताह / नया पाठ प्रारम्भ करने के पूर्व तैयार किए गए पाठ सारांश का अवलोकन प्राचार्य/प्रधानपाठक सें करवाएँ एवं हस्ताक्षर लें ।

शिक्षक की अकादमिक भूमिका एवं जिम्मेदारी –

  • लर्निंग आउटकम्स आधारित अध्यापन की योजना बनाना।
  • छात्रों की बुनियादी दक्षताओं को जांचना एवं उपचारात्मक शिक्षण करनापाठ्यक्रम के अनुरूप कक्षा अध्यापन करना ।
  • शाला कैलेण्डर का पालन करना
  • शाला में शतप्रतिशत बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करना ।
  • कक्षा शिक्षण दौरान तथा अन्य शालेय गतिविधियों में सभी बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करना ।
  • आकलन करना (मासिक, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक तथा वार्षिक) ।
  • कक्षा 1 से 8 तक का प्रत्येक विद्यार्थी न्यूनतम C ग्रेड के साथ उत्तीर्ण हो यह सुनिश्चित करना ।
  • कक्षा 9वीं एवं 10वीं के प्रत्येक विषय में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत न्यूनतम 70% हो यह सुनिश्चित करना।
  • कक्षा 11वीं एवं 12वीं के प्रत्येक विषय में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत न्यूनतम 80% हो, यह सुनिश्चित करना।
  • समुदाय एवं अपने सहकर्मियों के साथ समन्वय स्थापित करना।
  • समय-समय में प्राप्त निर्देशों का पालन करना ।
  • साप्ताहिक परीक्षा अंतर्गत पूरे सप्ताह में जो भी अध्यापन कराया गया है उसकी जांच 10-15 मिनट में दूसरे सप्ताह के प्रथम दिवस में करेंगे।
  • शिक्षक निर्धारित प्रारूप में डायरी भरना सुनिश्चित करें ।

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